अब्बे के अवस्था थारू गजल

खेत्वाम पाकल धान झुलल बाल हुलो हश्या देखो।।   
दौना बेबरी गेन्दा फुलल अब आईल दश्या देखो।।
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चम्पन गाँउ सुनसान लागथ आझकल काहे ?
डर भैं मे जिया तै सब मनै मन्दराक रश्या देखो।।

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रात भर नाँच गान मनोरञ्जन करैह गाँउमे।
सकारे मिले पक्ली ओ घोरवा जाँरक बश्या देखो।।
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बहुत कुछ भुइँचाल लैगील बचल नेतैह खाईतै।

आन्दोलनसे कब लेहे मिली चैनके सश्या देखो।।
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अपने-अपने थारून लराई खोजतै देशके नेता।
ऐ! राण्वा भैया “अन्धर बनथ है बो “खश्या देखो।।

खेत्वाम पाकल धान झुलल बाल हुलो हश्या देखो।।   
दौना बेबरी गेन्दा फुलल अब आईल दश्या देखो।।
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चम्पन गाँउ सुनसान लागथ आझकल काहे ?
डर भैं मे जिया तै सब मनै मन्दराक रश्या देखो।।

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रात भर नाँच गान मनोरञ्जन करैह गाँउमे।
सकारे मिले पक्ली ओ घोरवा जाँरक बश्या देखो।।
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बहुत कुछ भुइँचाल लैगील बचल नेतैह खाईतै।

आन्दोलनसे कब लेहे मिली चैनके सश्या देखो।।
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अपने-अपने थारून लराई खोजतै देशके नेता।
ऐ! राण्वा भैया “अन्धर बनथ है बो “खश्या देखो।।