‘मघहा लैयक् आगी’

‘मघहा लैयक् आगी’
शीर्षक – ‘मंघहा लैयक् आगी’
समय: माघके महिना राटिक् 7 बजे
कलाकारहुंक्रे:
1) नम्मोछिया(बुडु)(पुर्खामनै)
2) सुन्दरी(नटिन्याँ)(5 वर्षक लर्का)
3) सोन्चिर्वा(मस्टर्वा)(पर्हल लेखल मनै)
4) सुख्ली(सुन्दरिक् डाई)
5) गमुवा(नम्मोछियक् छोट्की छावा)

(माघेक् महिना जार बहुट जोरसे बर्हल रहठ, घर छोटमोट हुइलेक ओरसे घरेक् बहरिमे पैंरक् पट्ठ्री लगाइल रहठ, डेंहरीक् उप्पर ढारल मट्टि टेल्हा डिया ढिपढिप बर्टी रहठ,कबु कबु हावा बहठ टो डिया फे बुटेबुटे करठ, एकओर बज्रा केवाँरके संन्ढ्रीमे पुरान फाटल फाटल कम्रा ओहोरके आगिक् लैया अगोर्ले बैठल रहठ नम्मोइया, और डोसर ओरजुन् नटिन्याँ(सुन्दरी) लैयक् आगी डन्ठासे खिट्कोर्टी मकै भुज्टी रठिस्, उहे समयमे)

नम्मोछिया : (नटिनियैँ गरियैटी) रि बुडी लैयक् आगी काजे खुड्बुडुवाइटे ? मकै वकै भुजट नै हो इ लवन्डी,खाली सैल लैयक् आगी भुट्भुट्वाकिल डेहटा, यहाँ बर्का जोर से जार लागटा, दाँतओट खट्खटाइटा, इ जुन मकै भुजके आगि बुटैनामे लागल बावै, (नम्मोछिया माघेक् महिना हे गरियैटी) इ जारेक् महिना फे जने काकरे आइठ, मै जैसिन बुर्ह मनैन टे जिट्टी मुवैनाहस् करठ, ऐसिन जारमे कैसिन सुटे सेक्जाई,? सुटे जैले से पट्ठ्री जुरे जुर रहठ, पट्ठ्री डंडैना फे घण्टौ लागठ, का कर्ना हो का नि,,! जत्रै जार लागठ ओत्रै सनाक् सनाक् रिस उठट्। (फेर से नटिनियैं मैयाँसे गरियैटी) अभिन टो एकचोट कहलेक् बाटे नै मानठो इ लवन्डी, झट्टा जा मकै-वकै भुजभाजके खाके सुटे,! बिहानके फेर स्कुल जैना रही टोर।

नटिन्याँ : (ठोंठक्  मकै निखोर्टी) इ बुडु फे कत्रा गरियाईटा,न मकै भुज डेहठो न टो भुजे डेहठो खाली गरियाइठकिल बा, मै मकै भुजे नाई जन्ठु टो कैसिक् भुजु,? कि टो टै भुज डे मोरलाग मकै, काल बिहानके मै स्कुलमे लैजिम् नास्टा बनाके, यहाँ स्कुलमे बर्का भुँख लागठ, सबकोई खैठै मै टो हेर्ठु,

नम्मोछिया : (नटिन्यँक् हाँठेमनसे मकैक् ठोंठा छिन्टी) लान मकै मैं भुजडिउँ, टैं जा नुइयाँ लेहे,टब्टो भुजल कमै ढर्बे नुइयाँमे, (नम्मोछिया नटिन्याँ हे खेल्वार कर्टी) हेर बुडी मकै भुजेक् टो कहले मनो मै भुजौनी मकैक् लवारा खैम् टैं डवाँची खाइस ना, मै बुर्हागैल बाटु,(नटिन्याँ हे मुह् बा के डेखैटी) हेर हेर मोर डाँट टो अक्को फे नै हो, सब् टुट्गैल बा, अब सक्कु मकैक् लवारा भुजा मोर बटहा ना(नम्मोछिया ठिट्ठा मारके हाँसठ्)

नटिन्याँ : (रुवाँइन छुवाँइन मुह लगैटी) नाइ बुडु नाइ, मै नै डेम टुहिन मकै भुजे, टैं मोर सक्कु मकै खा डेबे टो मै का लैजिम् स्कुल ? टैं खाइस् डवाँची मकै मै लवारा मकै स्कुल लैजिम्, (नुइयँक् मकै खेलैटी) बुडु इ हेर टो यहाँ सक्कु मकै डवांचिकिल बा, टैं नै जन्ठे मकै भुजे, लान् मैं भुजु ।

(अत्रै कहटी सुन्डरी मकै भुजे लागठ, उहे समयमे सों सों फों फों कर्टी सोन्चिर्वक् प्रवेश हुइठ)

सोन्चिर्वा : (सों सों फों फों कर्टी, और गम्छाले मुह् पोंछ्टी) काकु..काकु… ऐ काकु कहाँ बाटे ?

नम्मोछिया : (भिट्टर से खोंख्टी बोलठ) के हो ना काकु काकु कहटा ? (नम्मोछिया बोली बिचारठ और कहठ) ए मस्टरान् सोन्चिर्वा हुइटे ?

सोन्चिर्वा : (घरेक् भिट्टर पेल्टी) हाँ काकु मैं सोन्चिर्वा, ( यहंर उहंर हेर्टी, बेर्चिम् बैठ्टी) खै टो काकु टोर छोट्की छावा गमुवा ?

नम्मोछिया : (हुँक्का पिटी) काकरे खोजटे गमुवैं टैं अत्राजुन् ? जुन न बेला, सायड अपन  बर्का फुफन् घर गैल हुई ।

सोन्चिर्वा : (लैयक् आगिमे हाँठ सेंक्टी) काकरे नै खोजम् टो, उहाँ गाउँमे माओवाडी आइल बाटैं, जवान जवान लौरन् पकर पकर के लैजाइटै, माओवाडी बनाइक् लाग, अब्ब भर्खर टो कब्लिहान रजेस्वा हे पकर के लैगिनै, ओकर डाई खुब् रोईटिस् उहाँ, टबमारे मैं गमुवा कहाँ बा कहिके टोर घर डौरट डौरट ऐनु टुहिन बटाई, (माओवाडिन हे गरियैटी) टोर बर्का छावा हे फे उ बेर इहे माओबाडी हुइटै कि खाउँबाडी हुइटै बेपट्टा पर्नै, अब एक्कठो टो टोर छावा बा, उहिन फे टोर बर्का छावकहस् बेपट्टा पारडिहीं टो टोर बुर्हापा के लट्ठी के बनी ? टबमारे मै टुहिन गमुवै राटबिराट घरसे बाहेर घुमे जाई नाई डिहिस् कहिके बटाई ऐनु काकु।

नम्मोछिया : (हुँक्कक् चिलम् उटर्टी) हाँ भैया का कर्बे, इ संकटकाल लागल टबसे टो, यहाँ गाउँघरमे हाहाकार मचल बा, कबु किहिनो टो कबु किहिनो इ माओबाडी हुँक्रे पकरके लैजा लैजाके बेपट्टा पारल खबर सुन मिलठ, (लम्मा सांस लेहटी) मोर बर्का छावा हे फे इहे माओबाडी पकरके लैगिनै, टबसे मोर बर्का छावक् कोनो अट्टो पट्टो नाई हो, कहाँ हुइ मोर छावा ? जिटी बा कि मुंवल पटै नै हो, (नटिन्याँ हे डेखैटी) इ सुन्डरी हे फे कत्रा ठग्ना हो, टोर बाबा टोरलाग् मिठाई लेहे गैल बा बराडुर कहिके, रोटडिन् आपन डाई से पुँछ्टी रहठ, बाबा कहिया आई डाई, बाबा कहिया आई कहिके, ओकर डाई फे अपन आँखिक् आँस पोंछ्टी छाई हे टोर बाबा टोरलाग बिर्कुल ढेर मिठाई लैके ऐहीं कहिके झुठा आश्वासन डेहटी, छाइक् बाट हे टर्टी आइल बा।

सोन्चिर्वा : (लैयक् आगी खिट्कोर्टी) का कर्बे काकु ? इ डेस डेखके फे ढिक्कार लागठ, इ डेस मे कब् सान्टी आई ? कब् हम्रे चैनके निड सुटे पैबी ? कबु यहाँ टो कबु उहाँ रोटडिन बम गोला पट्कल् सुन्जाइठ, रोटडिन मनै मुंवल खबर सुन मिलठ, हम्रे कबसम् ऐसिक् डरा डराके जियब्, (लम्मा सांस लेहटी) काकु आजकल इ डेसके हाल डेखके टो, महिन फे इ डेसमे नै बैठ्नास् लागठ, एकओर सोंच्ठु इन्डिया चल्जाउँ, फेर सोंच्ठु, मै बाहेर चलजैम् टो मोर घरकुरिया के हेर्डी ? इहे सोंचके कहुँ जाई नै सेक्ठुँ, बस् डरा डराके बैठल पर्ली रहठुँ गाउँमे ।

(नम्मोछियक् और सोन्चिर्वक् बाटचिट हुइटी रहल बेला सुख्लिक् प्रवेस)

सुख्ली : (अपन गोंन्यम् भिजल हाँठ पोछ्टी) बाबा भाट कब् खैबो? बरा रात होगैल जे, (सुन्दरी हे हेर्टी) इ लवन्डी फे अभिनसम् मकै भुज्टी बा, सुटे जाइक् छोरके, जा झट्टे सुटे पट्ठ्री लगाइल बा।

नम्मोछिया : (सुख्लीक् ओर हेर्टी) आज भुँख टो नै लागल हो, मने एकचुटी लैके आ, खा लिउं, (सोन्चिर्वै हेर्टी) टैं फे खैबे भैया भाट,? आज टोर भौजी गब्डक् पटियक् पटोस्नी बनैले बा, खैबे टो खा ले एकचुटी।

सोन्चिर्वा : नाई नाई काकु, मै भाट खा के आइल बाटुँ, जस्टेक् भाट खा के सेक्नु, ओस्टेक् मै टोर घरवर ऐनु, (भौजी हे बेर्टी) बरु भौजी एक-डुईठो गब्डक् पटियक् बनाईल पटोस्निक् खँरिया चिखेक् लाग डोनियाँ मे लान डेऊ, कैसिन बा टोहाँर बनाइल गब्डक् पटोस्नी?

सुख्ली : (गोनियाँ झरैटी, बेर्चिमनसे उठ्टी) लेउ लेउ भैया मै लैके आइटुं, जनो कैसिन बा, मिठ बा की नाइ हो जनो, टोहाँर गोसिन्यँकहस् टो मिठ बनाई नै जन्ठु।(सुख्ली हंस्टी भन्सामे चलजैठी)

सोन्चिर्वा : (हंस्टी) लेउ लेउ, टुं पहिले लैके टो आउ, टब् बटैम् कट्रा मिठ बनैले बाटो कहिके।

नम्मोछिया : (लैयामे सुखल कन्डी डर्टी) भैया आजकल स्कुलके पर्ह्राई कैसिन् चलटा टो? लर्का स्कूल जैठैं कि नाई जैठैं टो? बरा कम् कम् जाईठ डेख्ठुँ स्कुलिह्या लर्कन्? कि स्कुलके छुट्टी बा? जार बिडा,?

सोन्चिर्वा : (निरास हुइल भावमे) खै काकु का कहना हो का… नी, स्कुल टो चालु रहठ, मनो विद्यार्थी बरा कम् ऐठैं, जार पर्लेक्ओर से हो कि, संकटकाल लग्लेक्ओर से हो, बरा कम विद्यार्थी स्कुल ऐठैं, आजकल माओवाडी फे छोटछोट लर्कन पकर-पकर लैजाइटैं, सायड उहे डरसे फे हुइ सेकी काकु।

नम्मोछिया : (अचम्म मन्टी) नाई टो भैया इ माओवाडी बर मनैन् टो पकर-पकरके लैजाइटैं, मनो इ छोट लर्कन काकरे पकर-पकरके लैजाइटैं टो,? मै इ बाटभर बुझे नाइ सेक्नु, कुछ् बाट टो बुझा भैया, आखिर काकरे?

सोन्चिर्वा : काकरे नि लैजैहीं, छोट लर्कन टो उहाँ गोला, पटाका, बमके झोला बोकैठैं,  टबमारे टो छोट लर्कन पकरके लैजैठैं, किहिनो सुराकी बनैहीं, किहिनो अपन सामान बोकैहीं, टबमारे फे हुइ सेकी काकु, आजकल लर्का स्कुल जैना डरैठैं, इ माओवाडीहुंक्रे लर्कन् लैजाके बिच्चमे बेपट्टा पारडेठैं टो।

(उहे समयमे सुख्लिक और गमुवक् प्रवेश हुइठ)

सुख्ली : (लोटक पानी भुइँयम् ढर्टी) लेउ बाबा पानी और भाट (सोन्चिर्वै डोनियँम् पटोस्नी डेहटी) लेउ भैया टुँ फे खाउ पटोस्नी, जनो कैसिन बा।

गमुवा : (हांठ पोछ्टी) भौजी मोरलाग फे भाट खौंक्के लानडेहो, मै हांठ ढो के आ सेक्नु, बर्का जोर से भुंख लागटा।

सुख्ली : (भन्सम् जैटी) लेउ लेउ मैं लैके आइटु, असिया लग्हो।

(अत्रै कहटी सक्कु जे भाट खाइ लग्ठैं, और फेर से गफ सुरु होजाइठ)

सोन्चिर्वा : (डोनियाँ चट्टी)बब्बा हो बहुट मिठ बनैले बाटो हो भौजी पटोस्नी, अब्ब बर्का डाडा रहठ टो, खुब खाइठ हाँठ चाटचाट,(मन भोहर बनैटी) मनो का कर्ना हो, डाडुक् कौनो अट्टोपट्टो नाई हो, अभिनसम् कुछ खबर नै हुइटिस्, मुवल बा कि जियल बा, कहाँ बा? कैसिन बा? कुछ् खबर नै हो।

नम्मोछिया : (लोटियक पानी पिटी, सोन्चिर्वक बाटमे बाट ठप्टी) महिन टो भैया बर्का छावक् याडमे भुँख पियास फे नाइ लागठ आजकल, खाली छावक् याडकिल आइठ, पटोइह्या फे चिम्टक् झारे कत्रा डोङ्लागैल बा, सुखाईल सन्ठीहस्, (पटोइह्यकओर हेर्टी) हेर हेर चिम्टक् झारे भुट्ला फे सक्कु झरके पाटिर होगैल बाटिस्, जुर्राउर्रा पारे नै बन्ठिस्, काँसेक् हड्डी फे बर्का जोर से डेखैठिस्, बिचारी पटोइह्या चिम्टा नाई करी टो फे का करी, मै टो डुईडिनके पहुना हुइटु, मोर टो आज हो कि काल पटा नै हो, तर एकर टो बर्का लम्मा जिन्गी बाटिस्, कैसिक् काटी अकेली? उप्परसे एक्ठो छाई बाटिस्, एकर भविष्यक् बारेम् फे सोचट हुई, टबमारे टो जत्रा खैले पिले से फे ठुल्हाइठ नाइ हो मोर पटोइह्या।

सोन्चिर्वा : (भौजी हे हेर्टी) हाँ काकु भौजी डोङ्ला टो गैल बाटै, भौजी बहुट चिम्टा कर्ठी डाडुक्, टबमारे हरहर् हरहर् सुखैटी जाइटी, (भौजी हे सम्झैटी) ऐसिक चिम्टा नाइ लेहो भौजी, डाडा एकडिन पक्कै फे लौटके आइ, एक्ठो बहटी रहल लडिया टो बार्ह्र बरष पाछे लौटठ् कठैं, डाडु टो मनै हो, जबसम् सांस टबसम् आस कठैं, डाडुक् ऐना आस कबु नाइ मर्हो भौजी, (नम्मोछियै हेर्टी) हेर काकु टैं फे ढेर चिम्टा नै लिहिस्, टोर छावा एकडिन पक्कै लौटके ऐने बा, ढिरज ढारिस्, बरु गमुवा हे जहाँ तहाँ राटबिराट घुमे जाइ नाई डिहिस्, समय खराब चलटा, अब टोर घरेक् फुल्टी रहल फुला, एक्ठो आसके डिया उहे टोर छोट्की छावा गमुवा टो हो।

सुख्ली : (मसिन बोलीमे, आँखीमे आँस टिल्पिल्वैटी) भैया चिम्टा नाई लेहम् कठु, टबु खै कैसिक इ जिउ नै मानठ चिम्टा लैमर्ठु,  राटडिन सुर्टा ओहँरी रहठ, उप्पर से इ छाई फे सटैटी रहठ, बाबा कहिया आई…कहिया आई मोरलाग मिठाई लैके कहिके? टबमारे टो महिन और याड आइ लागठ हुंकार, (लम्मा साँस लेहटी) मै फे का करु भैया, छाई हे ठागट ठागट फे मिच्छा गैल बाटु, बहुट चिन्टा लागठ छाइक् भविष्यक् बारेम् सोंच्ठु टो, मै जन्नी मनै का करे सेकम् अकेली? कहाँ जैम्? कैसिक् जियम् अकेली इ जिन्गी? छाई फे डिनेडिने जवान हुइटी जाइटा, एकर बहर्टी गैलेक् आवश्यकटा कैसिक् पुरा करम्? मै इहे सब् बाट सोच्ठु टो रोइनास् लागठ भैया।

सोन्चिर्वा : (लैयक् भुट्भुटाइल आगी खिट्कोर्टी) भौजी का कर्बो, टुहुनके जिवनमे अस्टे लेख डेहल रहल हुइ इ भगन्वाँ, कत्रा मजा परिवार रहे टुहुन, सब् टहस् नहस् पारके चलगैल्, अब इ डेसमे सान्ती कबु नाइ आइ कि का ? चारुवर हट्या हिन्सा, बलाट्कार चोरी डकैटी हुइटी रहठ, ऐसिक् कैसिक् डेस आघे बर्ही ? डेसमे प्रजाटन्त्र आइल, लोकटन्त्र आइल, गणटन्त्र आइल मनो खै कहाँ गैल उ सब् ? खै टो जनटा सुखके निंड सुटे पाइटै ? खै टो डेसमे सान्ती ? यहाँ टो लोकटन्त्र प्रजाटन्त्रके नाउँमे जनटन टाटुल कराहिम् भुठ्नाकिल काम हुइटा, नेट्वन् आपन कुर्सी बचैनामे व्यस्त बाटैं, डेस बिकासके काम एकओर ढारके अप्नेभर डेस बिडेस घुमटैं, लाखौं करोडौं खर्च करटैं डेस बिडेसमे घुमके, आपन डेसमे जुन बिकासके लाग डुई रुपिया खर्च कर्ना डरैठैं, (लम्मा साँस लेहटी) काकु इ डेसके राजनीटी डेख्के फे महिन टो डिक्डार लागठ,  सब् अपन अपन पेट भर्नामे लागल बाटैं।अब इहे हाल रही टो हमार डेसमे कबु नाइ आइ सान्टी, हम्रे जनटा अस्टेके चपेटामे पर्टी जैबी, राटबिराट, डिनडुपहर बेपट्टा हुइटी जैबी।

नम्मोछिया : (बैठ्ले बैठ्ले अपन पुस्टा संवर्टी) हो भैया का कर्बे, एकओर डेसके चिम्टा लागठ, एकओरजुन छावक् चिम्टा लागठ, का कर्ना हो का नै, मै टो सोंचे फे नाई सेक्ठुं, उडिन घर्चोरान सम्ढिक् छावक्  लहास फे उत्रेक् नौसरिम् मिलल रहे, कत्रा घिन्हुन से मारपिटके फेकैले रहैं इ माओवाडिन, मोर छावा हे फे अस्टेक् मारके कहुं फेका डेहल हुइही टबमारे टो अभिनसम् अट्टोपट्टो नाइ हो मोर बर्का छावक्, (मनमे साहस जुटैटी) मनो भैया मै अभिनसम् हिम्मट नै हारल हुइटुं, मोर छावक् लहास नै मिलठसम्, मै मोर छावक् ऐना डग्गर हेर्टी रहम्, और मोर पटोइह्या हे फे राँर मनै लगैना लुग्गा लगाई नै डेम्, मै इ डेसमे सान्टीके आसमे बाटुं, सान्टी एकडिन जरुर ऐने बा, मोर छाटिम् परल खाटीके बिर्वा करे, और इ डेस हे सुन्डर सान्ट बनाई, जरुर ऐने बा भैया जरुर ऐने बा।

(राट फे ढिरेढिरे बहुट जोरसे छिपगैल रहठ शान्टी(नटिन्याँ) अपन डाइक् कोनुम् निंडागैल रहठ, सब्के आँखी निडके झारे रसैटी रहठ उहे समयमे सोन्चिर्वा बोलठ।)

सोन्चिर्वा : (पिर्कामनसे उठ्टी) लेउ टो काकु और भौजी राट फे बहुट होगैल, मै फे जाउँ अब घरवर, उहाँ टोर पटोइह्या फे कहाँ गैनै कहिके खोज्टी हुइही, टुहुरे फे सुटो और ढेर चिम्टा नाई लेहो, डाडु एकडिन जरुर लौटके ऐने बा, (हाँठक् घरी हेर्टी) राटिक् 12 फे बजे लागल बा, गाउँ सुनसान होगैल, मै फे जाइटु काकु, बरु एक्ठो लट्ठी डे, कुक्कुर फे खुब् भुँख्ठैं, इहे लट्ठी से मार्के डर्वैम्।

नम्मोछिया : (चिम्ढार आँखी मिस्टी) ले टो भैया ठिके बा, मजा से जाइस्, राट बहुट छिपगैल बा, समय फे नाई मजा चलठो आजकल, सम्हलके रहिस्, और सक्कु जन्हन हे सम्झैटी बुझैटी रहिस्, ले टो भैया राम राम।

(नम्मोछिया सुख्ली और सोन्चिर्वा एक डोसर से राम राम कर्टी बिडाई लेहठैं, पर्डक् पाछे से राटके बोल्ना किराकाँटिनके आवाज ऐटी रहठ, कुक्कुर भुँकल आवाज आइठ, डुरडुर से गिडारिनके बोलल आवाज आइठ और मन्चमे बरल ढिमढिम मढुर लाइट झम्से बुटठ्, पर्डा गिरठ, नाटक् ओराजाइठ)

लेखक् : अंकर ‘अन्जान सहयात्री’
जानकी गाउँपालिका-८

जबलपुर,कैलाली