आउ सखि लेवा हो राखल बियार लगाइ

आउ सखि लेवा हो राखल बियार लगाइ

पुरुबसे उठल डिन पच्छिम जाके ढलल
असार सावन महिनम जोरके झरी झरल
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आउ सखि लेवा हो राखल बियार लगाइ
टुहीनसे मस्कक ला उ बयाल फेन बहल
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मेर्वम बैस्के बुडु मिट मिट सज्ना गैटी बा
कान कन्कनार पार्के मेघुवा चुप्पसे सुनल
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अहँ अहँ टक टक कटी बाबा हर जोत्टा
एक हाथम हर डोसर हाथले पस्ना पोछल
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चलो चलो गोरु चलो चलो हर जुवा हेँग्गा
उटरहेसे आइल किल्वाही सँगे सँगे नेगल
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लेखक : सुरज अखेल
राजापुर २ बरगदही, बर्दिया
हाल : सुर्खेत