‘रानी सरङ्गा’

‘रानी सरङ्गा’

पुराण जबानक् बात हो । एकठो बहुट भारी लडिया रहे । ऊ लडियक् किनारे एकठो बहुट भारी रुखवा रहे । ओहे रुखवामे एक जोरी बन्द्रा ओ बँदिन्याँ बैठिंट । ओइनके घरदुवार कलक् ओहे रुखवा रहिन ।
एकदिनके बात हो । एकठो बरा बह्राइल मनैंयाँ नेंगट घुमट ओहे रुखवाठन् आपुगठ । ऊ मनैंयाँ महा सिहरल रहठ । ऊ सोंचठ एकघरी अठ्ठहन रुखवक् छहँरीम् बिस्सा लिउँ । मन्टी घुमैटी उप्पर ओर हेरठ टब रुखवक् डरियम् डेखठ बन्द्रा ओ बँदिन्याँहे बैठल । टब ऊ मनैंया बन्द्रा ओ बँदिन्याँहे कहठ–‘जे इ लडिया नाँघके ओहपार जाई सेकी ऊ मनैंक जलम पाई । इ बात सनके ओहे बन्द्र्र्र्रा ओ बँदिन्याँ सल्लाह कर्ठां । हम्रे इ लडिया नाँघके मनैंक जलम पाबी कलेसे हमार मजा होजाइ ।कुछ काम करके खाई सेक्ना होजैबी । अत्रा कहटी डनजाने लडिया नँघना पक्का कर्ठां ।
टब डुनजाने संगे लडियम् कडजैठां । लडियम् जुन इ डिंउसे ऊ डिंउ पुरा भरल पानी रहठ । ठिक बीच लडियम् पग्ठां कि बह्रे मुए लग्ठां ।नाँघे नै सेक्के डुनजाने घुमजैठां ।
डोसरदिन फेन बन्द्रा ओ बँीदन्याँ सल्लाह कर्ठां कि आझ इ लडिया जैसिक फेन नाँघे परी । टब डुनजाने लडिया नाँघे चलडेठां । बँदिन्याँ भर जैसिक टैसिक बुह्रे उह्रे मुकेकल लडिया नाँघ जाइठ । बन्द्रा भर नाँघे नै सेक्के घुमजाइठ । ऊ मनैंक जलम पाइ नै सेकठ । बँदिन्याँ जुन मनैंक जलम पालेहठ ।भर्खरीक् जवान बठिन्याँ महा सुग्घर बिल्गाइठ ।
विचारी बँदिन्याँ (बठिन्याँ) काकरी बल्टल मनैक जलम पाकेफे घर ना घातके होजाइठ । दिनभर अक्केली लडियक् ढिकुवम् बैठल दिन बिटाइठ । साँझ फेन होगिल रहठ । वनुवम्से गयर्वन भैंसर्वन गोरुभैंस लेले घरेओर आइ लग्ठाँ ।ओइने लडियक् ढिकुवम् पुग्ठाँ टे ऊ विचारी बँदिन्याँहे टुसर¬¬¬¬¬¬¬¬–टुसर रुइट डेख्ठाँ । टब सक्कु गयर्वन भैंसर्वन गाँउमे जाके रज्वक्ठन बटा डेठाँ ।
टब जाके रज्वा अपन सिपाहिनहे लेहे पठाइट । रज्वा अपन घर लानके उहिसे एकदिन मजासे भोजकाज करके अपन रानी बना लेहठ ।
ओहोरजुन बन्द्राहे कल्र्कहवन् पकरके लैजिठाँ । बन्द्राहे गाँउ गाँउ नचाके भिख माँगे लग्ठाँ । बन्द्रा जन अक्को नाचे नै जानठ । विचारा बन्द्रा काकरी पिट्वा पाकेफे नाचे परठिस् । बन्द्रा नाचट नाचट डट्कर जाइठ ।ओम्हे उप्परसे डट्के मारफे पाइठ । ऊ रुइठ ओ भिख माँगठ ।
एकदिन भिख माँगट माँगट रज्वक् दरबार पुग्जैठाँ । टब छटक उप्परसे रानी डेखट टे ‘बन्द्राुहे मोर ठर्वा हो कहिके चिन्हलेहठ । टब रानी टरे उटरके बन्द्राहे कहठ–
‘‘टबेटे कहु बन्द्रा जलमे कडेपरी, नै टो बन्द्रा मन पस्ताएजी, गलामे लगीहे रेसमके डोरी, उपरेसे चारु लठ चट्काएजी ।ुु
बन्द्रा जुन ढरढर ढरढर आँश गिराइठ ओ नाचठ ।ओम्हे कल्कर्हवन जुन खोब पिट्ठीस् । ऐसिक पिट्वा पाइट डेख्के रानीहे महा सोग लग्ठीस् । टब रानी ऊ बन्द्राहे माँगे लागठ । कल्कर्हवन जुन बन्द्रा अक्को डेहक मन नै कर्ठां ।
रानी जुन अपन सेक्नासम् चिरोरी,बिन्ति करठ । टब फेन कल्कर्हवन बन्द्रहे डेहक मन नै कर्ठां । टब रानी रज्वासे बन्द्रा मगा मागठ । टब रज्वा कहठ–ओइनसे बन्द्रा माँगके टै का करबे ? रानी कहठ–कुछु नै करलेसेफे मगाडेउ ना । रानी बात काटे नै सेक्के रज्वा बन्द्रा माँगे चलडेहठ ।कल्कर्हवन जुन बन्द्रा नचाइट–नचाइट बरा दुर पुग्गैल रठाँ । रज्वा कल्कर्हवनठन् जाके बन्द्रा माँगे लागठ,टब कल्कर्हवन कठाँ–‘‘हमार घर ना दुवार,जग्गा ना जमिन,हमार पेट पल्ना,हाठगोर जोर्ना इहे बन्द्रा किल टे बा । इहिहे डैडेब टे हम्रे अपन जिउ कैसिक पालब ?ुु
इ बात सुनके रज्वा फेन कहठ–कि इ बन्द्रा मोर रानीहे डैडेउ, यकर सत्तामे बैठकटन् घर,खेतीपाती करक्टन् जग्गा, हर जोटक्टन् गोंई डाँगर सब्चाज मै डेम ।
रज्वक् बात काटे नै सेक्के कल्कर्हवन ऊ बन्द्रा रानीहे डैडेठाँ । रानी ओ रज्वा फोहैटी बन्द्रा लेके घरे चल्डेठाँ ।
रानी अपन पहिल ठर्वा बन्द्रा हुलक् ओरसे रज्वासे धेउर मैंयाँ बन्दांहे करठ ओ लग्ठीसफे । रानी रज्वक् खाइल खाना कुक्राहे डारठ ओ बन्द्रक् खाइल खाना अप्ने खाइठ ।
ऐसिक खाइट डेख्के रज्वक् नोक्रहुवन नै मजा लग्ठीन् । रोतदिन रानीक् उहे चाल डेख्के रज्वक् नोक्रहुवन एकदिन रज्वक्ठन् बटाडेठाँ ।
रज्वाहे इ बात सुनके नै मजा लग्ठीस् ।टब रानीहे गर्याइ लागठ–इ बन्द्रा टोर के हो ? यकर डुठाहा खैबे टबे टोर पेट भरी ? इ बात सुनके रानीहे महा रिस लग्ठीस् ।रिस पचाई नेै सेक्के ऊ बन्द्राहे उठाके पतक डेहठ ।बन्द्रा ओट्ठेहे मर जाइठ ओ अप्नेफे ओट्ठेहे मर जाइठ ।
टब कुछ समयक् बाद दुनु जाने मर्नेक रुपमे जलम ले था“ । बन्द्रा राजा पृथके जन्नीक कोखमे गर्भ रहथ । रानी जुन औरे रानीक् पेटमे गर्भ रहथ ।
राजा पृथके छावा जर्मथीस ओ ओकर नाउ“ छेदाबृष रथीस । औरे रानीक् छाई जर्मथीस ओ ओकर नाउ“ रानी सरंगा रथीस । दिन, महिना बर्ष बितथ कुछ बर्ष पाछे ओइने बार्ह जिठा“ ।स्कुल जैनाहाफेन होजिठा“ ।दुनु जाने संगे स्कुल फे जाइ लग्ठा“ । ऊ दुइ जहनके जोरी एकदम मिलल रथीन । जहा“ गैलेसे फेन संगे जैन, संगे पह्रना करित।
छेदाबृष ओ रानी सरंगा जस्तक बह्रती जैठा“ ओस्तक दुनुहुनके सम्बन्ध लग्गे हुइती जैथिन । एकठो कहाइ बा –जे आइठ लग्गे ओहे हुइठ सग्गे । ओइने दुनुजाने डौना बेबरी फुला हस् फुलके मगमग महाके लागल रहींत ।दुनु जाने एकदोसरके जवानी से हिरोल्ना झुले लागल रहिंत ।
ज्ब ओइने दुनुजाने स्कुल जैठा“ टे दिनभर चलीक चाला करके दिन कटैठा“ । दुनुजहनके पह्ना लिख्ना कुछ मतलब नै रथिन । स्कुलमे मस्तरुवन फे ओइनहे देख्के हैरान होजिठा“ ओ होगिल फे रहिंत । राजनके लर्का हुइलक ओरसे ओइनहे कोइ फे कुछ कहे नै सेकिंत ।
तब ओइनके चाल देख्के मस्तरुवन कक्षा कोठाके बीचमे डेवाल उठाके लौंडा लर्का अलग ओ लौंडी लर्का अलग कैके कोठा छुट्या देथा“ ।
तबमारे कठा“ कि “जोस्के जीउ डलामल“। दुनुजाने दुनु पा“चरसे सोझीक सोझा दुनुपा“जरसे डेवा ल तिर बैठे लग्ठा“। ओइने पह्रही का पह्रही । पह्रक छोरके टसटे और दुनुपा“चरसे चक्कु लेके डोंडर पारक तन डेवाल खोले सुरु करडेठा“।
दिन भर–भर खोलट–खोलट डोंडर यहपार से ओहपार छिरा डर्ठा । स्मुलमे दिनभर कागतमे ज्या त्या लिखके चलिकचला करे लग्ठा“ । असिक करत देख्के मस्तरुवनके फे कौनो उपाय नै रहिजैथिन् ।
तब एकदिन मस्तरुवन सल्लाह कठार्“ कि छेदाबृष ओ रानी संरगा यी स्कुलसे पास होगिलै कहिके स्कुलसे निकार डेठिन् । रानी संरगा जवान बठिन्या हुइलक ओरसे ओरसे घरक् मनै भोजक लाग बात कारे लग्ठा“ । ओ ठकौनी फेन खा डठार्“ ।
समयफे बिट्टी जाइठ । धिरे धिरे भोजक् दिन फे आजिठिन । ओहोर छेदाबृष जुन आपन बनाइक टन सोंचती रहठ । भोजक दिनफे आजाइठ । भोज सुरु होजाइठ । बरात फे आजाइठ । बरात बैठाके सब काम करके रानी संरगाहे फेन दुलही बनाके पठाडेठाँ । ओहोर जुन छेदाबृष हे बरा कर्रा परजीठिस् ।ं
छेदाबृष काकरी विचारा, ऊ फे अपन घोरुवक् पर चहुँरट ओ चलडेहठ । जाइट जाइट डगरीम् बरात भेटा लेहट । बरात भेटाइट टे घनि डोलीक् आगे,घनि डोलीक् पाछे घोरुवाहे नेंगाइठ । टब फेन कौनो उपाय नै लग्ठीस् । टब गाना गैटी कहठ–
टोरे घोरीला मोरे घोरीला अकेरे उमरिया,मोरे घोरीला दिलके छोटा जी,मोरे घोरीला जे दश हात फाँडट लेटँु,हौडासे निकारो जी ।
छेदाबृष ठठाइट अपन घोरुवा डोलीक् उप्परसे चिठी जकाके आगे चल्डेहठ घोरुवा डौरैटी । ऊ चिठीमे लिखल रहे–
प्रिय रानी,
ढेर मैंया ।
मै आगे जाके झोपरीमे साधु बनके बैठल रहम । ओहैं महिन भेट करहो । मै डट्करल फे बटुँ, निदाइफे सेकम ।जैसिक फेन जगैहो ।
टोंहार हृदयके राजकुमार
छेदाबृष
छेदाबृष जुन ना खाना खैले रहठ , ना सुत्ले रहठ । कै कै दिनिक् भुखासल, पियासल डुपहरक् घामलेके डट्कर जाइठ । जाइट जाइट एकठो कुट्नी बुह्रियक् घर पुग्जाइठ । ऊ कुट्नी बुह्रियक् घर पुगठ टे बुह्रियाहे कहठ–बुडी पानी पिवा महिन महाँ पियास लागटा । टब बुह्रिया पानी डेहट । उहिहे बरा डट्करल डेख्के बुह्रिया एक टाँरा खुझी काट्के लानट । सबसे पहिले जरे ओरीक् गिन्डा खाइक् डेहठ । ऊ खुझी खाके फेन सेकडारठ । टब बुह्रिया पुछठ–नटिया कैसिन बा खुझी ? बुडी महाँ मिठ बा खुझी, छेदाबृष जवाफ डेहठ ।
टब फेन कुट्नी बुह्रिया बिच्का गिन्डा खाइक् डेहठ । ऊ फेन खा डारठ । फेन कुट्नी बुह्रिया पुछठ–अपखरीक् गिन्दा कैसिन बा नटिया ?टब छेदाबृष कहठ–अप्खर ओत्रा मिठ नै हो । टनिक पहिलेक लेके नोन्खल्ला बा ।
कुट्नी बुह्रिया फेन टिसर गिन्दा खाइक डेहठ । ऊ फेन खाडारल । टब कुट्नी बुह्रिया पुछठ–अप्खरीक कैसिन लागल रे नटिया ?
टब छेदाबृष कहठ–अप्खर टे और अक्को मिठे नै लागल ।खाइल नै खाइल बराबर । बुडी पेट नै भरल और डे खाइक ।
इ काहो टे चिबा बा, इहे खाले कुट्नी बुह्रिया कहठ । फकाइल चिबा केउ खाइ ? मै नै खैम ? मै का सुवर हुँ । छेदाबृष जवाफ डेहल ।
हेर नटिया कुट्नी बुुह्रिया सम्झैटी कहल–हाँ बुडु पहिले जर गिन्डा खैले टे बरा मिठ रहे ।ओस्टक टोर ओ रानी सरंगक् सम्बन्ध महाँ घनिष्ट रहे । टब बिच्का गिन्डा खैले ठोरठोर फिक्कल रहे । टुहरे खोब जवान हुइलो टे टुहिनके सम्बन्धफे ढिरेढिरे फिक्कल हुइ लागल ।
टब पोंकी खैले टे एक्को नै मिथ लागल ।
ओस्तेक रानी संरङगा मंगनी ओगनी होगिलिस ते तुहिनके सम्बन्धफे जट फिक्कल होगिल । तुहिनके भेटघाट नै हुइ लागल ।
जब छिल्क (चिबा) खाई कनु ते टै कले फकाइल चिज कहु खैम । ओम्ने ते रस फेन नैरहथ । हाँ ओस्तेक रानी हेफे बन सेक्लाँ । अ टे ओहे फेकाइल छिल्का सरह हुगिल । ओकरपाछे लागके कौनो उपाय नै हो । ओस्तेक भुखे पियास अत्र दुःख करके का पैबे ? आप जौन हुइना होगिल । अटठेसे अपन घर घुम जा बुदु ।
मने छेकाबृष कुटनी बुह्रियाक बात नै मानके जाई लागथ । तब कुटनी बुह्रिया कहथ अपन पालल सुगुवा डेटी ले बुदु यी सुगुवा लैजा संग्गे कहुँ डग्गर घाटमे साथ दिई ।
तब छेकाबृष सुगुवा लेके चल डेहथ । जाइट जाइट मिच्छा जाइथ । तब सुनसान बनुवामे वीच डगरिम झोपरी बनाके जोगिया बनके गाजाँ भाँग पिके डुवारीम सोझे सुगुवाहे टँगाइठ ओ सुगुवाहे कहथ – कोई आइटे महिन जगाइस कहती अपने सुतजाइथ ।
कैयो दिनके भुखाइलm पियासल गाँजक मत्वार बरा डटके निदमे जुमजाइठ । ठिक्के ओहोरसे बरातफे पुगजाइथ । तब रानी सरङगा अपन डोल बोकुवा डोली घारे कहथ ओ अपने झोपरी भित्तर पेलथ पेलके छेदाबृषहे जगाइ लागथ ।
रानी संरङगा छेदाबृषहे जगाइट–जगाइट मिच्छा जाइथ तबफेन छेदाबृष नै जागठ । रानी संरङगा अपन सेकटसम एकसे एक उपाय लगा–लगा जगाइथ तबफेन उ नै जागठ । कौनो उपाय नै लागके उ ओकर दुनु हाथमे जम्मा बात लिखके निकरथ ओ सुगुवाहे कहथ–हरियार पंखी सारी सुगुना काल काटके स्वामी मोर जगही बटयाना कहो जी । तब सुगुवा जवाफ देहठ तै ते महिहे अपन देवर्वाहस नै मन्लै मै नै बतैम । महिनहे देवर्वा कोह तब बतैम । तब फेन रानी संरङगा कहठ–हरियर पंखी रे सारी रे सुगुना तु ते हुइतो संग्गे मोरे देवर जी । काल कटाके स्वामी मोर जहही बटयाना कहो समझाए जी ।
तब सुगुवा फेन कहठ– हाँ बतादेम । ओस्तेक रानी सरङगाफे चलडेहथ । बलतल छेदाबृष भुरेभुरसन जागठ । डग्गर धुर्या धुर्खुन डेखठ । बरात गैल देख्के महारिस लग्ठीस । रिस नै टामे सेक्के सुगुवाहे गर्यैटी– टै फेन नै बतैले । सुगुवक दुनु गोर पकरट पटके लागथ कि ओकर हाथेमसे सुगुवा निपुच्के भुरसे उर जाइथ । रुखुवक उप्परसे सुगुवा जवाफ देहथ । मै बताइक लग ते रहु, टै एकफाले मारे लग्ले मैफे टुहिनसे कबु ना कबु जरुर बडला लेम । कहिके सुगुवा चल डेहथ । फेन छेदाबृष अक्केली रहिजाइथ ।
छेदाबृष अपन डगर लागथ । उ जाइट जाइट एक ठो लदिया पुगथ । उ बरा पियासल रहथ । पानी पिए जाइ लागथ ते अपन हाथेम जम्मा कहानी लिखल देखथ । उ भेटक दरे डरेगाँर डिगराके पानी पिए लागठ । ओकर टिकरा और संरङक दिी जुन लुग्गा धोइटिहिस । ओकर दिदी छेकाबृषहे देखट टे चिन्ह लेहथ । उ ओइनके बारेमे जम्मा पत्ता रठिस । तब अइसिके पानी पियत देख्के उ कहठ–
ना मै देखु आँखके अंधरा रे,
ना मै देखु हवाके जुलरी जी,
यिहे टे कहे छैला छैलीसे भुलल मुह भुमका पानी पियत जी ।
तब उहीहे बरा लाज लगठिस । उ बहना लगाइ लागठ । ना मै हुइटु आँखके अंधरारे, ना मै हुइटु हाथके लुल जी मै टे हुइटु गारीके चलुइया, हातमे लगी मसियानी जी । अतरा कहिके छेदाबृष चल देहथ । जाइट जाइट जौन शहरमे रानी संरङगा सस्रार रठिस ओहे शहर पुगजाइथ । तब ओक्रे बगीयमे कुट्टी बनाके बैठ जाएथ दिनभर भिख मागके खाइथ । कबु भुख्ले सुटठ टे कबु पियसले ।
एकदिन भिख मागत मागत रानी सरङगा दरबार पुगजाइथ । तब रानी सरङगाहे देखथ तब रानी संरङगा पुछथ– कहाँ बैठठो ? तब छेकाबृष कहथ टोहारे बगियामे बैठठु कहथ ।
एकदिन रानी संरगा बगीया घुमे जाइथ ते दुनु जाने सल्लाह करठाँ कि टु सपुवा मारके मोर पठरिम धारयिहो । तब छेकाबृष एकदिन डोमिनिय सपुवा मारके रातके रानी संरङगा पठरिम धारयाइट । तब रानी सरङगा ओहे रातसे साँस बन्द कैके मुवलहस हुजाइथ । तब राजा देखत ते पठरिम डोमिनियाँ सपुवा ओ सरङगाहे मुवल । ओहे सपुवा कटले हुई कहिके गुरुवा बडैवा खोजे लागठ । जत्र टे गुरुवा बडैवा रहित कोई फे विष झारे नै सेक्लाँ ।
टब राजा शहरेमे डुग्गी पिटाइ लागला जत्र टे गुरुवा रहित सारा जहन बलाके उ काम करे लगाइल कोई फे कुछ करे नै सेक्लाँ । तब गरुवन कलाँकी आब अन्तिम एक्केठो उपाय बा । यी बगीयममे एक ठो जोगिया आके बैठल बा । जाउ बलाई सेकी टे ओहे सेकी नै टे कोई नइसेकी ।
छेकाबृषहे बलाके नन्ठाँ । उ आइथ ओ भित्तर हेरे जाइठ । तब छेकाबृष कहठ– सक्कु जे यी घर मन्से निकर जाउ । तब सक्कु जे राजक घरेम (दरबार)से निकर जैठै ओ उ भित्तर पेलठ ।
एक ठो कहाई बा–‘‘ढुङगा खोजेबेर भगवान मिल्थुु कटी । कैयौ दिनिक भुखासल,पियासल छेदाबृष अपन
म्न परल परी भेटाई ते का छोरी बृष झरना टे बहना केल रहथ ।
छेदाबृष अपन भोगलार सुई निकरथ ओ रानी संरङगाकमे लगाइ लागठ । पचचे सुई भित्तर सुई भित्तर पेलाइथ एक घाचिक रहिके रानीक होस आजैठीस ।रानीक होस आगिलिस कहिके छेदाबृष चलदेहथ । ओठेहेसे ओइने मजासे बैठे लग्ठाँ ।
कुछ दिनपाछेफे दुनु जने सल्लाह करठै । छेदाबृष फेर दुसर सपुवा मारके रानी सरङगक पठरिम धारयाइथ । रानी सरङगा फेर साँस बन्द करके सुटजाइठ । तबफे सकारे राजा देखठ । परिठमे सपुवा ओ रानी संरङगाहे बेहोस हुइल । रजुव फेन गुरुवा बैदवा खोजे लागठ शहर भर दुग्गी पिठाइथ जम्मा गुरु जुटाइथ । सब गुरुवन विष झारत–झारत मिच्छा जैठै तबफे कोई नै झारे सेक्थ । अन्तिममे कौनो उपाय नइलाmगके उहे जोगियाहे बोलाके नन्थै । तबदुनु जने पहिलेक नन्हे कामकाज ओरुवाके जोगिया बाहेर निकरजाइ । रानी संरङगा नै जिना सल्लाह फे करथै । तब छेदाबृष आब मै जिवाई नै सेकम कहिके चलदेहथ । रानी संरङगा मरगिल कहिके ओकर दास संस्कार कर्ना शुरु करे लग्ठै । जौन बयिगम छेदाबृष कुट्टी बनाके बैठल रहथ । उहे बयिगम रानी संरङगक लाहश जराइ जैठै । ठिक्के ओकर लाहश जराई जाइ लग्ठै कि टे छेदाबृष देखलेहठ ।
तब चिम्ता लेले रखेदे लागठ ओ कहथ– जहाँ साँधुके धुनी जरता वहाँ मुर्दा जरैना कहिके सक्कुहुन रखेदे लागठ । तब आगी लगाइ छोरके सक्कु जने अपन अपन घर भगा जैठै ।
छेदाबृष यहोर ओहोर मनैन चिताइथ किहु नै देखठ । रानी संरङगक हाथ पकरके उठाइथ । उहाँसे दुनु जने भगाजैठै । भागत भागत दनुजने बरदुर घनघोर बनुवामे पुगजैठै । उहाँ पुगथै रात हुजिठिन । रातभर रुखुवातिर सुत्ठै ।
तब रुखुवक उप्परसे सुगुवा देखलेहठ । सुगुवा अपन पुरान नै विस्रैले रहठ । तब उ बदला लेहक लाग उप्परसे आम गिराइठ । भोक्से बोलथ टे मनै आगिनै कहिके दुनु जने झरफराके उठके भाँगे लग्थै । फेर दुसर रुखुवा थेन सुते जैथै । थोर थोर निदाइल हस करथै टे फेन ओइनके पन्जरे आम गिरथ । फेन कोई आगिने कहिके दुनु जने भागे लगथै । ओस्तेक करत करत ओइनके रात वित जैठिन । दुन जने अक्को सुते नैपैथै । ओजरार हुइठ टे फेन ओइने भागे लग्ठै भागत भागत बरदुर पुगजैथै । कै कै दिनक निदासल, भुखासल, पियसल छेदाबृष दरकर जाइठ । तब उ रानी सरङगाहे कहथ । अत्र दुर कोइ नै आइ आब एक घाची विसाली ।
रानी सरङगा बैठल रहथ । ओकर जंघक सिरन लेके छेदाबृष सुतजाइठ । डटकरल जिउ उ अक्के घाची निदा जाइठ । ठिक्के छेदाबृष निदाइथ,ठिक्के ओकर बाबा भौरानन हठिक पर बैठके शिकार खेलथ खेलथ उहे पुगजाइथ । तब देखथ रानी सरङगाहे । अत्र सुग्गर रानी सरङगाहे देखथे मन परजैठीस । छेदाबृषके लाग कठुवक सिरहन धरथ । रानी सरङगाहे हठिक पर बैठाके लेके चलदेहथ । छेदाबृषहे जुन कहियक डेखल जम्मा दाह्री मोछ पाकल मोर छावा हो कहिके नै चिन्हठ ।
रानी सरङगाहे लैजाइ लग्ठीस टे काकरु ककरु क्हिके छेदाबृषहे जनाइकटन् चुरिया फोर फोर सैल डग्गर चुरियक् टुक्रा गिरैटी जाइठ ।
छेदाबृष बल्टुनके जागठटे कठुवक् सिह्रन ढैके सुटल डेखठ । एहोर ओहोर चिटाइठ किहु नै डेखठ । बरा दुःख लग्ठीस । अक्कल्ही चलडेहठ डगरी डगरी खोज्टी ।डगरीमे हथियक पैला डेखट ओ चुरियक टुक्रा । छेदाबृष जान लेहठ पकक्न्ँ मोर बाबा लैगिल हुई कहिके । नै टे इ बनुवामे कोइफे शिकार खेले नै खाइठ । ऊ नेंगट नेंगट अपन घर पुग्जाइठ । ओहाँ पुगठ टे कोइ नै चिन्ठीस् ।
टब छेदाबृष अपन घर कमैया लाग जाइठ ।दिनभर ओहैं काम करट । राजक् लर्का कै दिन काम करी, काम करट करट मिच्छा जाइठ ।
एकदिन काम करट करट डट्करके बैठके गीत गाइलागठ –राजा पृथके बेटवा हुँ सदे छेदाबृष मोर नाउँ, पाँचटका महिन्वारी ईटिया बोकी कन्धा ढुरियाई ।
टब जाके काम करुइयन सुन्ठा टे रज्वक् ठन् जाके कठाँ –लावा काम करुइया टे बरा मिठ महा सुग्घरसे गीत गाइठ ।
टब रज्वा छेदाबृष हे कहठ –गाउ गाउ भैया मै फे सुनु टोंहार गीत । गीत नै जन्ठु टे का गाउ छेदाबृष कहठ । कबु कबु मन लागल बेला गुन्गुनैठु ।राजा पृथके बात काटे नै सेक्के छेदाबृष गीत सुनाइठ – राजा पृथके बेटवा हुँ सदे छेदाबृष मोर नाउँ, पाँचटका महिन्वारी ईटिया बोकी कन्धा ढुरियाई ।
राजा इ गीत टे राजा पृथटे मोर नाउँ हो ओ छेदाबृष टे मोर छावक् नाउँ हो ।राजा साेंचट छेदाबृषके घर टोरल बहुट बरष होगिल पक्काफे मोर छावा हो ओ जान लेहठ रानी सरङगा यक्रे जन्नी हुइस । मै यक्रे ठनसे नन्ले रहु ।
टब राजा पृथ छेदाबृष ओ रानी सरङगक् डुनुजन्हनके धुमधामसे भोज कैडेहठ । ओट्ठेसे सक्कु परिवार मजासे मिलके बैठे लग्ठाँ ।
ओराइल ।