चुग्लीक बात ओ संविधान सभाके चुनाव

चुग्लीक बात ओ संविधान सभाके चुनाव

 मनिराम चौधरी
आज विश्वके हर कोन्वामे हत्या, हिंसा, दमन, शोषण, अन्याय, अत्याचार फैलल् बा । ओकर प्रत्यक्ष प्रभाव राजनीतिमे जाके रुकठ । जत्रा भारी विकास उन्नति, प्रगति डेखमिलठ, उ फेन राजनीतिसे जो जुरल रहठ । कहलक मतलव का हो कले एक ओहोंर विकासके फूलामे सुन्दर संसार डेखुईया बाटै टो डोसर ओर ओहे फूलाहे झराके माला गुँठके स्वागत कैके हत्या करुईयन्के फेन कमी नाई हो ।

जात्तिकसे कन हो कलेसे रामायण, महाभारत, ओस्टे नाई रचगिल हो । वेद, पुराण उपनिषद, गीताके गाथा फेन जवरजस्ती नाई लिखगैल हो । एक देशके कथा डोसर देशके कथा ईतिहाससे जोरटा कलेसे ओम्ने फेन भविष्य मे केक्रो ना केक्रो पक्षके खोजनी बोजनी हुके किल पारित हुईल बा, बुझक परठ । आज अस्टही महोल बा, हमार नेपालके । यी प्रसंग का करे जोरे खोजल हो कलेसे संविधान सभाके चुनाव अंगनामे आ सेकल । अब्बे सब राजनीतिक पाटी–पार्टीमे उम्मेदवारीके डबनी भिराउ चलल् बा । गाउँ–गाउँ, बजार–बजार, गल्ली–गल्ली, शहर कोना कप्चासे लेके होटल–होटलमे फेन यी बातके अँटाव लागल बा ।
कठै चुगलीक बात रिस लागठ, खोटींयक टीना मीठ लागठ । यानिकी बुझ्लेसे एक पार्टीक मनैया डोसर पार्टीक बदनाम उरैनामे किल डेख मिलठ् । कोई बहुदलीय प्रजातान्त्रिक बातके बह्रावा डेहठ टो कोई संघीय समाजवादी, कोई गणतन्त्रके नारा टो कोई लोकतन्त्रके । संघीयता बिरोधी फेन जोर टोरसे लागल बाटैं । ओइने नेपालहे प्रदेश–प्रदेशमे विखण्डित करे नाइ मिली कैहके चिल्लैटी बाटै । कोइ अखण्ड सुदुरपश्चिमके बात उठैटी बा । सब्जे आपन–आपन धुनमे मस्त बाटै । कैसिक किहुहे मुर्गी, छेगरी, भेंरी बनाके खाई । कैसिक ओकर गोरा टानके पक्री, कैसिक ओकर जर पैलाके छद्दसे कुह्रारले काटी कना बात किल सुन मिलठ । आज फलना अइसिन, फलनी ओईसिन् ।
ओत्रासम कि पार्टी–पार्टीमे फेन आपन–आपन व्यक्तिगत स्वार्थके लाग, पदीय दायित्वके हर्ताकर्ता बनक लाग फेन अपने पार्टीक मनैन्के गोडा हाँठ काटल ढेर–ढेर उदाहरण बिल्गठ । आज हेर्बो कलेसे आँखीक सामने कोई केक्रो गुलाम (नोकर) बनटा कलेसे कोई केक्रो मालिक बनके नँचाईटा । मानो कोई नारद बनके काम करता टो कोई शकुनी मामा बनके गुप्तबास लेके ओकर घरम आगी लगाईटा । सन्नातामे छारख्ले बा अब्बेक यी चुनावी माहोल । असिन लागटा, आब टो यहाँके नारी (जन्नी) हुँक्रे फेन ठरुवा (पुरुष) हुँक्रनसे ढेर राजनीति करे लागल बाटै, मने यी समयके माग हो । आपन–आपन वर्गीय सवालमे कमैया, अढेर्वा, सुकुम्बासीहुँक्रे फेन पाछे नाई होई आब राजनीतिमे जैसिन लागठ । मने ओइन आब प्रयोग किल नाइ करेक चाही, शान्ता चौधरी अस स्पष्ट भूमिका डेहक चाही ।
राम्मो राम, अब्बा टो हेर्बो कलेसे पार्टीक आन्दोलन, किसान मजदुर आन्दोलन, व्यापारीनक आन्दोलन, विद्यार्थी आन्दोलन मने विकास करेबेर भर जिरो । ओहे टो कहकुट बा काहुन्– आपन पेट भरगील, साह्रु भकरी टंगाउ । जब जितके संसदीय भवनमे साँसदके, मन्त्रीके दर्जा पैहीं, टब जाके जनतनसे करल प्रतिबद्धता सब भूल जैहीं । मै कैसिके चुनाव जितके अईनुँ । कत्रा ढेर जनहन डगर, बिजली, स्वास्थ्य चौकीसे लेके आपन गाउँ ठाउँ बनैना कैहके प्रतिवद्धता जाहेरी कैनु । उ सब ओहे मुहमे राम राम बगलमे छुरा बनके हेराजिठीन् । टबेमारे अस्टे अस्टे आजके देश खउईया नेतन्के जमातसे शुरुवात हुईठ चुगली बात । आज घर घरमे राजनीति, भाई भाईमे राजनीति यहाँसम्म कि बाबा छावामे राजनीति, डाई छाईमे राजनीति, ठरुवा जन्नीमे फेन राजनीति बा । यहाँसम कि अक्के घरेक मनै मेरमेरीक पार्टीसे उठ्टी बटाँ ।
आब एकघचिक एक कोन्वामे जाके ठह्रियाई ओ सोंची कि अपन हाँठ माँठम् ढैके कि का मै फेन कौनो ठाँउमे चुगली खाके किहुहे फसैले बटुँ ? ओ फेर सोंची का ऊ चुगलीक् बात सत्य रहे ? का ऊ चुगलीक् बातमेसमाज साथ रहे ? जवाफ पैबी फेर जिरो । का करे कि अब्बेक् माहोल सत्यमे नै हो ।
आजकल सत्यहे जित्ना ढेर समय लागठ । टब्बेमा मै का कहना चाहटुँ कलेसे अपने चुगली खाके किहुहे बिगारे सेक्ठी कलेसे चुगली खाके सँपारी । अपने भाई कोई आपन लग्गुक बाटै कलेसे अब्बेक आपन अमूल्य बोट (भोट) के सदुपयोग मजा ठाउँमे करी । आपन डगर भुलल हुइबी कलेसे फेरसे निर्णय लि ओ मजा डगर नेंगी । अपने किहुहे फँसाके राजनीति करटी ओ अपनेक ऊ फँसाइल राजनीति ढेर जनसमुदायके आँखी खुल्टिन, ओइने अधिकार, विकास पाइटै कलेसे अपने कबु ना पाछे हटी, राजनीतिमे एक पक्षके विजय ओ डोसरके पराजय टो हुइठ नै । उम्मेद्वारलोग मजा डगरेम जहाँसम अपने लागल बाती कभु ना पाछे हटी । अपनेक साथ जनता बाटै । मनो यी चुगलीक बातहे बिस्राके अपने सत्यके पक्षमे किल लागी विजय निश्चित बा ।
अभिन फेन एक कोन्वामे धर्मके राजनीति बा कलेसे डोसर ओर हत्याके । यी सब बातहे मध्य नजर कर्के हेर्बो कलेसे अभिन भर्खरे एकठो भैया किहुहे मुरगा बनाके छोरटेहे टो डोसर भैया ऊ मुर्गा बन्वा पाइल भैयाहे आपनठन बलाके सुफलाइटेहे कि भैया टै मोर ओर लाग, मोर पार्टीम आ, टोर लर्कन लगैम । टब ऊ मनैया केकर ओर लागु कैके सोचल, अभिनफेन ऊ सोच्टी बा । अस्टे–अस्टे भैया बाबुन टटाई अइटी बा अब्बेक यी चुनावी माहोल । ओहे मारे ठण्डा दिमागसे सोंची, बची ओ बचाई । दलालीन्से, घुसखोरिनसे, देश बेचुवा नेतनसे । आपन पहिचान बँचाइक लग छानके निर्णय अवश्य करी, का करे कि ढेर समय नाई हो । समयमे निर्णय लेके आगे बह्री । कहुँ समय फेर छुट जाए । टब पाछे कहबी– अरे मै टो डगर भुला गैल रहुँ ।

उदासीपुर–६ पृथ्वीपुर, कैलाली निवासी

लेखक युवा गायक÷साहित्यकार हुइट