“ उपकार के वद्ला ”

“ उपकार के वद्ला ”

उ लवण्डीहे रोडके किनारे सिमेन्टके गाढा वोकत देखतहुँ । महिन उ चेहरा कहुँ देखलअस लागरहे । मै निहारके हेर्नु उहिन, उ के हो ? कहिके अपन दिमाकमे जोड दरनु, अन्दाज लगैना कोसिस कर्नु । उहिन का पता कि कोइ मोरमे निगाह रख्ले बा , उ तो निमार्णाधिन पुलमे मजुरी कर्नामे व्यस्त रही । मै लग्गे जाके चिन्नहाँ कोसिस कर्नु, उ आउर कोइ नाई हमारे परोसी गाउँक् “नैना” रही ।
आज उ चेहरामे पहिलेसे बहुत अन्तर बा । झुर्री परल कुरुप चेहरा, चिथ्रा लागल लेंहगा, ठाउँठाउँमे पेंउँदा लगाइल व्लाउज, दुवर पातीर शरिर । जव मै उहिन पहिल चो देखल रहु“ तो कत्रा सुघ्घर रही, गुलीयार चेहरा बडबड आ“खी, हारकाठ मिलल् गोहर सँवर रंग कत्रा सुग्घर देखाई साफ सुथरा कपडा लगाई, मनो आज ऐसिन अवस्थामे पुग्गैली यि मै सपनामे फे नाइ चितैले रहु“ । उ महिन एक नजर हेरली ओ डौडती भाग्गैली । उहिन देख्के महिन कैसिन कैसिन लागल, पहिलेतो सोग लागल पाछे रिसफे उठल ओकर पर मनो ओकर कोई कसुर नाइरहिस विचारी मजबुर रहे ।
रातके बेरी खाके सुतेगैनु तब मोर निंद कासौं दुर भागतहे । घरी घरी ओकर चेहरा मोर आँखीमे आइतेहे, ओकर कहल बात मोर कानेमे गुन्जतहे । जौन उ समाजके सामने महिन भलाबुरा कहले रही । मोर दिमाकमे नैना ओ उ रुद्र प्रतापके सैतानी करतुत आजके ताजा बा ।
आजसे पाँच वर्ष, पहिले, उ दिन मै सरासर से आइतहुँ , मोर सस्रारके दक्षिण एकथो झेाँरिया परथ, ओकर आउर आगे एकथो पथरैया लडिया परथ । साँझ होगैलरहे, मै हाली पुगम कहिके लगातार जोरसे गन्तव्य ओर कदम बढैतीरहुँ । कुछ घची रहिके मरघट्टी द“रवा पुग्नुतो झोल्पत अन्धार होगैल रहे । जोन्हीया“फे उठगैल, पुन्वासिक् ओजरिया रात, डगरके आ“जर पा“जर पर्सा ओ रोहनीके छेहुलासे डगर कबरार देखाए । ओजरिया रातमे कबु मोर बौनी देखाए कबु नुके, कबु अपने बौनी देख्के झस्कु“ । आज भूतप्रेत, डाईन, बोक्सीन, मसान भेंट हुइतीतो का करम कहिके अनेक किसिमके कल्पना कर्तिरहु“ । मनमे भय ओ त्राससे दिमाक स्थिर नाईरहे । मै जै जै जै हनुमान गोसार्इं कर्ति अपने धुनमे आइत रहुँ ।
अचानक मोर कानेमे दिल दहला देहेवला आवाज आईल । उ आवाज सुन्के मै खोव डरैनु । मै सत प्रतिशत अन्दाज लगा लेहनु उ आवाज कोई लवण्डीके आवाज हो । मनो जेंहाँरसे आवाज आइतहे उँहर जाइ नाईसेक्नु, का करेकी जव मै छोट रहु“ तव डाई कहलेरहे मरघट्टीमे मरी राइथैँ । मै मरी समझके भागे लग्नु आवाजके विपरित दिसा ओर । उ अवाज आउर ज्यादा दर्दनाक रुपसे चिल्लाइतहे, बचउ–बचाउ कहिके अपन सहयोगके लाग वलाइहे मोर कदम अचानक रुकगैल । पुरान धारणा छोडके मै ज्या हुइतो हुई कहिके अपन ज्यानके फे परवाह नाईकरके उँहरी चलदेहनु जेंहेाँरसे आवाज आइतहे ।
जब मै वहा“ पुग्नु तो मोर आत्मा का“पउठल उहाँके दृश्य देख्के । तीन थो दरिन्दा भूँखाइल बाघ अस एकथो अकेली लवण्डीक् उपर आक्रमण करतहै । विचारी जहाँ सम आवाज रहिस उहा“ सम चिल्लाइतही । ओ अपन बचाउके असफल प्रयास करतही । तिनो गिद्ध हु“क्रनके सैतानी कुकर्मफे अपन मंजिल पाइक्लग प्रयास करती रहिन । यि घोर अन्याय महिनसे नाई देखगैल ओ विचमे मै वोल पर्नु “ छोडो साले नर पिचासो विचारी अकेली लवण्डी पाके यिहिन …………….. ” । मोर वात पुरा हुइनासे पहिले तिनु जाने मोर उपर आकर्षण करे डौड परनै जस्ते बजवा अपन सिकार झपोते डौरथ । जत्रा शक्ति रहे ओत्रा तो मुकावला कर्नु आखिर ओइनके सामने मोर कुछनाई चलल् ।
अन्तमे मै अपन ओ उ लवण्डीक् बचाउ कर्ति ओकर हा“थ पकरके भागे लग्नु । भागे बेर कहु“ बैरिक् का“टा तो कहु“ खोल्ही खापटमे उझिटके गीरपरी, अत्रा कष्ट ओ तकलीफ उठैति हम्रे मुस्किलसे अपन ज्यान बचाई सेक्ली । सुरक्षित स्थानमे पुग्लीतो मै चयनके स“ँस लेहनु ।
उ लवण्डी आउर केउ नाई, हमरे गाउ“क् जम्निहान नैना रही । ओ तिनु नर पिचास जुन रुद्रप्रताप, रामदुलारे, ओ सुन्दरलाल रहैं । ओइने गाउ“मे नामी गुण्डा, फटहा लुच्चाके रुपमे चिन्नहा“ जाईं । ओइनके बाबा हु“क्रेफे गाउ“क् शोषक, अत्याचारी, फटहाके रुपमे चिन्नह“ जार्इं हु“क्रनके नाउ“ क्रमशः रघुवाज्ञे, दोङ्गला, बरघरिया, सिन्कीभुठनिया ।
मै नैनाहे लैके सरासर हु“कार घर गैनु ओ हु“कार बाबाहे सब बात विस्तृतरुपसे वतैना सुरु कर्नु मोर बात सुनत सुनत हु“कार बाबक् रिसके सिमा नाई रैहगैलिन । जम्निहान बुढवा रिसके मारे लाल पियर होगैल । मै उहिन सम्झाबुझाके शान्त पर्नु ओ दिलास देहती कहनु “ बुदु अपने महिन साथ देहवीतो उ फटहा हु“क्रन जेल पठाई सेकम ” । मोर बात बुदुहे चित बुझगैलिन । उ कहनै “ नाती अपने जौन कर्ना बा करी, ज्या परीतो परी मै जरुर साथ देम । आज मोर छाईक् ईज्जतसे खेल्वाड कर्ले बातंैतो ओइनके मजाफे देखि ” । मै बुदुक् बाते पर भरोसा करके विहानके १० बजे ठाना पुग्गैनु ओ तिनु गुण्डा हु“क्रनके नाउ“मे रिर्पोट लिखा देहनु । रिर्पोट देहलेक् दोसर दिन वलौआ आगैल । हम्रेफे जैना जरुरी रहे । मै डौड्ती बुदुक् घर गैनु, जब मै बुदुक् घरे सोझे सड्केमे पुगलरहु“ तब्बहीं दुई थो मनै क्रमशः रघुबाजे, डोङ्गला बरघरियाहे घरेमसे निक्रत देख्नु । महिन बहुत आश्चर्य लागल । मै का देखतु“ कहिके आ“खीमे विश्वास नाईहुईतहे । मै उहा“ पुगतसम उ दुनु जाने मोर आ“खीसे ओझल होगैलरहंै ।
मै बुदुहे ठानामे रिर्पोट लिखैलेक् बात बतैनु, बुढुवा मोर बातमे कोई मतलब नाई राखल, मै कहति गैनु “ आज नैना अपन मु“हसे ठानामे बयान दि तो उ फटहा हु“क्रन सजाय पक्कैफे हुई । बुदु अपने ओ नैना जैसिक्फे ठानामे पुग्ना जरुरी बा ” । बुढुवा मुन्टा हिलाके मौन स्वीकृती देहल ।
मै ठानामे आस लागल रहु“ । नैनाहे न्याय दिलाएक् लाग । १० बजेसे वैठल वैठल मिच्छागैनु न तो उ फटहा ह“ुक्रे अइनै न तो नैना ओ ओकर बाबा अइनै । मोर मनमे शंका उपशंका उठे लागल कहु“ यि रघुबाजे ओ डोङ्गला बरघरियाक् काम तो नाईहो ? अभिन तक नाई अइनै मनमे तमान किसिमके कल्पना कर्तिरहु“ तब्बहीं तिनु अभियुक्त रुद्रप्रताप, रामदुलारे, सुन्दरलाल ओ ओइनके बाबा ह“ुक्रे क्रमशः रघुबाजे, दोङ्गला बरघरिया, सिन्कीभुठनिया ओ २–४ थो गाउ“क मनै ठानामे पुग्नै ।
लगभग २ बजे ओर ठानाके वैठक्कीमे सवजाने जुटगैली । हमार मुद्दा हेरे, ओ पुछताछ करे जव ठाना इन्र्चाज आइल तव मोर मनमे खुसिके लहर छा“गैल । मै अपन मनेमने साेंच्नु आज नैना सवके सामने अपन उपर वितल घट्ना वताई, उ नलायक हु“क्रनके सारा करतुत खोली तब ठाना ओइन सजय दि, गाउ“क् मनैनके नजरसे गीर जैहीं, समाजमे मुह“ देखाइ लायक नाई रैहजैहीं । सव केउ ओइनहे थु–थु करी कहिके विश्वस्तरहु“ । मनो मोर विश्वास ओ खुसी वेरसम नाईरहल । जौन वात मै अपन मनमे सोंचलेरह“ु उ मोर भ्रम केलरहे । उहा“तो मोर साेंच्लेक् ठिक उल्टा हुइल ।
ठाना ईन्र्चाजके पुछताछ पाछे नैना चिल्ला चिल्लाके कहतरही “ मोर कुछनाई हुइल हो यि तिनु जाने मोर अंग तक नाई छुलेहोईं, तो हाथपाई कर्ना तो दुर बा । महिन वेकारमे आज ठानाके मुह“ देखेपरता , मोर कत्रा भारी वेइज्जती हुइता । बाबा, बुदुक् नाई देखल ठाना चौकी देखेपरता ” । नैनक् अ“ँखीसे वनावटी आ“स झल्मलागैल रहिन । मै चुपचाप रहु“ पथ्थरके मुर्ति वनके । वोल्ना डगरे नाइरहे, कुछ वोल्तु“ कलसेफे कोई विश्वास नाइ करत, उहेमारे वोल्नाफे उचित नाईमन्नु । जौनकुछ सुनतहु“ सुन्ती रैहगैनु । रुदप्रताप, रामदुलारे, सुन्दरलाल जुन मोर ओर आ“खी मट्काके खिज्वा“ई ओ हा“सह“ँसके एक दोसरसे वत्वाइतहैं ।
दुनु पक्षके वयान सुनके ठाना ईन्र्चाज अपन ठोस निर्णयमे पुगल ओ महिन गाउ“के ईज्जतदार मनैनमे विना कारण झुठा अभियोग लगैलेक् ओरसे मानहानी कर्लेक् सार्वजनिक मुद्दा लगाया गैल । मै ठानामे थुनाया गैनु । उ अभियूक्त हु“क्रे ईज्जतके साथ उहा“से गाउ“ चलगैनै ।
विहानके बाबा महिन छुटाई आइल, तव मोर जमानतके लग ठाना धरौटी मागल । हमार घरके स्थिती नाजुक रहे, ढाइचारमे बाबा पैसाफे कहा“ पाई गाउ“के पैसावाल हु“क्रेनसे मगल मनो, गरी वईज्जतीके शिवाय कुछनाई पाईल । पैसा रहल मनैफे बाबाहे गरियैती कहलीस् “ ऐसिन बदमास नालायक तोर छावाहे पैसा के दि । आजतो जम्निहान बुढवा ओ गाउ“क् भगवानअस रघुवाजे लगायतके भलमन्सा चिराकीया हु“क्रनके झगडा बझादेहल । अस्ते पछे हमार विचमे झगडा बझाईफे सेकी । मनैनके वात सुनत सुनत बाबाक् कान भरगैलिस । निरास होके घर लौटगैल ।
अस्तेके ३–४ दिन वितगैल पँ“चवा दिन बाबा महिन छुटाई अइल बाबक् स“ग रघुबाजेफे रहे । बाबा ओ रघुबाजे ठाना ईन्र्चाजके कोठामे गैनै बस मोर छुट्टी होगैल । बाबा कहल “घरे चोल” ।
जव मै थानासे बाहेर अइनु तब बाबक् नजर बचाके रघुबाजे आ“खीमेका चश्म सरकाके, चश्माके उप्परसे विलरियाअस हेरती कहल “ तै तो अभिन भरखर्रीक् लडका हुइस, का जन्बे । ऐसिन खेल खेलत खेलततो हमार जिन्दागी वितता । आजसे मोर विरोधमे आवाज उठाइबेतो समझलिहिस तोर घरमे प्रलय होजाई । आझीक् सक्कु रुपीया ठानामे बुझाईक्लग मै तोर बाबाहे देहले बातु“ । यि हेर ( कागज देखैती ) आगे सालके धान देम कहिके तोर बाबा औंठाछाप लगैलेबा । एकथो वात आउर कान खोलके सुनले जम्निहान बुढुवाके ऋण बीसहजार माफ कैदेम कहिके उहिनसे झुठा बयान देहाय गैलबा । ऋण माफ कर्नातो दुर बा ओकर जगगाके पुर्जा समेत मोर कब्जामे बा, समझले ” । कहती लम्बा लम्बा कदम बह्रैती चलदेहल । मै हेरती रैहगैनु जेहाेंर उ गैल ।

 

साहित्यकार भेाजराज चैाधरी

गाँउ धर्मपुर