थारु भाषा साहित्य, कला व संस्कृति संरक्षण लाग सहयोग कर्ना …नारा लेक हम्रे पोहोर साल २०७१ फागुन २२ व २३ गते निक्रल रही ढुरहेरी खेले फगुई साहित्यिक कार्यक्रम म । हम्रे थारु जात सब्से धेउर संस्कृतिमन धनी हुइती हमार पुर्खन बहुतकुछ कैके गैलबतै मने हम्रे सम्हारे नाई सेकथुई । हरेक मौसम अनुसार के गीत बाँस नाँचकोर लगायत बहुत कुछ…। उ बेला हमार हिरगर साहित्य बगाल दर्ता नाई हुइल रहे मने सल्लाह हुइना सुरु हुइल रहे । बहुत से संघरीयन के एक आपस म मजा से चिन्ह जान फेन नाई रहे । उ समय बरा यादगार पल हुईल बतैथै संघरीयन । बहुत मनैन से जानपहिचान फेन हुइल संघरीयन फे जोरदार प्रस्तुति देखैल, सब के योगदान केहुसे कम नाई रहे । और हम्रे फेन ठुलाबरा घर पत्र पठैले रही ढुरहेरी खेले अईबी कैके । पत्र पाईल घरक मनै बेचैनी से हमार बतीया हेरेतहै कब पुगही कैके। छरछीमेक म पत्र नाई गैल हमार वहाकेल आईल बा कैके घर गोस्या हुकन एक प्रकार के अलग्गै गर्ब रहल हुईहीन । सायद तबेत आपन पडोसीन कहैँ । अइ तुहन के वहाँ होरी (ढुरहेरी) खेलुईयन आईत कि नाई ? हमार यहाँ त आईक लाग बतै कहुँ जाई फेन नाई पाईथुई जाने कब आईत ? पडोस म बर्वार हुईना चलन त पलेबा हमार म कोई कोई त झन पडोसीन के बगाल मन्से फोन करै hand free कैके हमार बगाल हे । हलो .. कहाँ बतो तोहरे कब पुग्बो हमार वहाँ हमीनफेन यहोर ओहोर जैना रहे तुहन्के बतीया हेरती औरे जहान ओईने सुनाई । हमीन और खुशी व जोस जाग वास्तव म हम्रे संस्कृति बचाईती कना भान होय और राहरंगी करी आपन बगाल के संघरीयन जोर से कही फलाना ठाउँ से झत्ते बलाईतै रेउ संघरीयो झत्ते करो । हमीन फेन जौन घरे ढुरहेरी माँङ्गती उ घरे से झत्त बिदा लेना बा और सेखी फेन देझैना बा सकेसम्म आर्थिक सहयोग धेउर मिलत त कना आशा फेन बा । मने आपन मुह से अत्ना देउ कैके नाई मङ्गना हमार आपस म प्रतिबद्धता कर्ले रही व धुर्हेरी खेलत सम्म हम्रे मदाहाजात हुइती कोई नाई जाँर दारु पिय कैके । हम्रे तो संस्कृति फेन बच व आर्थिक संकलन हुई त सब कोई पिकनिक पार्टी करथै हम्रे मजा काम करब कना उदेश्य रह। और हम्रे हमार अग्रज बुद्धिजीवी ओईन से बहुत मजा मजा सल्लाह सुझाब व सहयोग पैली । हमार उत्साह जोस जाँगर देख्के अत्तरीया के मान बहादुर चौधरी ट्रेक्टर उपलब्ध करैना के संगे आपन पुर्वक लवन्डा लवन्डीन के बगाल हे जाउ सब्जे आपन पुर्वा म आईल बेला सहयोग करक परथ कैके खतादेल हमार बगाल और भारी हो गैल और खुशी लागक घनगढी से सुरु हुइल फगुई अत्तरीया पुगल । धनगढी म फे हमहीन सब कोई सहयोग कर्नै मने सदभावना टोल के सदभावना पार्टी के फोनीराम चौधरी सेऔर धेउर सल्लाह सुझाब व सहयोग मिलल आर्थिक भौतिक सब । पत्र देहल घर मे फगुई खेलेबेला हमार कल्पना कैल से धेउर आर्थिक संकलन हुई लागल केउ केउ त एक्क घरेसे ५००० त कोई ८०००० देहे लग्नै हमार और जाँङ्गर चलेलागल भले हम्रे भुँख्ले पेट रही पतानाई चलल। बिना पत्र कातल घरक मनै फेन आदेउ हमार घर फेन कैक जिद्द करे लग्नै आखिर हम्रे त संस्कृति बचैना उदेश्य ले लागल मनै केक्रो चित्त त नाई दुखाईक परल कैके बलाईल घरेफेन जा दि मने सबकोई हजारौ हजार तो नाई देहेसेकै कोई १०० त कोई ५० फेन देहै और हम्रे बरा खुशी हुईती लैलेहली । ढुरहेरी खेलक लाग बलैना त हम्रे बहुत्त हमार साहित्यक अग्रज ओईन बलागैल मने दाङ्गसे छवि लाल कोपिला स परिवार और शिव हरी सर पुग देहनै हमार और खुशीक सिमा नाई रही गैल। उहे उठल पैसा से हम्रे त्रैमासिक पत्रीका हरचाली हे जन्म देहली आजफेन थारु समाज मे घरघर पुगता मेरमेराईक गीत बाँस, थारु संस्कृति सम्बन्धि कार्यक्रम के जानकारी ,गजल मुक्तक जैसिन उपलब्धि मुलक समाचार अप्नेन के हाँथम पुगैती बा । असौफेन सब जाने मिल्के संस्कृति बचैना संगे रमाइलो करी उहे बहानामे कुछ आर्थिक संकलन हुई त hiragarsahitay.com हे जन्माई ई डट कम हमिन और आघे बर्हाई भाषा संस्कृति हेरैती जाइउता पुर्खन के बेल्साईल हरेक प्रकार के सामान हेरैती जाईता हमार टरटिहुवार कब कौन समयमे परी ई सब जानकारी सजिलो से जाने सेकब आज गैर थारुनके बनाई भित्ते पात्रो जब मन लागतीन तबे धारेतै तब त हमार प्रतेक ठाउँ म संगे तिहुवार नाई हुई सेकथो । हिरगर साहित्यक बगाल के प्रतेक शाखा से कम्तीम ५ जाने अनिवार्य उपस्थित व आपन खुशीसे जे कोई फेन आई सेकी कना आशा ओ भरोसा बा। आई सब्जे मिल्के धुर्हेरी खेली ।

हिरगर साहित्यिक बगाल केन्द्रिय कार्यालय धनगढी ,कैलाली

कोषाध्यक्ष

गंगा डगौंरा