कैलाली सेे बर्दियाके खाता गाँउ सम्मके साहित्यिक यात्रा

कैलाली सेे बर्दियाके खाता गाँउ सम्मके साहित्यिक यात्रा

तुं महिन छोरके गैलदिन मोर, बास उठ्ने बा..।
बाससंगे मोर जीन्दगीक कुछ, खास उठ्ने बा..।
    
जोनदिन तुं जैनेबातो, पियाके घर मांग सजाके..।
तो तोहांर सजल दोलीसंगे मोर, लाश उठ्ने बा..।

सामाजिक संजाल फेसबुक मे मै अपन वालमे रहल यिहे मुक्तक पहर्ती रहुं मै, एक्कासी मोबाइलके घण्टी बोलल् तररर….तररर…तो मै झसक उठ्नु , काकरेकी मोर मोबाइलमे ऊ समयमे केका्रे फोन नै आए, ऊ फे लावा नम्बर से, मै फोन उठैनु ”राम राम जय गुर्बाबा, अंकर चौधरी हुई कना प्रश्न आइल, जवाफमे हजुर राम राम जय गुर्बाबा मै अंकर चौधरी नै हुइतु, उहंर से फे जवाफ आइल मै अनुराग सायर दाह्रीवाला, बर्दिया से, तब मै झत् से चिहिन लेनुं, हजुर बताई सर का बा हालखबर कना मै फे प्रश्न कर्नु जवाफ मे ठिक बा कनै और हमार यहा“ बर्दियामे सावन १६ गते हर्दहुवा विषेश कार्यक्रम बा, जैसिक फे अइबी, हम्रे अस्रामे बाती, मै फे सहमती जनैती कहनु समय रहितो पक्कै फे अइने बातुं, अत्रै कहती फोन मनसे बिदावारी लेली ।
यि बात हो २०७२ सावन १४ गतेके, जोनकी बर्खक सिजनके समय हो, खेत्वम् धान लगैना, खेत्वा जोत्ना, मच्छी मर्ना, गेङ्ता कहर्ना समय फे हो । यिहे समयमे खेत्व्ँँ ओत्व्ँँ लगाके हर्दहुवा फे खाजाइथ, मोर मोबाइलमे फोन आइल, बातचित हुइल, कार्यक्रममे आइकलाग प्रस्ताव धारल, जैम कना फे सहमति जनाइल और उ बर्दियाके खाता गाउ“के कार्यक्रम सफल हुइलेक यादगार पल मै अप्नेनके माझमे सातसात करे जाइतु, तितमिठ नोनार तेलार आमिल गुरी जैसिन फे हुइ कलेसे फे पहरके साथ देबी कना आस बा पाठकवृन्द हुक्र ।
मै उ रात भात ओत खा के सुतजैथु, दोसर बिहान हुइथ अर्थात सावन १५ गते, मै लहाखोरके भात ओत पकाके गंगा डंगौरा दाजी हे फोन कर्थु, ”दाजी महिन फे लैजैबी बर्दियाके कार्यक्रममे, मै फे जैम, महिन फे निमन्त्रणा आइल बा,” दाजी कथैं ”ठिके बा भाई अप्ने अतरियामे ठिक ३ बजे पुगजैबी, हम्रे यहा“ से सा“झके ४ बजे निकरेक लाग बाती कहिके कथैं, मै फे ठिक ३ बजे अतरिया पुगजैथुं, उहा“ पुग्थुतो आउर संघरियन फे आइगिल रथैं और अस्रा लग्ती रथैं, मने हमार बुकिङ् करल गारी अभिनसम् नै आइल रहथ, एक दुइथो संघरियन फे नै आइल रथैं, गारीक और संघरियनके अस्रा लागत लागत हमार अतरियामे  ६ बज्जाइथ, कुछ समय पाछे हमार बुकिङ् करल गारी फे आइजाइथ, हम्रे सक्कु जे गारीमे बैत्थी और हमार यात्रा सुरु हुइजाइथ, कैलालीके अतरिया से बर्दियाके खाता गाउ“सम्के यात्रा, हम्रे गारीमे बैथके जैनाक्रममे बिचबिचमे संघरियन बितोर्ती जैथी, जब हम्रे लालपुर पुग्थी तो दुइथो लवन्दि संघरियन लेहेकलाग बढेहा कतिटोल कना गाउ“मे जैथी उहा“ हम्रे लगभक २०–२५ मिनेट सम् डग्रामे अस्रा लग्थी, लवन्दिनके सप्राइ ना कहिजाई कुछ समय पाछे अइथैं तबजाके हम्रे गारीमे बैथके हाइवे रोडमे निक्रथी, हम्रे ऊ गारीमे लगभक ११–१२ जे संघरियन रथी, डगर भर्के सक्कु संघरियन राहरङ्गित कर्ती जैतिरथी, गारीमे सक्कु जे साहित्यकार तो नै कहु थोरथोर टुटल फुटल रचना जोरे सेक्ना खालके संघरियन हुइलेक कारण, गजल, मुक्तक गितबा“स गा के एकदोसर हे चलैती डगर भर्के रमाइलो कर्ति हम्रे रातके लगभक १० बजे कर्णालीके पुल चिसापानी पुगजैथी, हम्रे भात नै खाके अइलेक कारण भुंख फे बहुत जोरसे लग्ती रहथ, हम्रे एक्थो होटलके आघे अपन गारी रोकाके सक्कु जे होटलमे भात खाई जैथी, भात खउइया संघरियन भात खैथैं जांर पिउइया जांर पिथै, ”संगमे गुरभङ्ग कथै” मै फे कबु नै पिना मनै संगसंगै संघरियन संग एक दुई गिलास तान लेथुं, भुंख्ले पेट हुइलेक कारण हो कि का मोर आ“खी तो तिरमिराइ लागथ, पेट फे तातुल लागे लागथ, संगे रहल संघरियन फे दुई–दुइथो देखे लग्थुं, फुरे से कहैं जा“र लागथ तो बोल लर्बराइथ कहिके,जत्तिके मै उहदिन पता पैनु, मोर बोल फे लर्बराइ लागथ, कबु नै बोल्ना मनै, गुम्मर मनै जा“र लागल तो मुहेमे माछी नै बैथे देना जैसिन चपचप चपचप बत्वाइ लग्नु, एक्थो हमार थारुमे कहकुत बा ”जा“र गिल भितर बात निक्रल उप्पर” कहिके, यि कहकुत हमारेमे मेल खागैल, हमार खाइत पियत लगभक रातिक साढे १० बजजाइथ, अभिन हमार बहुत दुर जैना रहथ, तबमारे हम्रे झतर पतर करके, खाइल पियलके बिल तिर्थी और अपन गोर टुटलहस् लर्बरैती गारीमे बैत्थी, हमार गारीके गुरु फे गारी हांके लग्थैं, हम्रे कर्णाली ठनसे अपन कैलाली हे २ दिनके लाग अपन हात हिलैती बिदाइ कर्ती बर्दिया जिल्लामे प्रवेश कर्थी ।

सक्कु जे खाइल पियल हुइलेक कारण सैल डगर गित गैती रमाइलो कर्ती जैथी, बिच–बिचमे चेकपोष्ट (ब्यारेक) परथ चेक करैती जैतिरथी, यिहे क्रममे हम्रे कर्णाली, आम्बासा हुइती भुरिगाउ पुग्थी, हमार यात्रा खाता गाउ“के लाग हुइलेक कारण हम्रे हाइवे रोड छोरके कच्ची रोड पकर्थी, अनुराग सायर दाह्रीवाला सरके गाउ“, जहा“ हमार गन्तव्य स्थान रहथ, कच्ची रोड हुइलेक कारण सैल डगर गारी हम्रहन लकझक लकझक पर्ती रहथ, चिसापानी मे खाइल पियल सक्कु उत्रेहस् करेलागथ, अइसिन ढुङ्गाहा डगर ना कहिजाई गारीक भित्तर बैठल बैठल चुत्तरमे फोलर उठगिल रहथ, उप्पर से जा“र पियल पेट ना कहिजाइ ट्याङ्की फे फुल हो गिल रहथ, पानी आके फे डगर सक्कु हिल्लैहिल्ला करदेले रहथ, ढुङ्गैढुङ्गा डगर, उप्परसे खाल्हीउ“चा बराहैरान लागथ, कबुकबुतो गारी बर्वार ढुङ्गा मे चहरत तो तरेसे निक्रे निक्रे करथ, हम्रे गारी रोकाके ट्याङ्की फे खाली कर्थी, अस्तेक रमाइलो यात्रा करथ–करथ हम्रे बर्दियाके खाता गाउ“ लगभक रातिक १२ बजे पुगजैथी, उहा“ हमार स्वागतके लाग बर्दियक संघरियन सुतल फे नै रथैं, हमार अस्रा लग्ती रथैं, हम्रे पुग्थी तो हमार भव्य रुपमे स्वागत कर्थै, हात मिलैथी परिचय कर्थी, फेसबुक मे किल बातचित हुइल, फोटो मे किल देखल मनैन हम्रे प्रत्यक्ष्य रुपमे आमने सामने भेट हुइल रथी, तबमारे हम्रे बहुत खुशी हुइल रथी, मोर तो झन खुशीके सीमै नै रहथ, काकरेकी मै ऊ गाउ“मे पहिल फेरा गैल रहुं, मनो कोइ कोइ संघरियन तो एक दुई फेरा आसेकल रथै, हम्रहन उह“क संघरियन किहिनो कोन्तिमे, किहिनो बहरीमे तो किहिनो ओसह्र्रुवा मे बैठैथैं, उहा“ फे हम्रे भात खैना मनै भात खैथी, जा“र पिना मनै जा“र पिथैं, उहे क्रममे सुख दुःखके बातचित हुइथ, एक–आपसमे चिन्हाजानी हुइथ, केउ केउ लावा संघरिया फे बन्थैं, हम्रे भात ओत खाके सक्कु संघरिया स्कुलमे सुते जैथी, सुत्ना क्रममे कुछ घण्टा रमाइलो फे कर्थी, रात फे बहुत हुइगिल रहथ, सक्कु जान्हनके आ“खी निदेक मारे चिपचिपाइ लागल रहथ, तबमारे सक्कु जे सुत जैथी, कोइ कोइ संघरियन घोरी बेंचलहस् स्वां स्वां सुत्थैं, तो कोइ कोइ संघरियन बिलार गुर्राइहस् घ्वा“र–घ्वा“र नाक बोजाके सुत्थैं, चाहेतो खतिया उठाके मर्घत्वम् धार अइले फे पता नै पैना जैसिन, मनो कोइ कोइ संघरियन अइसिन रहैं रातभर नाचेहस् थप्रा मर्ति सुतैं, उ थप्रा मर्ति सुतुइया मनैयां मही रथुं, काकरेकी अत्रा धेर मनैनके लाग मच्छरदानी लगाके सुताइ सेक्ना अवस्था फे नै रहथ, तबमारे रातभर मच्छर कबु गाले गाले कातैं तो कबु गोरे गोरे, रातभर सुते नै मिलत्, अस्ते अधकच्रै निद सुतत् सुतत् बिहान फे हो जाइथ, बिहानभर पानी आइथ, हम्रे कुछ संघरियन हातगोर धोधाके चिया नास्ता करके खाता गाउ“ घुम्थी, अस्तेक क्रममे कुछ संघरियन नेपालके सबसे लम्बा पुल कहिके घोषित हुइल १०१५ मिटरके ”गेरुवा” पुल हेरे जाइ कना बात कर्थै, हम्रे गंगा दाजी, दिनेश दहित, सागर दाजी, सुमित राजा, विनोद राजा, सोम सर और मै ३ किलोमिटरके पैदल यात्रा करके हम्रे गेरुवाके पुल पुगजैथी, उहा“ पुगके हम्रे फोटो खिचैथी, ३ किलोमिटरके पैदल यात्रा करके अइलेक कारण १ किलोमिटरके ऊ पुल ओहोर दोहोर करे सेक्ना हमार हिम्मत नै आइथ, हम्रे उपार जाइ नै सेक्थी, हमार कार्यक्रम स्थलमे नेङ्के जाइ सेक्ना अवस्था नै हुइलेक कारण गारी हे लेहेक बोलैथी, कुछ संघरियन गारीमे बैठके चलजैथै मनो हम्रे गंगा दाजी, सुमित राजा, विनोद राजा, सोम सर और मै भर नै जैथी, हमार तो दोसर प्लान रहथ, हम्रे होटलमे जैथी मै बाहेक सक्कु जे भोत्का दारु और मच्छी खैथैं मै भर चिसो पिथु, मनो अन्तिममेभर जबरजस्ती पिवा देथैं महिन फे दारु, हम्रे उहा“ बैठके कार्यक्रममे का का कर्ना कहिके योजना बनैथी, उहेक्रममे कार्यक्रम स्थलसे फोन फे आइ लागथ, हम्रे फे उहा“ से निकर जैथी, डगरभर राहरङ्गित कर्ति जैथी, कार्यक्रम स्थलमे पुगके हम्रे खाना खाइ जैथी, कार्यक्रमके बर्का पहुना हुक्रे फे आइगिल रथै मनो ओइने फे खाना खाइ गैल रथै, आउर संघरियनभर स्टेज बनैना मे लागल रथै, अस्तेक करके ऊ समयमे मौसम फे साथ नै देलेरहथ, पानी अपन मनका सिमसिम सिमसिम अइती रहथ, समय बित्ति जाइथ ऊ हर्दहुवा बिशेष कार्यक्रम फे लगभक १ डेढ बजेसे औपचारक रुपमे सुरु हुइजाइथ, कार्यक्रमे उद्घोषणमे दर्पन कुसुम्या सर साथ देती रथै, ओस्तके बर्का पहुनाके रुपमे दाङ् से आइल कलाकार तथा साहित्यकार छबिलाल कोपिला, खगेन्द्र गिरी कोपिला, सोम डेमनडौरा, सुशिल चौधरी, बालिका दिदी लगायतके आउर जे फे आइल रथै, मनो महिन खास्से नाम याद नै हुइल, अस्तेके कार्यक्रम फे निरन्तर रुपमे आघे बहर्ती रहे, धिरेधिरे समय फे साथ देती रहे, काकरेकी पानी रुकगिल रहे, चितङ्गा घाम करलेले रहे, हम्रे कैलालीके हिरगर साहित्यिक बगाल से आइल सक्कु संघरिया कुछ नया“ करके देखाइ यि खाता गाउ“मे कना सोच बनाके हम्रे मघौटा नाचके तयारी करे लग्थी, कुछ समय पाछे हमार फे पाला आइजाइथ, हम्रे मदरिया, नचुनिया, गउइया स्टेजमे जैथी तो तालीके वर्षात हुइथ, हम्रे अपन मन्द्रक तालमे गित गैती खुब नच्थी ।

अस्तेक करके कार्यक्रम फे निरन्तर आघे बहर्ती रहथ, कुछ समय पाछे मोर फे प्रस्तुती देखैना पाला आइजाइथ, मै फे अपन गजल बाचन करके कुछ समयसम् सक्कु जाहन हे राहरङ्गित पर्थु, आउर संघरियन फे रमाइलो करैती रथैं, डिउली गजलसंग्रहके कुछ संघरियन साहित्यिक सम्मान फे करजाइथ, ठाकुर अकेला, सरस्वती कुसुम्या, सुरज बर्दियाली लगायतके आउर आउर जनहन्, सम्मान स्वरुप प्रमाणपत्र और दोसल्ला ओह्र्राजाइथ बर्का पहुनन् के हातसे, अस्तके करत करत कार्यक्रम फे अन्तिम् अन्तिमवर आसेकल रहथ, धिरेधिरे सा“झ फे हुइती रहथ, यिहे क्रममे साम डेमनडौरा दाजी महिन और सुमित राजा हे जंग्रार साहित्यिक बखेरी मलेशिया शाखासे प्रकाशित हुइल थारु भषाके संयुक्त गजलसंग्रह ”पस्नक् पन्ह्वा” हमार हातमे ठम्या देथै, काकरेकी हम्रे फे यकर हिस्सेदार रथी, मै ऊ किताब पाके बहुत खुशि रथुं, काकरेकी मोर गजल फे ऊ पस्नक् पन्ह्वा मे संरहित रहथ, यिहे क्रममे सक्कु जनहन से भेट हुइती रहथ, मिठमिठ बात हुइती रहथ, छबिलाल दाजी महिन एक्थो किताब देथै ”आदिवासी शब्दचित्र” खुशि लागथ ऊ किताब पाके फे महिन, यिहे क्रममे कार्यक्रम फे ओराइजाइथ, लगभक सा“झके ६ बजगिल रहथ, हम्रे सक्कु जे जाके एक्थो संघरियक घरमे मि¤नी खैथी, नामभर खास्से याद नै हुइल कोन संघरियक घर मि¤नी खैलीकना, रिसेनाभर नै रिसादेबी, मि¤नी मे हम्रहन ढिक्री, सिध्रक पक्ली आलुक तिना लगायतके आउर आउर चिज फे रहे, मि¤नी खाके हम्रे सक्कु जे फोटो खिचैथी, उह भेटमे दिर्ग सर, सरस्वती, गिताञ्जली, अमन, सिता निश्चल, लगायतके धेर जन्हनसे भेट हुइल, नाम ले ले से तो किताबके पन्ना फे नै पुगी तबमारे उल्लेख नै     कर्नु, हम्रे सक्कु जे अपन अपन गारीमे बैठ्थी, छबिलाल दाजीहुक्रे अपन गारीम और हम्रे अपन गारीम बैठके सक्कु जन्हनसे बिदाइके हात हिलैती और बेर फेर से भेट्ना बाचा कर्ती बिदा होजैथी, अस्तेके जैना क्रममे एक्थो होटलमे कुछ संघरियन अपन दोज पुगैथैं मै भर गारीमे बैठल रथुं, महिन निद लागत रहे तबमारे अक्को फे पिनास नै लागत रहे, उ समयमे रातिक लगभक ७–८ बजगिल रहे, हम्रे उहा“ से निकर जैथी, दिनभरिक नेंगल, बोलल् कुदल हुइलेक कारण बहुत हैरान लागल रहत, मोर तो झन पेट गम्मसे फुलल् रहथ, उप्परसे ढुङ्गाहा डगर ना कहिजाई और नै बिसाइ पाइल चुत्तर, फोलर उलर्के तो बेढब पिराइथ, सक्कु संघरियन मिच्छाइल रथैं, किहिनो बोल्नास् फे नै लग्थिन, सिध्रक पक्लि खाके हो कि का बरा पुंइन पुंइन भर पद्ती रथै, उह समयमे महिन अइसिन लागत कि हम्रे दुलही पठाके घरे जाइती कना जैसिन, कोइ फे नै बोल्थै, बोलत् तो खाली उहे चुत्तर मनसे निक्रल पुंइन पाद और उहे गारीक ढोंढोंढों……..निक्रल अवाज, रात फे धिरेधिरे छिप्पती रहथ, अस्तेक जैन्ँ क्रममे भुरिगाउ“, आम्बासा, कर्णाली हुइती हम्रे लम्की लगभक रातिक ११ बजे पुग्जैथी, मोर घरभर जबलपुर हुइलेक कारण महिन सक्कु जे गारीमे अमौरासम् छोरे अइथैं, मै अमौरामे उत्रठुं संगे विनोद राजा फे मोर संगे उत्रथैं, गंगा दाजीहुक्रे फे हम्रहन दुनुजहन छोरके अतरियाके लाग अपन सफर सुरु करदेथै, रात बहुत हुइलेक कारण गाउ“ जाइ सेक्ना अवस्था फे नै रहे, तबमारे मै विनोद राजाहे लैके एक्थो संघरियक घर बास बैठाइ लैजैठुं,  ऊ संघरिया फे अत्रा रातसम् मोर अस्रा लागल रथैं, बहुत रात हुइलेक कारण हम्रे बिना भात खैले सुतजैथी काकरेकी हम्रहन बहुत हैरान और निद लागल रहथ, जब बिहान हुइथ तो हम्रे संघरियक घर चिया नास्ता करके बिदा लैके अपन अपन डगर लग्थी, सुमित राजा अपन डगर मै अपन डगर………………………………
अइसिक सफल हुइथ हमार कैलाली से बर्दियाके खाता गाउ“सम् के यात्रा, यि २ दिनके यात्रामे हम्रे बहुत कुछ सिख्ली और अनुभव कर्ली, अपन जानल चिज सिखैली और नै जानल चिज सिख्ना कोशिस कर्लि, कथै नेपाली मे एक्थो कहकुत बा ”पढेर भन्दा परेर सिकिन्छ” कहिके वास्तबमे हो यि बात, बहुत यादगार बनल ऊ बर्दियाके खाता गाउ“सम् के हमार साहित्यिक यात्रा । लि तो मोर मैगर पाठक संघरियाहुक्रे आझुकलाग अत्रै बचलखोचल हुइ कलेसे औरे भागमे नै तो औरे कोनो दोसर अस्ते अनुभव लैके अइनेबातुं आझुकलाग अप्नेनके आ“खीसे ओल्तार हुइतुं राम राम जय गुरुबाबा ।
हाल धनगढी, कैलाली