राजा विर विक्रमाके जित

राजा विर विक्रमाके जित

एकठो देशमे राजा आउर रानी रहित । राजाके नाउँ विर विक्रमा रठिस । राजा एकदम मिलनसार, न्याय करना, सक्कुहुन सुखी देख्ना चाहना, जनतनके बात बुझ्ना, सक्कुहुन बराबर मन्नाके साथ–साथे एकदम दयालु फे रहित । राजा विर विक्रमाके घरमे काम करुइया एकठो नोकर रहठ । नोकर बाभन जातके रहत । नोकर आपन गोसिन्याहे फे आपन सँगे काम कराइठ । राजा नोकरहे नोकर नै कैहके बभना कैहके बोलठ । बभना बभनिन्या दिनभर काम करके सन्झ्या जून आपन झोप्रीमे सुते चल जैठै । झोप्री राजाके महलसे खासै दुर नै रठिन । अस्तके बभना राजा विर विक्रमाके घर काम करटि जाइठ । बहुट धेर दिन काम करट–करट होजिठिन । एक दिन बेरी जुन राजा आउर रानी सल्लाह करठै ।बभना हमार घर अत्ना ढेर दिनसे काम करता । इने हमार नोन खाके कैसिक पचैहि कहिके राजा रानी सल्लाह करके बभ्नाहे तिरठ पठैना सल्लाह बनैठै ।

विहानके राजा बभनाहे बलाके कहठ– ‘भैया बभना टै हमार घर बहुट दिन काम करसेक्ले टै हमार नोन कैसिक पचैबे । हमरे एकठो सल्लाह करले बटी कि टुहि टिरठ पठैना कैहके’ ।

टब बभना कहठ–‘राजा जी अपने जैसिन सोच्ले हुइबी बहृयै सोच्ले हुइबी कहिके कहठ’ । बभनिन्या मोर गोस्या टिरठ जाइटै कहिके पटा पाइठ आउर आपन गोस्याहे कहठ–‘टु टिरठ चल जैबो टे मै यहाँ अक्केली कैसिक रहम, केकर सहारामे जियम, किही हेरके चिट बुझैम ।’

टब बभना कहठ–‘मै फोटु खिचाके भितामे टाँसके चलजैम । टै वहे फोटु हेरके रहिस । रेखदेख करुइया राजा रानी पला बटै कहिके बभना टिरठ चल देहठ ।’

कुछ दिन रैहके बभनक झोप्रीम आगी लाग जैठिस ।

बभनिन्या चिल्लाइ लागठ । बचाउ–बचाउ मोर बभना जरे लग्नै बचाउ कैहके गोहराइठ । ¬(लग्गे कोइ नै रठै बभनिँन्या बभनै भित्तर लेहे जाइठ ) बभनिन्या आगीमे परके दहे लागठ । बभनिन्यक देह पूरा जरजिठिस । राजा रानी बभनिन्याहे जाके बचैठै आउर खोब ब¥हियाके सुता देठै । टब राजा विर विक्रमा रानीहे कहठ – ‘बभना टिरठ गैल बावइ । ऊ आइ टे हम्रे उहि का जवाफ देब कैहके ।’ राजा विर विक्रमा दवाइके खोजीमे चल देहेठ । राजा दवाइके खोजीमे जाइट–जाइट बहुट दुर पुग्जाइठ । कहु दवाइ नै पाइठ । दवाइ खोज्टी–खोज्टी एकठो गाउँमे रात हुजैठिस । टब एकठो घरम जाके राजा विर विक्रमा मौसी कना नात लेगाके बोलठ– ‘मौसी राम–राम’ । घरक बु¥हया कहट– ‘राम–राम भैया । मै चिनेह नै सेक्ठु भैया । टै केकर छावा हुइटे ? राजा विर विक्रमा कहट कि मै फलानेक छावा हुइटु । मौसी मोर रात हुगैल । मै रात आज यहै बैठम । टब मौसी कठिस – ठिक बाटे भैया बैठले । (राजा घरक बारेम पुछे लागठ –मौसी सक्कु जनहन देखटु टोर पटोहियाहेफे देखटु । टोर छावाहे नै देख्ठु कहाँ गैलबा ? टब मौसी कठिस – छावा भोज करके सेक्टीकिल राजा करनके घर चौकिदार करे गैल बा । का करबे भैया गरीब मनैनके अस्टे टे हो । कबु का करलक रुप्या टिरना रहट टे कबु का करलक । राजा विर विक्रमा कहठ – मौसी मै टोर छावाहे छुटैम आउर घरे पठैम । (रात बितत विहान हुइठिन । खाना खा पिके राजा विर विक्रमा राजा करनके घर चल परठै । राजा करनके घर पुग्के ।) राजा विर विक्रमा पुछठै – यहाँके दरबान (चौकिदार) के हो ? यहाँ पठाउँ । (मौसिक छावा खबर पाके राजा विर विक्रमाके ठन आइत ओ कहत–के बलाइल महिन ।) राजा विर विक्रमा जवाफ देठै – मै बलैले रहुँ । फेनसे लौण्डा कहठ – अपने के हुइटी । मै अपनेहे नै चिन्ठु । काहे बलैली कुछ बाटे बटाइ । राजा विर विक्रमा कहठ – मै विर विक्रमा हुइटु । मै अपनेक घरसे आइल बटु । अपने भोज करके सेक्टिकिल काहे आगिली काम करे ? लौण्डा फेनसे कहट – मोरटे यहे कामे होवइ । काम पकरल मनै नै अइलेसे फेन नै बन्ना । टब मारे आइ परल । टब राजा विर विक्रमा कहट – भैया आपन घर टै जा मै यहाँ टोरिक सट्टामे काम करदेम । लौण्डा कहट – मै यहाँ दरबानके काम करठुँ । यहै रबि, मजासे काम करबी । लि टे मै आपन घर जाइटु कैहके लौण्डा चल जाइट । घर पुगट टे वहाँ आपन सट्टामे दोसुर जहन छावा बनल देखट । ऊ लौण्डा पुग्नासे पहिले भुतप्रेत छावा बन्के बैठल रठिन । ऊ लौण्डा कहट – टुहिनके खास छावा मै हुँ । भूतप्रेत आउर खास छावाके खोब सून टकर – पकर हुइठिन । दरबान बन्के गैल लौण्डाहे टै हमार छावा नै हुइटे कैहके नै स्वीकर करठिस । टब लौण्डा कहट – टोहरे महिन छावा नै स्वीकर करबो टे मै टुहिनके घरके नोकर बन्के बैठल रहम । (छावा नै बनाके ऊ लौण्डाहे आपन खास छावाहे घरक नोकर बना लेठै ।) वहाँ राजा विर विक्रमा ड्युटी (काम) मे लगल रहठ । राजा विर विक्रमा रोज दिन राजा करनहे राजमहल मनसे रात १२ बजे बाहेर जाइट देखट । (अस्टे बाहेर जाइट देखट–देखट राजा एक दिन चिमा लागठ ।) रातके १२ बजत । राजा करन रोज दिन जस्टे ऊ दिन फेन जाइ लग्ठै । राजा विर विक्रमा नुकट छिपट पाछे –पाछे चल परठै । राजा करन परीनके बयिगम पुग्ठै । ढिरे – ढिरे राजा विर विक्रमा फेन बयिगम पुग्ठै ।

राजा करन वहाँ पुग्के चुलाह बनैठै । चुलाह बनाके कराही बैठैठै । कराही बैठाके आगी सुगैँठै । आगी सुँगाके कराहिक पानी ढिकैठै । राजा करन आपन देह चक्कुसे चिरके आपन पिसके नानल मसाला आपन देहमे भरके ढिकल कराहिक पानीम कुद जाइठ । ढिकल पानीम कुदके पाके लागठ । पाकके सेकट । बगियक परी अइठै राजा करनहे खाइ लग्ठै । जस्ते परी खैठै वस्ते निखरल हड्डी जोरल करठै । हातके हड्डी हातमे, गोरक हड्डी गोरमे जोरटी जिठै । अस्ते करटी पूरा मनै खैटी जोरटी हड्डीके किल बनाके खाके सेक्के परीहुक्रे हड्डीमे इमरट बुन्डिया छिरिकके राजा करनहे फेनसे जिँन्दा करदेठै । राजा करन फेनसे पहिलेक जस्ते हुजिठै । परीहुक्रे खैलक बदला राजा करनहे झनझन ठैली हिलाके सोनक टका (सोनक रुप्या) राजा करनहे दैदेठै । राजा करन झनझन ठैली लेके चल देहठ ।

यी सक्कु नजारा राजा विर विक्रमा देख्टी रहठ । हेरके सेक्के राजा विर विक्रमा राजा करनसे आगे राजमहल पुग्जाइठ । विहान हुइठ । राजा करनके घर पैसा लेहेक लाग कमुइयन लाइन लाग जिठै । राजा सब जनहन पैसा देहेठ ओ पठादेहेट । राजा विर विक्रमा सोचत यी कामसे राजा करनहे मै छुट्कारा दिलैम । एक दिन विर विक्रमा राजा करनहे कहट –राजाजी आज मै बजार जैना सोच बनैले बटु , जाइ देबि कि नै ? राजा करन जवाफ देठै – बजार जाइक लाग बटे टे जा भैया, टै बजार घुम्या बजार हेरया । राजा विर विक्रमा बजार चल देठै । बजार जाके नोन, तेल, बेसार, मसाला किन्ठै । किन्के खोब मजासे मसाला पिस्ठै । मसाला पिसके बनाके लेले चल देठै राज महलमे । राजमहल पुग्के ड्युटी लग्ठै । ऊ रात विर विक्रमा राजा करनकेमे निन्द्री दारके परीनके बगियम चल देठै । परीनके बगियम पुग्के राजा करनके जस्ते जम्मा काम करके देहमे मसाला भरके कराहीमे बैठ जाइठ । जब विर विक्रमा पाक जाइठ । तब परी निकरजिठै खाइक लग । परी हड्डी निखार–निखार खैठै ओ बटवाइ लग्ठै । अत्रा दिन शिकार खैली आझिक दिन बराबर मिठ शिकार कबु नाइ खैले रहि । कनि केकर शिकार हो कहिके बत्वैठै । खाके सेकठै । जम्मा हड्डी जोरठै ओ इमरत बुन्डिया छिरिक देठै । इमरत बुन्डिया छिरकटी कि राजा विर विक्रमा जि जिठै । परी सोनक टका देठै । राजा विर विक्रमा लेना मना करट ओ कहठ – महिन सोनक टका नाइ चाहिँ । महिन झनझन ठैली आउर इमरत बुन्डिया चाहिँ । परी देना तयार हुजैठै । राजा विर विक्रमा एक बात आउर कहठ – आजसे इ कराही नाइ बैठ्ना चाहिँ । आज मै इ कराही बेग्के चल जैम । परी इ बातमे फेनसे मान जिठै । कराही बेग देहठ । ( विर विक्रमा इमरत बुन्डिया ओ झनझन ठैली लेके चल देहट । ) विर विक्रमा राजमहल पुगठ ओ ड्युटीमे लाग जाइठ । रोज जस्ते विहान हुइठ । निन्द्री दरलक वरसे राजा करन नाइ उठल रठै । मस्त निँदमे सुतल रठै । रानी सोच्ठै – आज टे विहान हुगैल राजा अभिन टक नाइ उठल हुइत । अ‍ैसे दिन टे जल्दि उठ्के लाहा खोरके टका बाँटे लागिट । ( रानी राजा करनहे उठैठै ।) राजा उठ्के हात मुह ढोइठै । राजमहलमे काम करुइया टका लेहेक लाग लाइन लागल रठै । ऊ दिन राजा बरा चिन्तामे रठै । सोच्ठै बहुत बेकार हुइल बरा दिन ढक सुत्के । राजा कठै काम करुइयनहे – आज मोर ठन कुछ नाइ हो टुहिन हे देना । मै टुहिनहे का दिउँ । बरु दोसुर दिन अइहो । टब विर विक्रमा कहठ –राजा जी मै टका दिउँ । राजा करन कठै – बावइ टे दे । विर विक्रमा कहठ –लि इ झनझन ठैली जस्ते हिलैबी वस्ते अपनेक चाहल अनुसार टका गिरी टब बाँटल करबी आपन काम करुइयनहे , जनतनहे । ( राजा करन सक्कु जनहन कहल अनुसार झनझन ठैली हिलाके टका बट्ठै । पैसा बाँटके सब जहान घरे पठैठै । ) राजा करन विर विक्रमाहे पुछे लग्ठै – टै अत्ना टका पैले कहाँसे ?विर वि क्रमा कहठ – मै इ झनझन ठैली परीन ठनसे नन्नु । टब शुरुसे अन्तिम टक कहानी बटाइट ओ कहट – राजाजी आब अपनेहे कबु नाइ बगियम् जाइ परी । आब अपनेहे वहाँसे छुट्कारा मिलगैल बा । टब राजा करन पुछठ टै साधारण मनै नै हुइटे । बटा टै आपन परिचय ? विर विक्रमा कहठ – मै राजा विर विक्रमा हुँ । टब फेन राजा करन कहठ – टै महिनसे बरवार बटे, धनी बटे, टै मोर घर चौकिदार काहे बनल बटे ? जाउ विर विक्रमा आजसे मै टुहिन काममे नाइ ढारम । टुहिन काममे ढरना मोर लाजके बात हो । जाउ आजसे टोहार छुट्टि । राजा विर विक्रमा छुट्टि लेके इमरट बुन्डिया लेके आपन घर राजमहलमे चल जाइठ । राजमहलमे पुग्के बभनिन्यक देहमे छिरिक देहेट । बभनिन्या ठिक हु जाइठ । पहिलेक जस्ते जस्के टस बिल्गाइ लागठ ।

(बहुट दिनके बादमे नौवहे आपन सँघरिया राजा विर विक्रमासे भेटघाट करनास लग्ठिस । भेट करे आइठ राजा विर विक्रमक घर । घर पुगठ, रामरमैया हुइठीन । राजा विर विक्रमा आपन सघरिया नौवहे पानी पिवैठै । बातचित उठ्ठिन । ) नौव कहठ – सघारी हमरे सक्कु पह्राइ पहरली पहरली काया पलट पह्राइ कबु नाइ पहरली । चली सघारी काया पलट पह्राइ पह्रे । राजा विर विक्रमा कहट – चलि जाइटे काया पलट पह्राइ फेन पह्रली । (दुनु जाने सघरिया कासीमे काया पलट पह्राइ पह्रे चल देठै । कासीमे पुग्के काया पलट पह्राइ पह्रठै । पहरके सेक्के घरे आइ लग्ठै । आइट – आइट बन्वामे पुग्ठै । बन्वा पुग्के बहाना लगैटी नौव हेगे/झारा करे जाइटु कहिके बन्वमसे सुग्वा मारके आपन गोझुम ढैलेहेट । नौव राजक ठन आके कहठ – सब विद्या पह्रली कुछ नाइ देखैली ? नौव एकदमसे यहे बात घोस्ले रहठ । बात सुन्के राजाहे रिस लग्ठिस । टब राजा कठै – देखैना टे देखैना रहे केमे देखैना विचार करना टे ? नौव गोझुमसे सुग्वा निकारमे लब्दाइट ओ कहठ – लि यहे सुग्वकमे विचार करी ना ? विर विक्रमा लौटपौट करट सुग्वक देहमे चल जाइठ । सुग्वा भुरसे उरके आपन बग्गालमे चल जाइठ । ऊ सुग्वक १०० सुग्गनके एक्के बग्गाल रठिन । नौव चलाक जात भुइयाँमे लौटपौट करट राजा विर विक्रमाके देहमे चल जाइट । नौव आपन लास वहै छोरके विर विक्रमाके घर पुग्जाइठ । विर विक्रमा आपन गोसिन्याहे आगे बटैले रहठ । जब मै काया पलट पह्राइ पह्रके अइम टे बाया हातके कानी अङ्ग्रीमे चुम्मा लेम टे टै जान लिस कि इ मोर गोस्या विर विक्रमा हुइट । नौव विर विक्रमाके घर टे पुगठ मने बाइ हातके कानी अगुनियक चुम्मा नाइ लेहठ । अत्रैमे विर विक्रमाके मेधारु जान लेठिस कि इ मोर गोस्या विर विक्रमा नाइ हो ।

(विर विक्रमा आपन बग्गाले बग्गाल उरटी दोसुर देश पुग्जाइठ । ऊ देशमे सुग्गा मरलेसे राजा इनाम फेन देना आउर सुग्गा फेन फिर्ता कर देना । घरे जाके सुग्वक शिकार फेन खाइ मिल जैना । एक दिन वहे देशके एकठो गरीब बुह्रवा बाहेर गैल रहट । बाहर कुछ दिन बैठ्के घरे आइठ । घरे आइठ टे गोसिन्या सुनाइ लग्ठिस भाण । गाउँक मनै सुग्वा मार– मार इनाम पैठै आउर सुग्वक शिकार फेन खाइ मिल जिठिन । हमार बड्डो झुन बाहेरे – बाहेरे । काम ना कैबज दिन भर बाहेरे बाहेर । ना इनाम ना शिकार । बड्डी टै रुकटे आज मै सुग्वा बझाके देखैम । सुग्गनके बग्गाल कौन रुख्वम बैठ्ठै कैहके मै जन्ले बटु । आज मै लासा लगैम । लासा बनाइठ व रुख्वक टिपुन्नासम लासा लगा आइठ । रात परठ सक्कु सुग्गा बसेरा लेहे चल्ःठै । १०० सुग्गा वाला बग्गाल फे चल देठै बसेरा लेहे । वहे १०० सुग्गा मनसे १ सुग्गा राजा विर विक्रमा रहठ । जौन रुख्वम बुह्रवा लासा लगैले रहठ वहे रुख्वा पुग्ठै टे विर विक्रमा जान लेहेठ यमे लासा लगाइल बा कहिके । विर विक्रमा कहठ यमे लासा लगाइल बा । इ रुख्वम नाइ बैठी । दोसुर सुग्गा कठै रोज टे हम्रे यहे रुख्वम बैठ्ठी कुछ नाइ हुइठ । आज बैठब टे का हुइ । सब सुग्गा जम्जमाके रुख्वामे टरेसे लेके उप्पर टक बैठ्ठै । विर विक्रमा रुख्वक सबसे टिपुन्नीम बैठट । सब सुग्गा लासामे बाझ जिठै । विर विक्रमा टिसुन्गीम बाझल रहट । विर विक्रमा सक्कु सुग्गन कहट– जब सुग्वा मरुइया आइ टे सक्कु जे मरल हस हुजैहो । ऊ जस्ते भुइयम छुटाछुटा बेगाइ वस्ते मरल भेगमे रहोहो । हम्रे जस्ते १०० सुग्गा पुगब टब जम्मा जे उरजाब कहिके सम्झाइठ । बिहान्नी बुह्रवा सुग्वा छुटाइ जाइठ । पुगटटे बहुट सुग्गन बाझल देखट । रुख्वम चिहुरठ सब सुग्गा मरलहस रठै । बुह्रवा १÷१ करके सुग्वन टरे गिरैटी जाइठ । गिराइट–गिराइट ९९ सुग्गा पुग्ठै । सुग्गनहे आब १०० सुग्गा पुगलहस लग्ठिन । आब सब सुग्गा टरे आगिली आब उरजाइ । ९९ सुग्गा भुरभुर हुक उरजिठै । विर विक्रमा टिसुङगीम चप्टल पला रहट । बुह्रवा कहट १ सुग्वा टे पला बा । विर विक्रमाहे पकरके लैजाके छिट्वासे टोप देहठ व आपन मेधारुहे कहट टै सुग्वा मारके तयार करले रहिस । मै बजार मसाला लेहे जाइटु । बु¥ह्वा बजार घुमघामके सर–सामान लेके घरे आइठ । सुग्वइ मरले कि नै कैहके पुछठ । गोसिन्या कठिस– मै नै मरठु बरा, सुग्वा मनैन नन्हे बोलठ । बु¥ह्वा कहट– मै मारम सुग्वइ । सुग्वइ मारक लाग हाठ लमाइठ कि सुग्वा बोल परठ– भैया टै महिन मारके करबे का, मोर शिकार खाके टोर पेटफे नाइ भरी । बु¥ह्वा कहठ– अरे इ टे मनैन नन्हे बोलठ । सुग्वा फेन आपन बात कहट– भैया टोहरे मरबो टे १ दिन खैबो । बरु महिन बेच देउ । बेच्बो टे महिन टुहिनके जिन्गी भर खाइ पुगी । ( इ बात सुन्के बु¥ह्वा बेचे चल देहठ ।)

बु¥ह्वा कहठ–सुग्वा लैलेउ । सुग्वा लैलेउ ।सुग्वा बोलठ – भैया टै मोर मोल ना बटाइस । मै आपन मोल अप्नेहे बटैम । बु¥ह्वा फेन कहे लागठ – सुग्वा लैलेउ । सुग्वा लैलेउ । गाउँक मनै पुछे लग्ठै कटरक देबे । बु¥ह्वा कहठ – सुग्वा आपन मोल अपनहि बताइ । मनै सुग्वाहे पुछ्ठै – टोर मोल कटरा हो । सुग्वा कहठ –मोर मोल १ लाख टका (सोनक रुप्या) हो ।(भल्मुन मनै किने नै सेक्ठै । बु¥ह्वा बेचट – बेचट राज दरबार पुग्जाइठ राजक ठन ।) बु¥ह्वा कहठ – सुग्वक मोल सुग्वा जानी । फेन सुग्वा कहठ – मोर मोल १ लाख टका हो । राजा ऊ सुग्वा ( विर विक्रमा) हे १ लाख टका दे के किन लेहठ । बु¥ह्वा सुग्वइ बेच्के १ लाख टका लेके घरे चल जाइठ ।

(एकठो गाउँमे गाउँक लरका भेरी च¥हाइ जैठै । वहाँ जाके राजा, मन्त्री, सेना बन्ना खेल खेल्ठै । जे सफा ठाउँमे (टोकल ठाउँमे) आगे बैठजाइ टे ऊ राजा बनी । जे उहिसे ठोरचे पाछे बैठी टे ऊ मन्त्री बनी । ढिरे–ढिरे पाछुक बैठुइयन सेना, दुवारपाले बनी कैहके भेरी च¥हुइया लरका खेल खेल्ठै । )

एक डिन इ बात वहे देशके राजक कानम झुन पर्ठिस । राजा टे मै हुँ उने कैसिक राजा बन्ठै । राजा टे राजा मन्त्रीसे लेके सेना, दुवारपाले जम्मा बन्जिठै । अस्ते–अस्ते सोच्टी राजा एक डिन चल परठ वहे गाउँमे । गाउँमे जाके लरकनके खेल्लक राजा बन्लक ठाउँमे खोडाइठ । राजा बन्लक ठाउँमे खोडाइट टे टामक चड्डर निकर्ठिस । मन्त्री बनल ठाउँ खोडाइट टे खटिया निकरठिस । अस्ते–अस्ते तमान सामान निकर्ठिस । सक्कु सामान ढोइठै ओ टामके चड्डर, खटिया ढोकेफे राज दरबार लैजाइठ । लैजाके कोठम सक्कु सामान ढारठ । राजा लहाइट । लहालुहुके खटिया विछाके खटियम आराम करे जाइ लागठ । एक गोर खटियम ढर्टिकि खटिया बोलठ – विर विक्रमा जस्ते दान करले हुइबे टे बैठे पैबे नैटे नै पैबे । टबसे राजा एक गोर ढारके दोसुर गोर खटियम नै ढार पाइठ । टबसे राजा एक गोरेक भले ठह¥यैलेक ठह¥यैले रहि जाइठ ।

(बहुट ढेर डिनसे राजा विर विक्रमक मौसी चिन्तामे रठिस । आपन छावइ चिनेह नाइ सेक्के । भूतप्रेते छावा बन्के आइल रठिस व आपन सग्गे छावा काम करके पाछे घरे पुग्ठिस । भूत्वा आगे छावा बन्के आइल वरसे कौन मोर आपन छावा हो कहिके जाने नाइ सेकठ । दुनु जाने अक्केनास बिल्गैठै । टब मोर छावा कौन होवइ कहिके चिनेह नै सेकठ ।)

छावा चिनेह नाइ सेक्के समस्यामे परजाइठ । एक डिन मौसी पता पैठिस । एकठो सुग्वा चाहे जत्रा कररा मुद्धा रलेसेफे सुग्वा मजासे न्याय करठ । चाहे जैसिन कररा मुद्धा फेन मजासे सक्कु जनहन न्याय करठ । वहे सुग्गा मुद्धा छिनोफानो करक लाग मगाइ परल कना सोच बनाइठ । दोसुर दिन वहे सुग्वा लेहे पठाइट । सुग्वा लन्ठै । सुग्वाहे समस्या सुनैठै । सुग्वा समस्या सुन्के आपन मौसीहे कहट – पाँचठो टोटी रहल करुवा लेके आऊ । पाँच टोटीके करुवा लन्ठै । करुवा बिच्चे ढारके सुग्वा कहठ–जे यकर छावा हुइटे इ करुवामे पेल्के बैठी व भित्तर बैठ्के बातफे करी । बात करके निकरेफे परी । टब खास छावा कठिस–मै टे नै पेल पैम । भूतप्रेतवाला कहठ– मै पेलम । सुग्वा कहठ–करुवामे पेलके बात कर । भूत्वा पेलठ व बात करठ । बात करटी–करटी सुग्वा आपन मौसीहे ठेकी मारे कहट । ठेकी मारके सेकठै टे तीन पट्टीमे गार याउ कैहके सुग्वा कहठ । भूत्वाहे गारके अइठै टे सुग्वा सम्झैटी कहट–इ टोर छावा हो, मनै कहु करुवामे पेले सेकी । ऊ भूत्वा रहे टबेमारे ऊ करुवामे पेले सेक देहल । टब जाके मौसी कठिस–सुग्वाहे जहासे नन्ले रहो वहै पठायाऊ । काम करुइया जहासे सुग्वा नन्ले रठै वहै राजक घर पठा यैठै ।

( रज्वक सुग्वा खोब मजासे न्याय करठ कना बात एक कान दुई कान मैदान हु जाइठ । सक्कुओर हल्ला फैल जाइठ । एक दिनके बात हो । विर विक्रमक गोसिन्याफे सुग्वक बारेम सुन्लेठिस । सुन्टीकि आपन गोस्या पता लगाइक लाग सुग्वा मगैना विचार करठ । सुग्वा बलाइक लाग कलकरुवनहे बलैना विचार करठ । कलकरुवनहे बलाइ पठाइट । कलकरुवनहे बलाके लन्ठै । विर विक्रमक गोसिन्या कलकरुवनहे टमाशा देखाइ कहट ।)
कलकरुवन टमाशा देखाइ लग्ठै । टमाशा देखाके सेक्ठै टे रानी कलकरुवनहे सुग्वा लेहे पठाइट । कलकरुवन सुग्वा लेहे जैठै । रानी एहोर भेरवा लेहे पठाइट आपन कामदार हुकनहे । ओहे भेरवाहे कुछ दिन पालके ओहे भेरवकमे विचार कराइक लाग मगैले रहठ । वहाँ राजक घर पुग्के कलकरुवन राजाहे टमाशा देखाइ लग्ठै । खोब टमाशा देखैठै । कलकरुवन टमाशा देखाके सेक्ठै । टब टमाशा देखैलक चाउर ,सिधा, रुप्या मागे लग्ठै । सक्कुजे आपन सेक्ना सम रुप्या चाउर देके सहयोग करठै । राजा रुप्या देहे लागठ । कलकरुवन कठै–राजा जी हम्रिहिन रुप्या नाइ चाहि । रज्वा कहट–बताउ टुहिनहे का चाहि ? टब कलकरुवन कठै–हम्रिहिन सुग्वा चाहि । सुग्वा हुइलेसे हमार पुग्जाइ । राजा आपन सुग्वा बिना हिच्किचैले कलकरुवनहे दै देहेट । कलकरुवन पिंजरक सुग्वा लेके राजा विर विक्रमक घर चल देठै । राजा विर विक्रमक घर पुग्ठै । वहाँ पुग्के फेनसे कलकरुवन आपन जादू टमाशा देखाइ लग्ठै । टमाशा देखाके सेक्टिकि राजा विर विक्रमक गोसिन्या कठिस–आपन गोस्या बनुइया नौवहे । राजा जी सब पह्राइ पहरलो–पहरलो मने कयापलटके कुछ नाइ देखैलो ? राजा बनुइया नौव कहट–देखैना टे देखैना हो मने केमे देखाउ ? रानी कहट–आपन पालल भेरवाहे मारके अङनम लब्दाइत ओ कहट । लेउ यहे भेरवकमे देखाउ । राजा बनुइया नौव लौटपौट करट मरल भेरवक देहमे नौवक जीउ चल जिठिस । भेरवा जि जाइठ । यहे कठै चत्तुर कौवा गुह खिदोरे । नौव कहाँ पाइ आब आपन देह । आपन देहटे वहै पैहले बन्वामे छोरके आगिल रहट । ओहे लग्ले रानी कलकरुवनहे काम करैलक ओ टमाशा देखैलक ओरसे ए हे भेरवाहे मारके खा लेहो कहिके रानी कलकरुवनहे भेरवा दैदेहट । राजा विर विक्रमक गोसिन्या सुग्वाहे कहट–सुग्वा टै लौटपौट करके देखा । सुग्वा लौटपौट करट । राजा विर विक्रमक देहमे चल जाइठ । राजा विर विक्रमा पहिले सुग्वा बनेबेर आपन देह छोरले रहे । सुग्वा मनसे फेनसे आपन देहमे आजाइठ । राजा विर विक्रमा सुग्वा बन्के देश विदेश कहाँ–कहाँ घुमट । समयके खेल अन्तमे आके विर विक्रमा आपन देहमे आजाइठ । राजा विर विक्रमा ओ रानी आपन बाँकी जिन्गी खुशीसे बिटैठै ।

हसिँया ले बो कि बेट ? – बेट
टोँहार आउर मोर सदा दिन भेट ।
(ओराइल)