गजल

गजल

मोर चाँदनी मुटुमे प्रहार कैके कहाँ बटो ।
कब्बु नैछुट्ना मुटुमे प्यार कैके कहाँ बटो ।

जिनगिक सफर करेक् लाग टुहिन रोज्लुँ,
मने इ जिङिम बौछार कैके कहाँ बटो ।

सोंचल मनक् लक्ष्य भुट्भुटावाके आझ,
मैगर चोल्यक् रंग बेकार कैके कहाँ बटो ।

टुहिन बिना मोर कुछ जाँगर नैचली यहाँ,
भल्मुन इ दिल सोल्सोलरार कैके कहाँ बटो ।