मोर संघरिया प्यारी संघरिया

एकदमसे उहे याद आजाईठ् । जिन्गीक हर पौलीक नेगाइमे बचपनके कहानी कहाँ हुईही, कैसिन हुईही । छोट्टेसे तिठमिठ बात बत्वाके सरसरसे बयाल आई हसक जवान हुईली । जिहीनसे हम्रे कुब झगडा ते कबु प्यार करट–करट जिन्गीक सक्कु पल गुजरली । ठिके परसे आज महामजा बदरी सित्तर करले बा । उत्तेरक साईट उटियामे बैठल बयाल फेन सुर–सुर फेन बहठ् । लड्का विद्यार्थी सक्कुजे स्कुल चलगिल रहिट । महिन प्यारी संघरिया अलिनाके याद गडगडाके याद आपुगल । कैह मरनु चिठी पठाईक कहले रहु । चिठी फेन नाई आईठो । फेन मै कहनु मै फेन टे चिठी नाई पठैले हुँ । मनमने बत्वाई लग्नु । आज प्यारिक यादसे स्कुल फेन नाई गैनु । आज टे प्यारी अलिनाहे देना पत्र टे लिखके छोरम । ठिक यिहे समय सिमसिम–सिमसिम पानी फेन परे लागल । मै हलहल एकथो कमरा लानके गडगडाके बैठ परनु । आपन बचपनके खेलल् बितल बात आई लागल । डत्तपेनहे मुहेम जकैटी मै खिसीकसे हाँस मरनु । हस्ती पत्र लिख्ना डत्तपेन कापी तयार परनु । एक कोनुवामे जाके चिठी लिख्ना तयार करके सुरु करनु ।
प्यारी अलिना,
गहिर ओ मिठास सम्झना ।

प्यारी अलिना टुँ टे रुख्वा बनके ठह्रियागिल बातो । मै कहुँ नाते कबु पहुनी खाई अईथो, आपन घर नाते कुछु हालखबर पठैथो । महिन पता बा टुहिन आपन बचपनसे संगे रहल संघरियाहे तोहार मन आधावधा भुलागैल हुई । कितो वहाँ आपन मनै नाई भेटाके हाल खबर कुछु सन्देश देना अप्थ्यारो परल हुई । प्यारी अलिना मै पत्र लिख्ना एक अँठुवार होसेकल । मने का कहिके लिखु, कैसिक लिखु । लिख्ना टे लिख धारु मने पढके फेन नाई मजा हो कहिके ओ कहुँ गल्ती हुई कहेक डराउँ । अत्रा दिनमे अत्रा फरक पर गैल बातै । कहिके पत्र पुरा कराके फेन पत्र सक्कु चिर दिउँ । मने आझ सबठिक ठाक बा । दंदुरमे जुर बयाल ठिके पर घाम ठिके पर छाही दलमल–दलमल फुलुवारमे फुला फुलल् मने महिन पता बा । यिहे फुलामे टुँ ओ मै संगे जोग्नी पकर पकर खोब खेलाई । टुँ जोग्नी नाई परक पाउँ टे उदास होजाउँ । मने मै तुहिनहे एकथो महकना फुला देके खुश करालिउँ । टु फेन मने खुशी होजाउ । पता बा अलिना तुहिनसे हम्रे संगे गोटी खेले लागी टे मै तुहिनसे हट्जाउ टे टँु कत्रा चलाउ । ‘हटगैलो–हटगैलो चार मुर्घा परगैलो’ कहिके मै तोहार भुत्ला कपारी मनिक तान दिउँ । टब महिनसे टुँ भुसियाजाउँ । टुहिनसे कान पकरके मै फेनसे माफ माँगु । फेन टुहिनहे पाकल अमरुट टुरके खावादिउ टब फेन टुँ खुशी होजाउ । पता बा टुहिन एक दिन महिनसे भेट नाई हुईल रहो टब कत्रा आँश गिरैलो । ओ कबु फेन एक दिन फेन नाई छुट्ना बाचा करली । दुनु जाने बाहोके बाल्हामे झुलके नाई छुट्ना कसम खैली । ओहे समयके खेलहो आज टोहार बिना मोर जियरा तलुवामे बिना पानीक मछरिया छट्पटाई हस छटपटाके रहिजाईटा । पता बा अलिना स्कुलमे फेन टोहार मोर संगसाथ कौनो रोज फेन नाई छुटे । मनै कहै अईनके जोडी राधा कृष्णके जोडी का पुगे । कत्रा नाई कहनै मनै अईनके माया प्रेम सदाके लाग अस्तहके बझल रहे जनम जनमके लाग । सातो जुनी ना छुटे मने हम्रे यि कुछु मतलब नाई राखके समयके गतिमे जाईल करली ।

प्यारी अलिना जब्बे मै टोहोर फोटो हेरथु । एकचो हेरके हौसे नाई पुगठ् । याद हुई प्यारी टु मोर लाग मिठमिठ लड्डु खास्ता लानके खाई देउ । मै टुहिन एकथो सम्झैनु अलिना टु पैसा खर्च नाई करहो कहिके । हम्रे आपन कमाही किल खर्च करक परठ । नाई तो फाल्टु खर्च नाई करक परठ कहनु । टुँ मोर बात मानगिलो उहे दिनसे मोर बात हे मनमे धारके पैसा खर्च कैनामे रुकगैलो । मनो मोर लग खैना कबु सेलरोटी कबु हलुवा बनाके लानो तो कबु खिचरी बनाके लानो । मिठमिठ सक्कु दिनहस खैना किल खवाईट रहो । मनो मै फेन टोहार लानल सक्कु खैना प्रेमसे खा धारु । यि फेन टहिन पता हुई मै टोहार लाग रोटी किल लैजाई सेकु । आउर कुछु फेन नाई खवाई सेकु । मने टु फेन मोर लैगिल रोटी बहुट प्रेमसे खालेउ । मने महिनहे अपनही मनभोहर जाने कैसिन कैसिन लागे । का खरे कि टु महिन अत्रा मिठमिठ खैना खवाउ । मै टे टुहिन रोटी सिवाय आउर कुछु फेन नाई खवाई सेकु । संघरियाके नातासे टुहिन एकथो डत्तपेन फेन संघरियक चिन्हा नाई सेक्नु । हेरो ना अलिना मै टुहिन आपन मैगर मैया देना आउर कुछु फेन नाई देहे सेक्नु । मै कत्रा अभागी बाटुँ ना ? पता हुई प्यारी मै जब टोहार थोकौनी हुईल सुन्नु टे ना खाना खाजाए पेटभर, ना सुत्ले निंद पुगे, ना पढु दिमाग लगाके । बस टोहारे हेरु फोटु, बस टोहारे सम्झना करु । काखरे टु महिन छोडके जाईटो कहिके टोहार फोटोहे गरिया मारु फेन आपन गिरट आँशहे पोछलिउ । टोहार फोटु छाटीमे चप्ट्याके सम्मस रात ओस्तहे निंदाजाउ । एक निंद सुतके जागु टे फेन टोहार फोटु हेरके मजासे सिरहन धारके निंदाईट रहुँ । मनो यि पता हुई टुहिन स्कुलमे ज्यादा संघरियनसे नाई बोलु, ना हाँसु ना यहोर उहोर नेंगे जाउ । टु जबरे संगे पानी पियक लैजाउ टबे किल जाउ । कत्रा धेउर बत्वाईना बात रहे टोहर लगे उ फेन मै सक्कु बत्वा नाई पैनु । टु आझ एकदमसे चिरकहुवा घाम बनके झँरसादेलो दुर हुईना डगर खोजलेलो । उ डगरमे जाके एकचो फेन नाई बलैलो । मै एकथो झँरसल बुट्की पकरे रोईटी रहगैल रहुँ । समयके खेल कुहुँ कि का कहुँ । टोहार भोजके नेउटा जब मोर घर पुगल तब महिन अईसीन लागल बदरी घर भसक्कके माटीक भित्तर चलगैनु । टरटरसे तीनचार बुँदा आँश गिरपरल । आपन कोठामे जाके रोई छुटपरल । आँश लेके सक्कु छाटी भिजगैल । सक्कु सिरहन फेन भिज गैल रहे । माघके महिना रहे । अत्रा जाडमे फेन महिन घाम लागे हस करे टोहार सम्झनामे । माघ महिनाक १२ गते टोहार बरात अईना रहे । पाँच दिन रहिगैल रहे, १२ गते पुग्ना । मै मनमे सोच्नु । आभिन टे अलिना पढ्थै । मने हुँकार घरके मनै काखरे भोज करे लग्लै मै टे कुछ बुझे नाई सेक्नु । फेन नाईहस लागल । महिन लागठ बनल घरक बातै । अलिनाके धन आपन धनसे छुट्याई लग्नु । फेन धनसे का हुई । फेन मै सोच्नु कि अलिना मोर संगे नेंगथै टबे हुँकार घरक मनै देखे नाई सेकल हुईही । टबे मारे अत्रा मजासे पढ्टी पढ्टी अलिनाके भोज नाई करैना रहे । काखरे हमार समाजमे अईसीक मैया करट देखके काखरे आँखी फुट्थिन् । अईसीन मैया प्रितिमे फेन हमार समाज धन खोजठ् । धन टे एक दिन रही, दुई दिन रही । मने सक्कु भसम होजाई । मने मैया कना कभु जरि ना, कभु उडी ना टो कभु मरी मैया टे हसीखुशी दिन बनाईठ् ओहेमारे मैया सबसे भारी चिज हो ।

मैया जिउसे फेन बड्वार हो । अलिना हुजुर बाटिन कि नाई कहिके टोहार लगे गैनु । मने टु घरे नाई रहो । टु बारीम टिना टुरे गैल रहो । यि बात फेन मोर कोठरियम रहिगैल । दिन बिटट् गैल १२ गते आगैल । अलिना टुहिनसे मिल्ना जगा बटैनु । मने टु फेन ठिक समयमे मोर बताईल जगामे आपुग्लो । मै का कहिके बोलुँ ? कैसिके बत्वाउँ ? टुँ कहलो रबिन काखरे बलैलो, मै फेन कहलु प्यारी टुहिनसे मोर मैया कत्रा भारी बा ? मै टुहिन कत्रा मैया करथु ? आज टु महिनहे सुखाईल पत्ता बना छोडके जाई लग्लो । का टुहिनहे मोर मैया नाई लागथो, अत्रा कती किल टु कहिमरलो । प्यारा रबिन टु अईसीन ना कहो ।(आँश आँखीमसे दुनुजनहनके झरझरसे गिर परल रहे) टुँ कहलो मै टुहिन छोडके जाईटुँ । मने टोहार मैयाहे छोडके नाई जाईठु । मै जौन कोनुवामे रहलेसे फेन टुहिनहे मैया कैना नाई छोडम । महिन टोहार मैया लग्टी रही । आउर सम्झना फेन बहुट आई । आँश पोछ्टी फेन कहलो । प्यारा रबिन मै टुहिन छोडके नाई जैने रहुँ । मने मोर डाई बाबा कहनै टै छाई यदि हमार रोजल भोज नाई करबे टे पठ्री सदाके लाग खाली भेटैबे । डाइ बाबनके मुहसे अईसीन बात सुनके मै उ रातके सम्मस रात रोईल रहुँ । हमार बुदीहे टु अलिना रोई लागलरहो । मै कहनु टु ना रोउ । टोहार आँश पोछ्टी कहनु । टुहिनहे नाई भेटैना टोहार दंदुर कोनुमे खेले नाई भेटैना टे मोर सरल माथेम नाईलिखल रहल हुई । मै आपन करमहे ठेस लगाउ कि आपन भाग्यहे ठेस लगाउ कि आपन यिहे गरीबी हालतहे गरियाउँ । मने अत्रा कती किल जोरसे रोई लागल रहुँ । टु मोर बहटी आँश पोछ्टी कलो ना रोउ टु रबिन मै चलजिम टे मजासे पढहो । हमार बिगरल अशिक्षित समाजहे सुधार करहो । आपन जिउक फेन ध्यान देहो । कोनो मजा लवण्डी खोजके मोज करलेहो । मोर कुच्छु चिन्ता नाई करहो । मै टोहार मैया भेटाके जहा फेन मजे रहम । अत्रा कती किल मै कहिमरनु । ठिके बा अलिना टु ना रोउ । साँझ फेन हुईनाहसक बा । मै फेन राईट रहुँ । हमार दुनु जहनके आँखीमसे आँशके लदिया बहके सक्कु छाटी भिजल रहे । मै कहनु अलिना दिन फेन धरके लागल । टोहार भोजके दिनहो आब हमरे घरेओहोर लागी टे । टु फेन कहलो ठिके बा । मन टे आभिन कहट आभिन बत्वाईना छोडके नाजाउ । मने हमार मिलनके सक्कु समय ओरा गैल रहे । हमरे विछोडके हात मिला लेली ।

अन्तिममे टु मोर गालेम एक चुम्मा खैलो । टब हमरे बिदाईके हात उठालेली । हमरे दुनु जाने आँश पोछ्टी आपन आपन घर पुग्ली । प्यारी अलिना यि घट्ना टे टु सक्कु जनले हुईबो । मने यि बातमे चित्त ना दुखैहो । मैते टोहार सम्झना अईलक ओरसे लिखल हो । तभु फेन मै आपन किस्मतहे चोरी लगाउ कि करमहे । आझ टुहिनसे मैया करेबेर झगरा करेबेर कत्रा मजा लागे । आझ टु एक समुन्दरके पार चलगैल बातो । अत्रा मिलनसार संघरियाहे फेन एकचो फेन याद नाई आईल ।

ठिके बा यि बात छोड दि बरु टोहार हालखबर कैसिन बा ? टोहार पिहुवाके हालखबर कैसिन बाटिन ? टोहार परिवारके हालखबर सक्कु ठिक्के हुई कहना आशा कैले बाटुँ । ओ ठिके रही कना भगवानसे प्राथना कैले बाटुँ । मोर टे जब दिल धकधकैना छोडी टबे किल टोहार सम्झना मेटाई । ठिके बा कबु फुर्सत निकारके छोटओट चिठी लिखके पठा दरहो । महिन आशा बा मोर पत्र भेटाके टुहिन एक घचिक पक्का फेन खुशी लागी । पत्र फेन लम्मा होगैल । मन टे कहठ् आउर लिख । मने कत्रा लिखु । लिखके फेन टे नाई ओराईथो अलिना । यि पत्र लिख्नामे कहुँ गल्टी हुई सेकी ओकर लग क्षमा मागटुँ । लेउ टे अलिना फेनो भेट हुईबी कना वादा करटी दत्तपेन बन्द करे जाईटुँ ।

ओहे टोहार अभागी मित्र
रबिन तुसा