विदेशी सोचके एक हल्कोरा

विदेशी सोचके एक हल्कोरा

रामचन्द्र चौधरी
विश्व अब्बे आर्थिक क्रान्तिके डगरमे दिन प्रतिदिन आघे बहरती बा । मने नेपालके सन्दर्भ भर ठिक उल्टा डेख मिलट । नेपालके सन्दर्भमे हेरबेर उत्पादन दक्षता हुइल ओ दक्ष युवा जमात दिन दिन विदेशीना क्रम बहरती गील बा । यकर प्रत्यक्ष प्रभाव नेपाली समाजमे डेख मिलट । सरसरती हेरबेर धेर जसिन युवा वर्ग बेरोजगारीके समस्या देखइती अपन कर्तव्य व जिम्मेवारी से दिन–दिन दुर हुइतीबाट, कर्ना–खैना उमेर कलेक नै युवा वर्ग हो ।

 

मने नेपाल विगतके राजनितिक, आर्थिक, भौगोलिक यावत समस्याके कारण आज युवा शक्ति विदेशीना क्रम झन् बह्रल बा । तत्कालके लग आर्थिक समस्या दुर हुइले से फे दिगो रुपमे नेपाली भूमिमे नै उत्पादन तथा रोजगारी के सिर्जना हुइना कामके पहल ना ते सरकार पक्ष से हुइल हो ना ते हालके युवा वर्गमे यि विषयमे सोच्ना फुर्सद हुइन् ।
युवा जमात विदेशीना कारणले हमार नेपाली समाजमे प्रत्यक्ष रुपमे बहुत प्रभाव परल बा । एक ओर हेरबेर समाजम दिन–दिन सामाजिक, साँस्कृतिक, राजनितिक, आर्थिक, नैतिक रुपमे फे धेर प्रभाव परल डेख मिलट । सामाजिक रुपमे कहेबेर हाल नेपाली समाजमे नेपालीपनसे फरक पश्चिमेली रहन–सहन, खानपिन के प्रभाव बहरती गिल बा । ओस्तेक पहिरन के क्षेत्रमे फे नेपाली समाज पूर्ण रुपसे प्रभावित हुइल बा कलेसे साँस्कृतिक रुपमा झनै नेपाली समाज दिन–दिन ओझेल हुइटी बा ।
यिहे समस्या से हाल गहिर रुपमे अरझल बा थारु समाज । शैक्षिक रुपमे पाछे परल थारु समाज राजनीतिक, आर्थिक रुपमे फे धेर पाछे बा । सदियो से परम्परागत खेतीपाती करके जीवन चलैटी आइल थारु समाज हाल आके धेर समस्यामे परल डेख मिलट । एकओर परम्परागत खेतीपाती करके जिन्गी धन्टी आइल अवस्था आब नाई रहिगिल हो । कारण दिन–दिन जनसंख्या वृद्धि, कृषिजन्य, अन्नबाली उत्पादन योग्य जग्गामे बस्तीकरण, प्रदुषण यावत समस्याक कारण उत्पादन फे कम हुइटी गिलक अवस्था बा । याकर कारण प्रत्यक्ष व्यक्ति, परिवार, समाज लगायत एकमुष्ट राष्ट्रिय रुपमा प्रभाव परल अवस्था बा ।
दिन–दिन समाज पश्चिमीली प्रभावमे परती गैल ओरसे व्यक्तिगत, पारिवारिक आवश्यकता पूरा कर्ना क्रममे अब्बेक युवा जमातमे तत्काल छोट समयमे धेर कमाई डेख पर्ना डगर कलक विदेश हुइलेक ओरसे नेपाली युवा जमात विदेशीना क्रम बह्रल हो ।
तत्कालके लग रोजगारी समस्या पूरा हूइले से फे आर्थिक समस्या टर्ले से फे दिगो रुपमे समस्या आखिरमे जसके तस बा । बल्की झन् समाज पाछे परती गिल अवस्था बा ।
हमार थारु समाजके मनै धेर जसिन विषयम फर्छवार हुइले से फे अभिन सम आर्थिक व राजनितीक रुपमे भर संकुचित सोँचके नै बाट । गाउँ समाजमे एकथो कहकुट बा ‘घर फुटे गँवार लुटे’ अभिन सम हमार थारु गाउँघर वा घरानामे यिहे प्रवृत्तिके कारण थारु समाज पाछेक पाछे परल अवस्था बा कलेसे उप्परसे झन्–झन् औरे–औरे समस्या थप्ती गइल बा ।
जनसंख्याके हिसाबसे नेपालके चौथो हिस्सा ओगटल थारु समुदाय साँस्कृतिक रुपमे फेर धेर धनी बा मने हाल आर्थिक, व्यवाहारिक, भाषागत, साँस्ककृतिक रुपमे दिन–दिन ओझेल हुइना क्रम जारी बा । यी सक्कु चिजहे संरक्षण कर्ना कर्तव्य, जिम्मेवारी कलेक अब्बेक युवा वर्ग के हो । मने अब्बेक युवा जमात अपन आवश्यकता परिपूर्ति कर्ना क्रममा अपन सक्कु सामाजिक दायित्व व जिम्मेवारी से दुर हुइटी गिल अवस्था बा थारु समाजमे ।
कर्ना खैना उमेर नै युवा वर्ग हो । जवान रहत सम घरसे दुर, समाजसे दुर, देशसे दुर रहना । ज्यादातर विदेशी बैठाई ५÷७ वर्षके हाराहारी मे रहल देख मिलत । विदेशमे रहलसम व्यक्तिगत, घरपरिवार आर्थिक रुपमे सम्पन्न हुइले से फे आखिरमे घर आके धेर जसिन उहे बेरोजगारीके समस्या नै हो । जिन्गीभर घर–परिवार छोरके विदेश रहना अवस्था फे नाई हो ओ विदेशी पिडा अपन ठाउँमे बा ।
अब यि समस्या हे कम करेक लग गहिर रुपमे सोँचे पर्ना धेर चिन्तक विषय बनल बा । अस्तेक युवा जमात विदेशीना क्रम रही ते काल हमार समाजके लग, राष्ट्रके लग कौन वर्ग कर्तव्य निर्वाह करी ? अइटी रहल पिढीँ हे कौन वर्ग सामाजिक मूल्य–मान्यता, साँस्कृतिक रुपमा जानकारी कराई ? नेपाल राष्ट्र हे के दिगो रुपमा सक्षम, सम्पन्न कराई ? नेपाल राष्ट्रके विकासमे के हाठ दारी ? यि सक्कु एकदम सोचनिय विषय हो ।
थारु समाजके लग ओ व्यक्तिगत, पारिवारिक दिगो विकासके लग अब्बे सोँचे पर्ना, कुछ करेपर्ना कलेक हम्रे थारु युवा जमातके एकदम गहिर विषय हो । यकर लग सबसे पहिले ते अब्बेक सक्कु थारु युवामा एक औरे जहन प्रति पारदर्शिता युक्त व्यवहार, सकारात्मक ओ सिर्जनात्मक सोँचके नितान्त आवश्यक बा ।
समाजके सिर्जना व्यक्ति, घर–परिवार मिल्के बनल बा । हमार थारु समाजमे सक्कु व्यक्ति, घर सम्पन्न फे नाई हुइट । एकल रुपमा कौनो उत्पादन मुलक काम अप्ने नेपालमे करे सेक्ना क्षमता फे नाई हो । विश्व आर्थिक क्रान्तिके डगर ओर लग्ना एकथो प्रमुख बात शेयर लगानी ओ शेयर बजार, सयुक्त लगानीमे मेरमेरिक कम्पनीके स्थापना ओ फर्ममे लगानी हो । जौन प्रवृति हमार नेपाली समुदायमे एकदम कम बा जहाँ थारु समाजके ते बाते कहाँ हो कहाँ ।
थारु समुदायमे एकथो नाईमजा प्रवृति प्रगति कर्ती गइल व्यक्ति वा घर–परिवारके गोर पकरके तन्ना चलन, तरे गिरैना चलन बा । ‘गोत्यार ओ हत्यार’ के प्रवृति बा । जेकर कारण आज थारु समुदाय शैक्षिक, आर्थिक, राजनितीक, साँस्कृतिक आउर–आउर कारणसे बहुत पछगुरल बा । जबसम हमरे थारु समुदायमे गोर पकरके तन्ना चलन, ‘घर फुटे गँवार लुटे’ प्रवृति, ‘गोत्यार ओ हत्यार’ प्रवृति हे नाई त्यागब तबसम हमार थारु समुदाय शैक्षिक, आर्थिक, सामाजिक, साँस्कृतिक, राजनितिक रुपमे सम्पन्न नाई हुई ।
अब सोँच ते बदल्ना मने कैसिक बदल्ना ते ? वकर लग अब हम्रे युवा वर्गमे सकारात्मक ओ सिर्जनात्मक सोँचके नितान्त आवश्यक बा यहाँ । अब्बेक सक्कु युवा वर्गमे व्यवहारीक पारदर्शिता धेर आवश्यक बा । ‘सय जहनके लाठी, एक जहनके बोझा’ यी कहकुट अस अब युवा–युवा एक हुके हमरे कुछु सकारात्मक ओ सिर्जनात्मक, उत्पादन मुलक कामके थालनी कर्ना नितान्त जरुरी डेख मिलल बा । हम्रे जत्रा फे देश भित्तर ओ बाहेर रहल युवा वर्ग सयुक्त लगानीमे मेरमेरिक फर्म, उद्योग स्थापना ओ संचालनमे विशेष सहभागिता जनैटी गिलेसे अपने नेपाली भूमिमे अपने गाउँठाउँमे रोजगारीके सिर्जना ओ आर्थिक रुपमे सक्षम हुइटी जिना फे डेख परत ।
अपने गाउँठाउँमे उत्पादन ओ बजारीकरणके काम हुइलेसे अदक्ष, अर्धदक्ष, दक्ष सक्कु वर्गहे रोजगारी देह मिल्ना अवसर के सिर्जना हुई, बिना कामके रुपमे रहल पूँजि उत्पादन मुलक काममे लगानी हुई साथमे अपने गाउँठाउँमे युवा जमात ओ अपनसे बर मनैन विचके सम्पर्क बहरती जाई ज्याकर कारणसे हमार पूर्खा पुरीनिया हुक्रनके मेरमेरिक सामाजिक रहन–सहन, रीतिरिवाज, साँस्कृतिक बारेमा प्रत्यक्ष जन्ना अवसर मिलहिन ।
यि सक्कु बातहे सोच्ती एकफेरा सक्कु युवा एकताके डगरओर लग्ना होे की ? संयुक्त रुपमे अपने भूमिमे कुछ करक लग लागी पर्ना हो की ?

  • मुनुवा–४, ओखरपुर
    कैलाली