बिरमा बहिनी 

बिरमा बहिनी 

मोहनलाल चौधरी
अघत्य कौनो देशमे एकथो राजा रलह । ऊ राजाके दुईथो रानी रलहीन । बरकी रानीके कोखसे चारथो राजकुमार ओ एकथो राजकुमारी लालके नाउँसे जरमल रलह । तर छोट्की रानीकओरसे चाहीं लाल जरमना बाँकी रह । राजाके राज्यम अन्नधन,श्रीसम्पत्ति, लाउलस्कर,हाँथीघोरा,सेना,पुलिस आदी परिपूर्ण रलहीन । स्वर्गके अप्सरा जसीन लावन्ययुक्त राजलक्ष्मी अति सुन्दर सुन्दर बरकी ओ छोत्की दुईथो रानी और चारथो राजकुमार तथा एकथो राजकुमारी रहलम बहुत खुशीमय जिवन व्यतित करतलह । राजाके असल निति नियम,असल कानुन,अच्छा बानी व्यवहार ओ राजा प्रजालोगन फेन आपन लरकापरका जस्तहीं प्रेम,मायाँ ममता कर्नाले प्रजालोग फेन बहुत खुशी रलह । बुद्धि विवेकसे भरिपूर्ण ब्ुद्धिमान मन्त्री,अनुभवी भारदारसे राजाहन राज्य चलैना देश सुहाउँदो मजा सरसल्लाह सुझाव देहन । राजाके कुशल राजकाजसे छरछिमेकके अन्य राजा रजौतालोग फेन प्रभावित हुईल रलह । साथ साथ ऊ राजाके सैन्य कौशलतासे फेन अन्य देशके राजालोग दराईंत । अतः ऊ राजा असल निति,नियम,कुशल राज्यकोैशलताके साथे ममतामयी प्यारा प्रजा तथा बुद्धिमान मन्त्रीमण्डल भारदार सहित खुशीमय अमनचयनके साथ जिवन व्यतित हुईतरलहीन ।
क्रमशः दिन बित्तीगैल दिन् दिन राजा छोत्की रानी प्रति आकर्षित हुईती गैल ओ बरकी रानी प्रति विमोहित हुईतीगैल । छोत्की रानीके लरका हुइना समय लग्गु अईतीम छोत्की रानी आपन राजकुमारन राजकाज दिलैना दाउपेचम लाग लग्ली । दिनहुँ छोत्की रानी राजकाज सम्बन्धी बात बत्वैना और राजाहन आपनओर आकर्षित पर्ना ओ बाचा खवैना काम करलग्ली । पहिल पहिल त राजा एकदम अमान्यम रलह । काहे की राजा अधर्म नै करना चाही । राजा स्वार्थी नै हुईना चाही । राजा पक्षपाती नै हुईना चाही ओ अच्छा भला खराबके सोंचसमझके सही निरनयमे रहना चाही । इहे कारन्से राजा धर्म अधर्मके समझदारी राख्के छोत्की रानीक कपटपूर्ण चालबाजीके पाछ नै परना चाहँत ।
स्वभावीकले बरकी रानी एकदम लक्षणयुक्त,सीधा,एकथो कुशल रानी ओ राजलक्ष्मीके रुपम चिन्हजागैल रही । मन्त्रीमण्डल,भारदार तथा सेना पुलिससे लेक प्रजालोग फेन बरकी रानीके बानी व्यहोरा मन परल रलहीन । बरकी रानी सबजहन प्रति समान्ताके व्यवहार ओ ममतामयी रलही । बरकी रानी निष्पक्ष,निःस्वार्थी राजमहिषी रलही । बरकी रानी आपन लाल (लरका परका )हुकनके साथ साथ सौतिनीया रानीक लालन(लरका परका) आपनय लाल जसिन व्यवहार करना पक्षम रलही । कोहीप्रति छेरछारके भावना नै रख्ना पक्षम रही । तर विदम्बना इ बा की सोझ कथुवाहन जो कोई कट्ना चाहथ और सिधासाधन जो कोई फेन फँसैना चाहथ । बरकी रानीहन छोत्की रानीके कपटपूर्ण चालबाजीके कोई पताजता नै रलहीन ।
समयके अन्तरालम धिरे धिरे तथियाम फ्वाङ्ग पर गैल । छोत्की रानी दिनहुँ राजाके उप्पर मायाँजाल फैलाक राजाहन आपनपर आकर्षित कर्क कपटीभावम समाहित करदरली । राजा छोत्की रानीके अकर्मण्यताम दुबके निर्वोली होगैल और कपटपूर्ण व्यवहार कर्नाम बाध्यतावश विवश होगैल । राजा अत्रासमके की राज्य कलंकके शिकार बन्गैल ओ साथे जालंधा होगैल । समय सापेक्ष एकदिन मौसम एकदम सफा और शरदऋतुवान चकमन्न चहकार रह । मौसमके सेरोफेरो देख्के राजाके मन शिकार खेल जैना इरादा हुईल ओ राजा दलबल सहित शिकार खेल गैल । शिकार खेल गैल राजा शिकार खेल्नाम मगनमस्त रलह । राजाहन अत्रासमके सोंच नै रलहीन की छोत्की रानी नै हुईना हरकत करी ।
इहाँ छोत्की रानी आपन रनिवासम जाक कोठा बन्द करक आपन कपडा अप्नहीं चिरफारक,आपन जिउ अप्नही चिंथबकोत्क खटोलपात लेदरली । साँझ परल राजा शिकार खेल्क घर घुम्ल त छोत्की रानीहन नेगघुम इहँर उहँर करत नै देख्ल त रनिवासम जाक हेर्थ तौ रानी कोथा बन्द करक खटोलपात लेहल । राजा कोथा खोलाक रानीसे पुछलघरीम रानी इ अरगना धरली की ू तुहाँर छाावा राजकुमारन राजकुमारी मोर कपडा चिरफारक,जिउ पुरा चिंथबकोत्क खत्तम पारक लाग रलह । असीन करहीं कलसे मै कसीक जिय सेकम । रानीक मुर्खता बात सुन्क राजा एकघरी त अलमलम परगैल और सोंच्लकी राजकुमार राजकुमारी असीन अनैतिक काम त नै करलहुईहीं कहिक सोंचत सोंचत आखिरम साईत करलभी हुइहीं कहना निर्णयम पुग्क दिलम एकीन कर्ल । पाछ राजा बाचाम तुहीनसे एकथो बचन कहतु ,इ बचन मन्बो त मै अन्न खैबुँ, पानी पिबुँ अन्यथा अस्तहींके भुँख्ल मरजैबुँ । तब राजा कहल की तैं बता मै तोर माग अवश्य पूरा करबुँ । राजाके बाचा खाईल बचन सुन्क छोत्की रानी मख्ख पर्क कली की तोहाँर बरकी रानीओरसे जरमल चारथो राजकुमार ओ एकथो राजकुमारीहन देश निकाला करदेओ ।
ू राजा किं कर्तव्य मुढू पर्क आखीरम मायाँजालंधाके कारण आपन चारौ राजकुमार ओ एकथो राजकुमारीहन बिना पत्ताके देश निकाला करदेल । राजकुमार ओ राजकुमारीके कौनो पता नै होक बिना कौनो दोषके देश निकाला करदेना कहाँसमके अन्याय हो जो की राजा जस्तो मनै अन्याय कर्ना ही नै चाही ।आग सहीसत्य जमाना दाईबाबा ज्या कलसे फेन लडका मान्जैना और बात नै काट्क सरासर आज्ञापालन करना दिन रह । उह कारण चारौ राजकुमार ओ राजकुमारी बाबादाइनसे विदा मागके चुपचाप देश निकाला होगैल । जाते जाते सबजन एकथो घना बन्वाँम पुग्गैल । वहाँ जाक काम चलाउ घर बनैल और खैनापिनाके बेली बिस्तार करलग्ल । खानापिना बनाइकलाग शुरुम त आगी ओ पानी चाहल तबमार आगी ओ पानीके जुगार करपरल । खैर पानी तौ लदियक किनार घर बनैल रलह त पानीक समस्या नै परल तर आगी त पासम रह नै आगी त खोजहीक परल ।
आगी पत्ता लगाईक लाग कहाँ आगीक धुवाँ आइता कहीक एक भाई सबसे ढेंग रुखुवाम चढके हेर्ल त उत्तर दिशा एक ठाृउँ दईंरादैंतुरुवाके घरसे आगीक धुवाँ आईत देख्परल । रुखुवा चौढुइया राजकुमार सिधा उत्तर आगीक धुवाँ आईत जानकारी करैल । आगीक पत्ता लागल जानकारी कराईल पाछ चारौ राजकुमार त राशनपानीके खोजम निकर्ल तर आगी लन्ना जिम्मा बहिनीयाँ बिरमा बहिनीहन देक अप्न चारजन चारौ दिशा निकर्गैल । इहाँ राजकुमारी बिरमा बहिनी घर हेर्ना
ओ आगी लन्ना करलग्ली । आब राजकुमारी बिरमाबहिनी आगीक खोजम चल्ली । उत्तर दिशा चल्ते चल्ते आगी रहल घर पुग्ली । ऊ घर दैंरादैंतुरुवा (राक्षस) के घर रह । ऊ घरम दैंरादैंतुरुवा (राक्षस) के दाईकेल रलहीस । दैंरादैंतुरुवा चाहीं खैनापीनाके खोज्म गैलरह । दाई बुढाइल रना ओ घर्म कामकाज करुईया मनैके चाहना रहलम दैंरादैंंतुरुवाहन जन्नीक जरुरत रलहीस तर भेटाइलनै रह ।
दैंरादैंतुरुवा(राक्षस)के दाई बुढाईलके मार काम करना कर्रा परस् । बुढिया कहकी कहिया पटुहिया पैबुँ त काम कर्नाम ठोरिक हल्का हुई । दिन बित्ती गैल एक दिन अचानक राजकुमारी बिरमाबहिनी आगी माग गैल्म मौका लागल पाईल्म दैंरादैंतुरुवाके दाई मनम गहिंरसे सोंच्लीस की इहे लवँरियहन पतोहिया बनाईपरल,मौकाम लवँरिया आईल्वा कहिक बुढिया मजासे बैठ्ना देहल,पानी देहल ओ मिथ बचन लगाक,नाउँ गाउँठाउँ ओ का कामसे आईल पुछल् । पुछल घरीम राजकुमारी बिरमाबहिनी सारा आपन वृत्तान्त बत्वाक बाद्म आगीके खोजम आइल बतैली ओ आगी माग्के जैना इरादा करली । राजकुमारी आपन मुकाम्म जैना बात बत्वाईत सुन्क दैंरादैंतुरुवा(राक्षस)के दाई सोंचल की मौका इहे हो यही कौनो फेन उपायले रोक्ना मन्सायले आगी देना आलताल करती एकदोसर कामकरना बहानाले आगी देनाम ढिलाई करलागल ।
भित्र भित्र राजकुमारी कब आगी मिली त घर जैबुँ कही । तर बुढियाके भित्री चाल पता नै हुईलीन । राजकुमारी हलीकी हली आगी माग लग्ली त बुढिया कहलकी नानी आज समय होगैल काल्ह जैहो आपन घर । तर राजकुमारी नै मान्क बलजफ्ती आगी लेक जाई लग्ली त बुढिया दोसर उपाय सोंच्क कहल की नानी लग्गु आओ त ,राजकुमारी लग्गु आईल्म बुढिया चक्कुले अंगरी कातदेहल ओ कहलकी रकत आई त इ बेंररीक पतिया देहतुँ इहे एक एकथो पतियाम पोंछती गिरैती जैहो त और दिन फेन इहाँ अइना दगर जानजाई । इहाँ दगरके बात नै रहकी राजकुमारीहन फँसैना जाल रच्गैल रह । जब राजकुमारीबिरमा बहिनी आगी लेक आपन डेराम गैली त बाद्म दैंरादैंतुरुवा खैनापिना जिन्वाँर लेक आईल ।
घर आइल्म दाई पानी दे दाक कहलीस्की छावा आझ कत्रा दूर आहारा खोज गैलरल्हया । झट्ट अइना हो,सुनौलो मौका चुका दरल्या । इहाँ मौकासे एकथो बहुत सुघ्घुर लवँरिया आइलरह । पटोहिया बनाईकलाग रोक्ना बरी कोशिस करनु तर नै रुकल । दाईक अत्रा बात सुन्तीकी दैंरादैंतुरुवा अट्टहास्म परगैल ओ पुछलागल, दाई कब आइल्रह,कहोंर गैल रु बता दाई मै खोज जैबुँ । दैंरादैंतुरुवा असिन बात कहल्म दाई कहलीस्कि तैं चुप लाग,मै सब जुक्ती जोर रख्नु । ऊ लवँरिया आगी खोज आइलरह,आगी खोज आईल्म मै नाउँ,गाउँठाउँ पुछ्रख्नु, ओ ऊ लवँरिया घर जाईबेर डगर जानकलाग एकबेंररी पटिया देक ओकर अंगरी काट्देनु जब रकत आईलग्लीस त इ रकत इहे पतियाम पोंछ्क दगरी दगरीम गिरादेहस कहलबातुँ । काहे की रकत पोंछल पतिया देख्लसे अलपत्र दगर जानजाइर्।
अगर तैं खोज जाईत्या कलसे रकत लागल पतिया जहाँ जहाँ जाई उह दगर होक जाईस । दाईक अत्रा जुक्तीवाल बात सुन्क दैंरादैंतुरुवा बरा खशी हुईल ओ लवँरियाके खोज्म चलल् । दाई जस्तक बत्वाइल रलहीस ओस्तहींक रकत लागल दगरके खुइ पैलेइती जइते गैल,जाते जाते आखीरम बिरमाबहिनीके डेराम पुग्गैल । बिरमाबहिनी घरदुवार झारबहार पारके और सबसामान ठेगान लगाइतरलही ओ आब पानी लेह जैना तरखरम रलही उह समय दैंरादैंतुरुवाहन आइल देख्ली । बिरमाबहिनी असिन असिन कबु नै देखल्म डराईलग्ली और मन्म सोंचलग्ली की इ मनै हो की राक्षस हो,राक्षस जस्सीन देख्थुँ । काहे आइल्हुई । अत्रा मन्म सोंच्क सेक्तीकि दैंरादैंतुरुवा(राक्षस) बिरमाबहिनीक लग्गु आईल् । राक्षस दैंरादैंतुरुवा लग्गु आइल्म बिरमाबहिनी पहिलत हँचक गैली,हँच्कनक बाद्म आपन मन धिरसे थाम्हकन पुछली । तै के हुइस रु कहाँ अइल्या रु कहाँ हो त्वार घरद्वार.रु
राजकुमारीक प्रश्न सुन्क बताईल की मै दैंरादैंतुरुवा(राक्षस) हुइतुँ । मोर घरदुवार इहे बन्वाँम हो । मोर बन्वाँम बैठ्ना हैबियत हो । मोर घर्म बुढाइल दाई ओ मै केल्हीक बाती । मोर जन्नी नै हो । दाई बुढाक शक्ति ओरागैल बातिस ।बुढाइलके मार कामकाज करनै सेक्थ्या ।घरम और कोई काम करुइया मनै नै होक बरा गाह्रो बा । तबमार जन्नी बनाइकलाग तोही लेह आईल बातुँ । दैंरादैंतुरुवाके
अत्रा अशोभनीय बात सुन्क राजकुमारी रीससे चुर होगैली ओ बहुत चिन्ताम परगैली । उहँर राजकुमारलोग फेन अहपताइ लग्लकी, बनुवाँम अकेली बाबुहन छोर्क आइलबाती हाली हाली जाइ । तर राजकुमारलोग डेराम पुग नै सेकल रलह । दादुन नै आईसेकलम राजकुमारी बरा कठिन अवस्थाम परगैली । उहँर दैंरादैंतुरुवा कहलागल की,चोल मोर घर,तोही बरा सुखसयलम राखम । मिठ मिठ खवैबुँ पियईबुँ । त्वार दुःख नै करबुँ । मजा मजा लगाइक देबुँ ।दैंरादैंतुरुवाके अत्रा बात सुन्क राजकुमारी रीसाक बोल्लीकी,मै त्वार जन्नी बनकलाग नै आइैल हुइतुँ ,महीं कारणवश यहाँ आइ परल बा ,कुछ दिन बाद यहाँसे चलजैबी । म्वाँर चारथो दादुन फेन बात । म्वाँर दादुन अइहीं त तोही मार दरहीं ,तैं इहाँसे चल्जा । राजकुमारी बिरमाबहिनीके अत्रा बात सुन्क दैंरादैंतुरुवा कहलागल, चोल म्वाँर घर त्वार दादुसादु मै नै जन्थुँ । तोही मै जस्सीक फेन आझ लैजाक छोरम् कहत घरीम राजकुमारी घरभित्तर जाक दुवार बन्द करदेली ।
तर दैंरादैंतुरुवा बहुत बल्गर रह,ऊ दुवार नै पत्याईल,दुवार उभोक उभाक्क राजकुमारीहन लैजैना कोशीस करल् तर नै सेकल । लैजाइ नै सेकलम दोसर जुक्ती जोरलकि आपनसंग लैगील तरवाल हाँथम लेक दुवारीक कोन्वाँम लाग्गैल । जब याकर दादुन् घरक भित्तर आइलगहीं त काट्देम कहिक । बाहर अंगनाम आगी सुल्गाइल बा और कुछ सामान बाहर परल बा । घरके दुवार लगाईल बा, मनै कोइ नै हुइत कहना जसिन भान हुइल बखत चारौ दिशासे चारौ राजकुमारलोग आगैल । डेराम अइथ त राजकुमारी बिरमाबहिनी नै हुईती । बाहर अंगनाम आगी सुल्गाईल बा,और कुछ सामान बाहरै परल बा पानी लन्ना गगरी फेन बाहरै परल बा । बाबु बिरमाबहिनी,बाबु बिरमाबहिनी कहिके हाँक पारत,तर कोर्ई आवाज नै आइथो । घरके दुवार लगाईल बा । राजकुमारी बिरमाबहिनी भित्तर घरम दैंरादैंतुरुवाके दबम परक बोलचाल कर नै मिल्ना रह त कहाँसे आवाज आई । दैंरादैंतुरुवा पहिलहीं राजकुमारीहन दक्ल्या चुक्लरह की जहाँ तैं बोल्व्या तौ तोही काट्देबुँ । राजकुमारी डरके मार बोलचल नै सेकत रलही ।
बाहर सामान परल बा,राजकुमारी बिरमाबहिनी फेन नै देखपरत हुई,चारौ
तरफ सुनसान बा, बरा अचम्मके माम्ला हुइल । राजकुमारी बाहर नै होक घरहींम हुईना चाही कहना सोंच् बनाक चारौ राजकुमार सल्लाह पर्ल की पालीक पाला भित्तर भित्तर घरम जैना । बरका राजकुमार कहल पहिल मै भित्तर जाउँ । भित्तर जाईकलाग बरका राजकुमार गित गाक दुवार खोल कल —
गित
बरका राजकुमार( उभोको री उभोको हे, बिरमा री बहिनी बजरा केवार ।
चारुओरसे आईपुग्ली हे चारु भाई ।।
बिरमाबहिनी राजकुमारी— उभोको रे उभोको,हे बरका रे दादु बजराकेवार ।
इहाँ त जे छेंकलबात् ,दैंरा रे दृुवार ।।
गितले अत्रा बात कहिक बरका राजकुमार एक लात दुवारम मर्ल । लात्तीले दुवारम मारल्म दुवार खुलल्, दुवार खुलल्म राजकुमार कहल की कौन दुश्मन घरक भित्तर बा सारे,हमार बाबुहन सँतुइया,आब्ब ठिक पार् देबुँ कहती राजकुमार भित्तर पैंठ्ल । भित्तर घरम पैंठ्तीकी दैंरादैंतुरुवा राजकुमारहन काट्देहल । इहाँ तिन भाई राजकुमार बरका दादु घरक भित्तर गैलक बरी बेर होगैल । ना अप्न बाहर आइथुइत ना कौनो हालखबर आइथो । तिनौ भाई घब्राईत । करकर भुँख लागता । माम्ला जुन्हुँक अस्सिन परिआईल्बा । बरी अप्थ्यारो स्थिती आगैल । बरका दादु घरके भित्तरसे नै अइना ओ बाबु बिरमाबहिनी फेन कौनो खबर नै पठाईल्म मझ्ला राजकुमार कहल की मै जाउँ आब घरक् भित्तर,कहिक गित गाक दुवार खोल कहथ (
गित
मझला राजकुमार— उभोको री उभोको हे बिरमा री बहिनी बजरा केवार ।
चारुओरसे आईपुग्ली , हे चारु भाई ।।
राजकुमारी बिरमाबहिनी ( उभोको रे उभोको, हे मझला रे दादु बजरा केवार ।
इहाँ त जे छेंकल बात् , दैंरा रे दुवार ।। घरक भित्तरसे बाबु बिरमाबहिनी दुवार उभोक कहलम मझला राजकुमार फेन रीसकमार दुवारम भर्याङ्गसे लात मारक भित्तर जैथ,भित्तर जैतिकी दैंरादैंतुरुवा तरवालले छ्वाट्ट काटदेहथ । मझला दादु घरक भित्तर गैलक बहुतबेर होगैलम इहाँ सँझला ओ छोट्की राजकुमार अच्चम्मम परजैथ । बरका दादु गैल बरका दादु कौनो खबर पठैल ना बाहर अइल,मझला दादु गैल मझला दादु फेन कौनो खबर नै पठैल ओ ना त अप्न बाहर अइल । का कारण हो । अत्रा बात कहिक सँझला राजकुमार घरक भित्तर जाईकलाग गित गाक दुवार खोल कहथ ।
गित
संझला राजक्ुमार — उभोको री उभोको हे बिरमा री बहिनी ,बजरा केवार ।
चारुओरसे आईपुग्ली , हे चारु भाई ।।
राजकुमारी बिरमाबहिनी— उभोको रे उभोको सँझला रे दादु बजरा केवार ।
इहाँ तजे छेंकल बात दैंरा रे दुवार ।
अत्रा बात कहिक सँझला राजकुमार घरक भित्तर जैथ । राजकुमार भित्तर पैंथतिकी दैंरादैंतुरुवा तरवालले काटदेहथ । सँझला दादु घरक भित्तर गैलक बहुत बेर होगैलम फेन कौनो हालखबर आईल ना त अप्न बाहर अईल । बहुत मुश्किलके बात हुईल । बरका,मझला,सँझला दादु घरक भित्तर जाक कौनो हालखबर नै अईना ना त बाबु बिरमाबहिनी बाहर अईना का कारण हो कहिक छोट्का राजकुमार कहथ । आखीरकार और दादुन् गैल्म अप्न फेन त भित्तरके माम्ला बुझ जाईहीक परल । कौनो ना कौनो कारण त जरुर हुई । कहिक छोट्का राजकुमार घरक् भित्तर जैना इरादा कर्थ ओ गित गाक बाबु बिरमाबहिनीहन दुवार खोल कहथ ।
गित
छोट्का राजकुमारः उभोको री उभोका,े हे बिरमा री बहिनी बजरा केवार ।
चारुओरसे आइपुग्ली हे चारु भाई ।।
राजकुमारी बिरमाबहिनी ः उभोको रे उभोको छोट्का रे दादु बजरा केवार ।
इहाँ त जे छेंकल बात दैंरा रे दुवार ।।
अत्रा गित गाक सेक्क छोत्का राजकुमार कहल की कौन दैंतुर मोर घरम आक मोर बहिनीयाँहन सँताईता,घरके दुवारफेन खोल नै देहथो तिनथो दादुन घरक भित्तर गैल हुकनफेन का गति करैल बा पतै नै देहाईथो । आब मै भित्तर जैथुँ कहिक भर्याङ्गसे लातले दुवार खोल्थ ओ भित्तर घरम जैथ । भित्तर घरम जैतिकी दैंरादैंतुरुवा छोत्का राजकुमारहनफेन कातदेहथ । चारौं राजकुमारन कत्लक घर भित्तर रकतके खोल्ह्वा बहल रह । सक्कु दादुन दैंरादैंतुरुवा कात्देहलम बहुत रुवाबासीम आगैली राजकुमारी । उहाँ दैंरादैंतुरुवा आपन घर लैजाईकलाग,चोल आब मोर घर कहिक कहता । राजकुमारी बहुत कठिन परिस्थितिम फँसगैली । उहँर चारौ दादुनके लास परल बा । उहँर घर रक्तारुहुन बा । उहँर भुँखपियाससे मुना हुइता ।
काकरुँ का नै करुँ । अकल नै अईना होगैली राजकुमारी । दैंरादैंतुरुवा घरी घरी मोर घर चोल कहता । सरसामान ओस्तै परल बा । के सिखा दि त के सम्झा दि । दिलम रुइना बाहेक और कुछ नै आईथो । रुइती रुइती राजकुमारी मन्म सोंच्ली की मै इ दैंरादैंतुरुवाके घर त जैबो नै करबुँ,बल्की सक्कु दादुनके दाहबत्ती करबुँ,दादुनके दाहबत्ती करबेर दादुनसंग सती चलजैबुँ । अत्रा मन्म गुनली । इ बिचार मन्म गुन्तीबेर दैंतुरुवा पँज्र आक कहता की तैं जल्दी चोल मोर घर चोल । कइयो बार कहीसेक्नु । तैं मोर घर नै जैब्या त तोर फेन का हालत हुइथ । दैंरादैंतुरुवा अत्रा बात कहलम राजकुमारी कहली की मै आपन दादुनके दाहबत्ती बिना कर्ल कहों नै जैबुँ । राजकुमारी अत्रा बात कहल्म दैंरादैंतुरुवा खामोस हुइल ओ कहल की जल्दी दाहबत्ती कर । अत्रा बात होकसेकल्म राजकुमारी सक्कु दादुनके दाहबत्ती करना चिता बनैना तरखरम लग्ली ।
झत्त घर जैबी,झत्त राजकुमारीहन घर लैजैबुँ सोंच्क दैंरादैतुरुवा काठी खोज्क लानल । राजकुमारी सक्कु दादुनके एक्कम चिता बनैली । चिता बनाक आपन सक्कु दादुन् चिताम धर्ली । सक्कु दादुन चिताम धैक सेक्क आवश्यक सामग्री ओह्रनाफाटासे लेक चाउर दाल,तिनातरकारी तेल घिउ चिताम देली । आवश्यक सक्कु सामग्री आदी दारक सेक्ली त आगी लगैली । उहाँ दैंरादैंतुरुवा घर जाइकलाग कहता । घरी घरी दैंरादैंतुरुवा ताजन लगाईलम राजकुमारी कली की मै कमसे कम आपन दादुन तिलान्जली देलीउँ । धरम्भात देलीउँ । आब्ब मै शोकले विह्वल बातुँ,त्वारका पता बा,तैं त मही जन्नी बनाई पैनु कैक बहुत खुशी बत्या,तर तैं कत्रा अपराध ओ पाप कर्लबात्या तथा महीं कत्रा मुश्किलम पर्लबात्या जो की म्वार सहनसीमा नै रहगैल हो । जबकी मोर दादुन ओत्रा दूरसे रासनपानी खोज्क अईल,भूँखासल पियासल रलह,संगसंग मै फेन आभिनसम् भूँखासल पियासल बातुँ ।
हमन खैनापिना समेत मौका विना देल मोर सक्कु दादुन कात्देल्या और मही आपन दादुन्के दाहबत्ती,तिलाञ्जली,धर्मभात तक देनाम बाधाअरचन् करत्या और मही बराबर आपन घर लैजैना करकाप लगाईत्या कहाँसम्के अत्याचारके भावना हुई त्वारम कहिक दैंरादैंतुरुवाहन अल्मलैली राजकुमारी । दैंरादैंतुरुवा(राक्षस)फेन थोरिक लज्जास्पद्म आइल । दैंरादैंतुरुवक संग अत्राबेर बात करकसम् चिताके आगी धम्धमाके बढगैल । चारौतर्फ सरसामानके विचार कर्ली राजकुमारी कहों कुछ छुतगैलबाकी कहिक । सबचिजके चारौंतरफ नजर लगाक सेक्क पहिलक शोंच जौन आपन दादुन्के संग सती जैना शोंच्लरलही उह बिचारम अईली राजकुमारी । राजकुमारी आपन दादुनसंग सती जैना मौका खोजलग्ली । जब दैंरादैंतुरुवा अन्त एहोरं उहँर करलागी या कहोंरे जाई तब मै चिताम कुद्क दादुनके संग सती जाजैबुँ ।
अत्रा मन्म सोंच्तीरलही राजकुमारी बिरमाबहिनी थिक्कपर बाहर कौनो और चिजबस्तुम दैंरादैंतुरुवाके नजर लाग्गैलीस ओ उहँर और चिजबस्तु देख्नाहेरनाम ध्यान होगैैलीस ऊ उहँरे ओर मगनमस्त होगैल । राजकुमारी अत्रा बुद्घि लगैलीकी दैंरादैंतुरुवासे एकदम रीसके आवेगम आक बातचित करबुँ त महीफेन कातदी । अगर महीफेन राक्षस कात्दी त मोर दादुन दाहबत्ती बिना बिना ओ सतीगती बिना रही जैहीं । पाछ भूतप्रेतम रही जैहीं,इसकारणसे साधारण किसीमसेही चल्क आपन काम पूरा करना उचित बा । तर राजबंशम जरम् पाक राजा या राजकुमारलोग बुुद्घिबल रथ । अत्रा बिघ्नबाधा आगैल्मफेन राजकुमारी एक्थो नै बिचलित ओ हतोत्साहीत नै हुईली,नै घबरैली, ना त डरैली एक्को । साहसम परलरली । दैंरादैंतुरुवा बहुत धारधम्की देखाइल्मफेन धैरयता राख्क समस्याहन समाधान करली । जो की भरखर १२÷१४ बरषके लडकी आपन अडिकम रहसेक्नाफेन बहुत साहसी ओ धैर्यवान मानजाई ।
जब दैंरादैंतुरुवा बाहीरी चिजबस्तुम ध्यान लगाई लागल थिक्क मौका पाक राजकुमारी बरल चिताम कुद्गैली । राजकुमारी आपन दादुनसंग सती गैगीली । एकछीन बराबेर हुईल त राक्क्षसके यहोंर ध्यान अइलीस । एहोंर हेरथ् त राजकुमारीहन देख्बोनैकरथ् । बरामुश्किलके बात हुईल । राक्क्षस शोंचता ओ कहता की आब्ब त संग बातचित बत्वैली । एहोंर उहँर चारौंतरफ हेरलागल, नै देखथो । घरक भित्तर जाक हेरल,घरक् भित्तर फेन नै मिल्लीस । आसपास चारौतरफ बन्वाँओर हेरल तहुँपर नै भेटाईल । खद्धी खद्धा,दोंदरी दोंदरम हेरल खोजल नैभेंटाईल । जहाँ खोजल तबफेन नैभेंटाईल । भेंताई कहाँसे,राजकुमारी त जरक ओराचुकल रही ।
आखिरम कौनो उपाय नै लागलग्लीस त शोंचलकी मोर घर जाईक डर आपन दादुनकेसंग जरकलाग चिताम त ना कुदुक गैल कहिक जरती चिताम हेरल,और चित नै बुझ्लीस् त नम्मा लग्गी कात्क लग्गीले ओल्टापल्टाक हेरल, हेरत घरीम राजकुमारीक तरपन लगैना कपरा अचानक ठेङ्गराले दब्क जरनै सेकलरह । और मुन्टा पुरा जरनैसेकलम कानके भागम कानम कुण्डल लागल देखल त जान दारल की राजकुमारी पक्का इहे हो,कहिक बिचार करल और मन्म शोंचलकी मै फेन जिना बेकार बा । नाहक्म मै ई राजकुमारन कात्क राजकुमारनके ओ राजकुमारीक बिलीम्बास परनु। राजकुमारलोग मुल त मुल तर राजकुमारी फेन मुगैल । का फाइदा हुइल ।राजकुमारन कत्बुँ त राजकुमारीहन अवश्य लैजाई पैबुँ काहेकी राजकुमारन कात्देलसे त राजकुमारीक कुछ् जोरनैचलहींस ।आखीर पाछ त करकबल जाइहीक परहीस ओ जाइ जरुर । अत्रा शोंच्क इ काम कर्लक हो,तर ठिक उल्टा हुइल । मै अत्रा शोंच्लनै रहनु की राजकुमारी आपन दादुनकेसंग सती चल्जाई । आपन शोंचल जस्तो नै हुईल । एक त राजकुमारन कात्क महाअपराध ओ पाप भोग्नु,उसीम राजकुमारीहनफेन गवाँमरनु त मोर इ हत्कण्डा कैक का फाईदा हुईल । मै त बेकारम अपराध ओ पापके भागीदार होगैनु । आब मै इ संसारम जिना बेकार बा, मै फेन राजकुमारन ओ राजकुमारीकेसाथ इहे चिताम जर्क मरजाउँ कहिक शोंचल ।
अत्रा बात शोंच्क दैंरादैंतुरुवा फेन उह चिताम कुदुक्क जरक मुगैल ।राजकुमार ओ राजकृुमारीनके त बबाल छुट्टीहोगैल । तर दैंरादैंतुरुवा जो हो घर बुढाइल दाईहन राजकुमारीक लोभले अकेली छोरक आईल्रह । उहाँ दाई घरी घरी दग्गरम जाक बतिया हेरस् । आब्ब मोर छावा झक्झकानो सुघ्घुर,मजा जन्नी लानी कहिक । बुढि.या उह शोंच राख्क घरी घरी दग्गरम जाक बतिया हेर जाय । साँझ होगैलीस,साँझ होक रात होगैल,रात बित्क बिहान होगैल तहुँपर छावा फिर्ता नै अइलीस त बुढिया चिन्ताम परगैल ओ खोज जैना बिचार करल । राजकुमारीहन रकत पतियाम लगाक दग्री दग्री गिरैती जैना सिखैल रह बुढिया उह रकत लागल पत्याहा दग्गर होक गैल बुढिया । उहाँ ठाउँम पुगथ् त मैदान ठाउँम एकथो घर देखल, घर बिना कुछु सरसामानके सुनसान रह । भित्तर घर पुरा रकतै रकतसे भरल रह । रकत लागल तरवाल साम्ने फँकाईल रह ।
बुढिया एहँर उहँर और मजासे चारौतरफ हेरल त साम्ने देखल चिता जराईल । बुढिया चिता जराईल गौरसे हेरल । चिताम एकथो आधा जरल कुछ कुछ कपरा लग्ल मनैयाँ देखल । और उल्तापल्ताक मज्जासे हेरल त कपरा आपन छावक हो
कहिक एकिन हुइलीस । बुढिया शोंचल की म्वार छावा लवँरियाहन लानकलाग जोर लगाईल हुई त लराई हुइल हुइहीन । तबमार त पूरा घर रक्तारुहुन बा । लवँरियक दादुन आपन बाबुहन लैजाई नैदेहल हुइहीं ओ मोर छावा यहाँ लन्ना जोर लगाइल्हुई,दुनुओरसे मारामार काताकात हुइल्हुईन । लवँरियक दादुन चारजन रलह,मोर छावा अकेली पारक मुवाँक जरादेहल हुइहीं । अत्रा शंखा उपशंखा करती बुढिया रुईती रुइती आपन घर गैल । आखिरम बुढिया बरी पश्चातापम परल की शोंच लागल,के जानतह मैं आपन छावाहन लवँरियक बिषयम बात नै बतोइतुँ । लवँरिया आइलरह कहिक जानकारीय नै देहतुँ त मोर छावा परली रहनेरह ।
ज्यादा लोभ कर्लसे लाभ हुइथ् तर लाभसे विलाप हुइना थहरल््् । तबमार कहकुत बा की लोभसे लाभ,लाभसे विलाप हुइथ । आब मै अकेली बुढाईल मनै कसिक गुजरबसर करबुँ । छावा रहत छावा,खानापिनाके बन्दोबस्त कर । तर मै बुढाइल मनै छावक बराबर कहाँ सेकम् । अत्रा कहिक बुढियक शोंच्ती और रुइती दिन गैलीस् । दैंरादैंतुरुवा दुनुओर बिलिम्बास पार्क गैल ।
त्येकरबाद्म राजकुमार राजकुमारी स्वर्ग गैल ओ दोसर जनम्म फुला जरम् पैल और दैंरादैंतुरुवा चाहीं नर्क गैल ओ करिया धतौर जरम् पाईल । हम्र अत्रा जानकारी पैना चाही की करिया धतौर कना आग जुग्म दैंरादैंतुरुवा रह । बाद्म आपन अकरमण्यता,अपराध ओ पापले गरदा ऊ करिया धतौर जरम् पाक आपन प्रायश्चित्त निभाई परना हुईलीस । राजकुमार ओ राजकुमारी एकथो असिन सुन्दर ठाउँ रहना पैलकी जहाँ कञ्चन पानीवाला लदिया झरझर बहता,ऊ लदियाम तलबक्ती,चखेवा,हंसा,चकैचक्वा,तितराहा,उद,सोझबक्ती आदी पानीम चरना चिरैंचुरुङ्गाले शोभायमान देखपरना कलसे आसपास बरी सुहावन हराभरा बन्वाँ,ऊ बन्वाँम सुगा,मैना,हारिल,धनस,कुइलरीया,बक्ला,मंजोर आदी चिरैंचुरुङ्गाले सुहावन लग्ना ओ संगसंग चित्तर,हरना,बनसुअर,बाँदर,बाघ,भाल तथा और जंगली पशुनसे शोभायमान रह ओ राजकुमार,राजकुमारी एकथो बिचित्र सुन्दर और सुगन्धीत फुला रलह जो की कोई देख्तीकी मनमोहीत होजैना । ऊ फुलाके बास्ना बरी दुर दूरतक सुगन्धीत लग्ना । फुलल् फेन एक्कबोंटम अनेक रंग,रंगीबिरंगीले चारौतरफ
धकामक अजरार औरछन्दिन रमणीय लग्ना । कोइ उहाँ गैलसे रमणीयम भूलक ओहाँसे अइनास मन् नै लग्ना असिन सुन्दर ठाउँम रलह राजकुमार ओ राजकुमारी तर करिया धतौर चाहीं ओहीसे बरी दूर भुतभुताईल ओ बल्रुतीहा ठाउँम बाँचल रह ।
क्रमशः दिन बित्ती गैल । एक दिन उह फुला राजकुमार ओ राजकुमारीनके बाबा,ऊ देशके राजाहन शिकार खेल्ना इच्छा हुईलीन । राजा आपन भारदार,मन्त्री और सेना लेक शिकार खेल गैल । शिकार खेल्ते खेल्ते राजाहन पियास लग्लीन् । राजा आपन आठपहरियहन पानी लेह पठैल । आठपहरिया नोकर पानी खोजत् खोजत् भुलाभतक्क फुलारुपी राजकुमार ओ राजकुमारी रहलवाला लदियाम पुग्गैल । ओहाँ पुग्क लदियाम पानी पिल,पानी पिक सेक्क राजाके लाग सोनक गग्राम पानी भरैल ओ एकघरी ओहीं बिसैल । ऊ नोकर पुलिश उहाँके प्राकृतिक सुन्दरमय वातावरण ओ मनमोहक दृश्य देख्क वहीं मोहीत होगैल ।
बलजस पानी लेह आइल्बाती कहना याद आईल्म पानी लेक गैल । शिकार खेल गैल ठाउँ जाक राजाहन पानी पियैल । जब राजाहन पानी पियाक सेक्ल तौ राजाके पास ऊ ठाउँके विवरण बतोइल । अत्रा ऊ ठाउँके चिजबस्तु ओ रमणीय वातावरणके जानकारी दिहलम राजा उ ठाउँके अवलोकन करगैल । ओहाँ जाक ओहाँक बस्तुस्थितिके जानकारी लेक फुला तुरना कोशिस करल,तर फुला चाहीं सब आकाश लाग्गैल । और असिन आवाज आईलकी ू इ फुला पक्षपाती ओ पापी मनैनके हाँथसे तुरजैना फुला नै हो । ू बार बार इहे आवाज आइलागल । राजा फुला तुरना बहुत कोशिस करल तर फुला नै तुरगैल ।अन्तओर गैलसे दहियाँ तर भुइयाँम लटक जैना,तर तुर लागलम सरासर आकाश लाग्जैना । राजा हार खाक घर लौट गैल ।
घर जाक राजा आपन दरबारके मालिन (फुला तुरना,माला गुँथ्ना मनै ) हुकन पठैल । मालिन हुँक्र ऊ ठाउँ जाक फुला तुरना कोशिस करल । तर और कौनो आवाज नै आक सबकासब दहियाँ फुला आकाश लाग्गैल । आखिर मालिन हुँक्रफेन
हर खाक घर घुम्जैथ । त्येकरबादम राजा आपन छोत्की रानीहन फुला तुर पठैथ । छोत्की रानी ओहाँ जाक फुला तुरना कोशिस का करथी, आगकजस्त अनौथो आवाज आइथ की ू इ फुला पापी ओ कपटी मनैन्क हाँथसे तुरजैना फुला नै हो । तैं तुरुन्त यहाँसे चल्जा,अन्यथा तोर खराब माम्ला होजाई ू । कहिक फुलक सबका सब दहियाँ सुईं सुईं आकाश लाग्जाईथ । छोत्की रानीफेन हार खाक घर घुम्जैथी । आखिरम राजा बरकी रानीहन फुला तुर पठैथ । बरकी रानीहन भगवान नारायण ओ लक्ष्मीमाता सपनाम जानकारी करैलरथ की ू त्वार लरका कुछ दिन पाछ फुलाके रुप्म पैदा हुइहीं । ऊ फुला तोही तुर जाईपरी । ऊ फुला तुर गैलम तैं पाँचथो फुला आपन कखरीक तर दबालेहस । और फुला अल्ग धरस् । अल्गवाला फुला राजाहन देहस । ओ कखरीम दबाईल फुला कखरीक तर दबैल दबैल घर जाक आपन बिस्ताराम,बिस्ताराके शिह्रनी तर दबाक धरस । रात हुई । सबकोई सुतहीं त तोर लरका अप्नआप मनैके रुपम भेंट हुईहीं । बिहान हुइ त ऊ लरका अटोमेटीक फुला बन्जैहीं । क्रमशः अस्तहँक कुछ दिन बिती त पाछ पूर्ण रुपम तोर लरका तोही मिल्जैहीं ू।
सपनाम असिन जानकारी हुईलम बरकी रानी निरधक्क होक गैली । उहाँ बरकी रानी गैल्म,सब फुला भुईयाँ लोट्गैल । बरकी रानी फुलाहन चुम्मन लेली ओ आपन मनपसन्दके फुला तुरली । सपनाम जानकारी हुईलजस्त बरकी रानी पाँचथो फुला कखरीक भित्तर दबैली ओ बाँकी और फुला और भाँराम धरक घर घुम्ली । घर जाक अलग्ग धरल फुला राजाहन देली,ओ कखरी भित्तर दबाईल फुला बिस्ताराके शिरहनीक तर धरली । राजा सुन्दर सुन्दर फुला तुर्क लानलम बरकी रानीहन स्याबासी ओ इनाम देल ।
बरकी रानीक लडका दिन्क फुला ओ रात्क मनैन्के रुपम आपन दाईक संग खेल्ना भलाकुसारी करना करँत । ओस्तहँक एक दिन बितल दुई दिन बितल रात्क बरकी रानीक कोठाम बहुत मनैन्के बोलीचालीके आवाज अइना सुन्ना ओ कब्बुकाल प्रत्यक्षफेन देख्लक ओरसे सेवा सुसार कर्ना नोकरचाकर ओ आठपहरिया
लोग अचम्म मानलग्ल । राजकुमार ओ राजकुमारी तौ देश निकाला हुईल रलह । कसिक आगैल । नोकरचाकर,आठपहरिया दुईचार दिन त कहोर नै बतैल । दुईचार दिनके बाद्म नोकरचाकर ओ आठपहरिया मन्त्रीन्केठेन बतादेल । मन्त्रीलोग राजाकेठेन जानकारी करैल । छोत्की रानीसे भोज हुईल बहुत दिन होगैल रह पर लरका नै पैदा होसेकल रलह । राजा रानी लरकक् लाग बहुत कोशिस त कर्ल पर कुछ नै हुईसेकल रह । राजा चिन्तित् रलह की इ पाँरी जन्नीक ओरसे लरकै नै हुईथुइत । बहुत मुश्किल हुईल । उहँर बरकी रानीकओरसे जर्मल लरकन देश निकाला करदेनु । छोत्की रानीक कोखसे लरकै नै पैदा हुईलसे त राज्य के चलाई । छोत्की रानीक ढंग नै ढंगलिस हुइस,बोल्ना तम्मिजै नै हुईस ।
नोकरचाकर,आठपहरिया,भारदार,मन्त्रीलोग तथा जनतालोग फेन छोत्की रानीके चालबानी ओ रंगढंग ठिक नै लागथुइन । राजचलैनाअसक रानीक अकलबुद्धिय नै हो त इ का राज चलाई कहिक बराबर सक्कुओरसे गुनासो आईता । जुनसे जुन बरकी रानीहन उस्ताक छोत्की रानीहन कामकाजके जिम्मेवारी दैदेहनु । भारदार तथा मन्त्रीलोग एकदमसे कहतकी छोत्की रानीके बेकामके अकलबुद्धिसे राजकाज नै चलि । असिन मनैन राज्यके जिम्मेवारी देनाम आपन अस्तित्व गवैंना हो और राज्यफेन गवाँजाइसेकथ । बरकी रानी दूरदर्शी ओ बुद्धिमान बाती ।हुँकाहार थेन मौलिक ज्ञान बातिन। हँुकाहारम समानताके व्यवहार बातिन,अच्छा मिजासके,मिलनसार ओ भावुकता जसिन गुणसे शुशोभित बाती । बोलीचालीम खराब,मजा बिचार करके बोल्ना,समय बखत ठाउँ परिस्थिति बुझ्के सोही अनुसार बोलीचाली करथी । ऊ बत्तिस लक्षणउक्त राजमहिषी बाती । अतः छोत्की रानीक ठाउँम बरकी रानीहन राज्यके जन्नीनके तरफसे कामकाजके जिम्मेवारी देना उचित बा ओ सख्त जरुरीफेन बा । भारदार,मन्त्रीगण,नोकरचाकर,सेना, पुलिस और प्रजालोगसे चौतरफी असिन सल्लाह सुझाव आइल दरबारम ।
छोत्की रानीक बदनियत,जनगुनासो अइतीरहल समय बरकी रानीकओरसे जरमल राजकुमार,राजकुमारी आगैल् बात कना जानकारी पाईल्म राजा आधा खुशी त आधा अन्बिश्वासम रलह । होनहो एक दिन बरकी रानीक रनिवासके कौसीम
राजकुमार,राजकुमारी खेल्नाम मगनमस्त रहीक आपन रुप फेर्ना भूल्गैल् रलह । नोकरलोग चुप्पसे मन्त्रीलोगन बतादेहल्म,मन्त्री राजाहन पुनः जानकारी कराईल्म राजा स्वयं प्रत्यक्ष राजकुमार राजकुमारीहन देख्ल । राजकुमार राजकुमारी कसिक फिर्ता इहाँ अइल कना रहस्यके बात हुईल । इ रहस्य बुझकलाग भारदार तथा मन्त्रीगण ओ तान्त्रिक लोगनसे राजा सरसल्लाह लेल । तान्त्रिक,पण्दितलोग पोेथी पात्रा हेरल्म, कुछ मात्राम पता चलल और असली रहस्य चाहीं बरकी रानीसे पुछताछ् कर्लसे पताचली कहिक जानकारी हुइल । राजकुमार राजकुमारी आपन दाईक्थे देशनिकाला हुइल दिनसे आखिरी दिनतकके बितल परिस्थितिके बिषयम पुरा जानकारी करासेकल रलह ।
बाद्म राजकुमार राजकुमारी सकुसल राजदरबारम कसिक अईल कना जानकारीके लाग बरकी रानीहन दरबारम बलाक पुछाताछी कैगिल । पुछ्ताछ्के दौरान्म बरकी रानी शुरुसे अन्त तकके आपन लरका एकथो अयोग्य छोत्की रानीकपठ नाहकम दुःख कातपरल जानकारी करैनाके साथ साथ आपन लरकन्के मानवअधिकारके हनन् हुइल गुनासोफेन पोख्ली । मोर लरका छोत्की दाईक अकर्मण्यताले,आपन लरकन राज दिलैना दाउपेचके फेन छरलंग हुइल ओहाँ । पाछ राजकुमार,राजकुमारीहन फेन बलाक राजा शिकार खेल गैल दिन छोत्की दाईक लुगा कपडा चिंठचाँठ पारल या नै पारल, और नानाभाँती गालीगलौज कर्ल नै कर्ल कना पुछ्ताछ्म राजा शिकार खेल गैल दिन राजकुमार,राजकुमारी एकदोसर ठाउँ घुम्फिर करगैल पता चलल् । याकर समर्थन ओ गवाही नोकरलोग देल ।
उल्लेखीत सबुदी बयान्म नियाँनिसाफ करतघरीम छोत्की रानीहन एकदम हद्सम्के दोषी ठहरा गैल । बरकी रानी,भारदार,मन्त्रीगण तथा तान्त्रिक ओ पण्दितसे राजाहन फेन बात लगागैलकी क्षणिक छोत्की रानीके मायाँजालके चंगुल्म फँस्क,अयोग्य, कपती, दुराचारी भावना,अदूरदरशी मनैहन कामकाजके जिम्मेवारी देना राजाके महाभारी पक्षपात हो और वेकसुरके आपन लर्कन देशनिकाला कर्क दुःख देना महाअपराध ओ महापाप हो, कहल । तब् राजा ू किं
करतव्य मुढ ू होक राजा छोत्की रानीहन बोलाहत कर्क कानुन् ओ नितिनियम बमोजिम भारदार,मन्त्रीगण तथा तान्त्रिक,पण्दितनके सरसल्लाह ओ सुझावसे रानीक दोषके खिलाफ चारपाते कपार खौरक देश निकाला करदेना हुकुम दे देल । राजाके शाही हुकुम्से भारदार,मन्त्रीगण ओ नोकरलोग छोत्की रानीक चारपाते कपार खौर्क देशसे बाहर पठाअईल ।
त्येकर वाद्म राजा बरकी रानीके कुशल ज्ञान,बुद्धिविवेकसे अच्छा तरहसे राजकाज चलाईलग्ल । राजा आपन राजकुमार राजकुमारीहन पुर्ण रुप्म मायाँ ममता देक लरकाके भूमीका निभाई लग्ल । राजकुमार ओ राजकुमारीफेन राजाहन बाबाके रुप्म आदरसम्मान करलग्ल । बरकी रानी, अधिकार प्राप्त महारानी ओ राजकुमार राजकुमारी पाइल्म प्रजासे लेक नोकर चाकर,पुलिस,सेना,मन्त्रीगण तक सबकोई हर्षले गद्गद् होगैल । तनमन, खोब हाँसीखुशी,जोशजाँगर लगाक कामकाज करलग्ल । सबके राय सल्लाह सुझाव अनुसार एकदिन राजकुमार राजकुमारीनके देशपैठारी करना कार्यकरम कर्ना बिचार कर्ल । ऊ कार्यकरम्म छत्तीस परकारके खान्पिन् बनैना ओ बिभिन्न देशके राजा रजौतन,ज्ञानी,विद्वान मनैन् निउँता देक खानपिन करैना योजना हुईल । बहुतसे बहुत मिठमिठ खानपिन बनल्, निउँतबघार करल्म राजारजौतासे लेक ज्ञानी, विद्वान,प्रजा सबकोई राजाके निउँता सुईकार कर्क खानपिन कार्यकरम्म उपस्थित होक खानपिन करलग्ल । ऊ खुशीयाली माहौल देख्क मै फेन बहुत प्रशन्न हुइनु । मही फेन खानपिन कार्यकरम्म आओ और हिसभरके खाक जाओ कहतलह,तर आझकाल गरम्के दिन ज्यादा चिल्लोचाप्लो खैबो त जिउम नोक्सानी पुगथ् ओ मै आपन प्रिय भाई सागरहन इ बत्कोही ताइप कर्क हाली देह पर्ना ओर्से झत्तसे घर आगैनु । अत्र हो बात अत्र हो चित । गुहा तेप्रा के चिंथी । सुन्नेले सुनको माला । यो बत्कोही भन्ने बित्तीकै सरासर आईजाला ।