हिरगर बगाल के २४ भाग नारायणपुरके अम्बासा गाँउमन सम्पन्न

हिरगर बगाल के २४ भाग नारायणपुरके अम्बासा गाँउमन सम्पन्न

हिरगर संवाददाता,
टीकापुर, २९ चैत
    हिरगर साहित्यिक बगाल टिकापुर शाखा अबखरिक साहित्यिक भाग २४ नारायणपुर २ अम्बासा गाँउमन सम्पन्न कर्लेबा । हिरगर साहित्यिक बगालके अबखरिक औपचारिक रुपमन दर्ता हुइलेक आझ एकबर्ष ३ दिन पुगल अवस्थामन यकर बार्षिक उत्सब ओ लावाबर्ष २०७३ के शुभकामना आदनप्रदान कार्यक्रम सम्पन्न कर्लेबा । कार्यक्रम के बर्कापहुनक रुपमन सदभावना पार्टीक केन्द्रिय सदस्य फोनिराम चौधरी रहै कलेसे खास पहुनक रुपमन विदेशके कोन्वम लम्मा समयसम बैठके भरखर आइल चितवनके साहित्यकार अभागि कुमार ओ घोराही दाङ के विष्णु कुसुम सुर्खेतके साहित्यकार दिर्घ चौधरी ते पहुनामन गायकार दर्पण कुशुम्या, लेखराज रमेश मिस्सन ओ साहित्यकार श्याम सरावी, ठाकुर अकेला ,अनुराग सायर दाह्रीवाला,रमेश चाेधरी बर्दियासे रहैँ कलेसे गँगाराम डगौरा कंचनपुरसे वस्तहिके कैलालीक साहित्यकारमन तुलाराम सनम , असिराम चौधरी, लाछु डगौँरा , अनिता, सागर कुश्मी, छोटेलाल , सिता, संगिता, घनिमाया, लगायत करिब सैँयौजहनके साहित्यकार , गायककार , फिल्मी दुनियक मनै लगायत बुद्धिजिबि, पत्रकार समाजसेवि , शिक्षक , गाँउक भल्मन्सा,लगायतके उत्साहजनक उपस्थिति रहे ।

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कार्यक्रमके स्वागत मन्तव्य रामचरन कुश्मी, देलेरहैँ ते घरगोसियक रुपमन हिरगर साहित्यिक बगालके टीकापुर शाखक अध्ययक्ष अंकर चौधरी रहै ते उदघोषण शाखक सचिब महेश चौधरी ओ बसन्ति चौधरी कर्ले रहि । कार्यक्रम के उदघाटन दियाबारके सुरु हुइलरहेकलेसे साहित्यक ओंरी दिव्या प्रयासि कर्लेरहि क्रान्तीकारी धारमन टीकापुर घटना जोरके अपन कविता ओ गजल सुनैली कलेसे दर्पन रमेश ओ लेखराज अ अपन मिठ स्वरसे कार्यक्रम चौकस सुहावन बनेपुगलरहे । साहित्यकारनके रचना प्राय लावा बरष केन्द्रित हुके ओ देशके समाजके सामय सापेक्ष रचना ज्यादासे सुनेमिलल । कवु हाँस्य कलाकार हाँसाके टे कवु रचना चिन्तन क्रान्तीके बासआए । करिब करिब थारु पोषाकहे मैया करटि अ अपन पैहिरनमन ज्यादासे मनैनके उपस्थिति रहे । कार्यक्रममन दुरसे आइल पहुनन यहाँक थारु परिकार ढिक्री खाके फेन थप थारुनके गितबाँस, खानपान,भेषभूषा जगाइपरल कना अवाज आए ।

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बर्का पहुना फोनिराम चौधरी अपन मन्तव्य देति कलैँ ऐसिन मजा कार्यक्रममन आझ मै पहिलबार उपस्थित हुके अपनहे भाग्मानि सम्झति यी कार्यक्रम छोरके जैना मननि लाग्ठो कनै । आकुर बाट ठप्टी कनै हम्रे आजुक जमानम बिदेशि सँस्कार हे कुरितिहे देश ओ समाजमे रहल व्याप्त समस्याहे अपन साहित्य कला मार्फत हमार समाजहे सुधारेपर्ना जरुरीबा कलै । वस्तहिके खास पहुनक रुपमन रहल अभागि कुमारफेन अप्ने बिदेशके उ एक कोन्वम जहाँ थारुभाषा कोइ बोलट निसुनमिल्ना जहाँ अप्ने अक्केली फेसबुक नेटमन किल हेरेमिल्ना मनो आज यी कैलालीक हिरगर बगालके यी अत्नाभारी साहित्यक कार्यक्रम देखके महिन खुशी लागलबा कहटि मनो हमार जत्नाफेन थारु साहित्यक सँस्थाबा सब रीनमन बा यदि यी अवस्थम अप्ने रहि कलेसे अप्नहि भुख्ले रहिटे कटना काम करि तब मारे हम्रे फेसबुक चलाके महिनम सैयौँ रुप्या ओरवैना मनै अब लेबि १०० वा ५० सेक्ना जतिके मासिक रुपमन उठाइ ।
कार्यक्रम हिरगर साहित्यक बगालके केन्द्रिय अध्यक्ष अपने अपनहे आझ एक बर्ष पुरा करल हिरगरके यी शुभ यात्रम अपन जम्मु १६ शाखक सदस्यन ओ सल्लाहकारन शुभचिन्तकन दिल से धन्यवाद देति अस्तहिके यिहिनसे जोरके हिरगरके अकुर सहयोग के आपेक्षा आस करटु कहटि समाजके ऐना मानजिना साहित्य आव समाजके यथार्थ कहानी , प्रगतिलेखन, ओ अपन सँस्कृति आझ बरा नाजुक अवस्थम पुगसेकल ओ यीहिन बँचैना अति आवश्यक रहल मने दुःखद बात यी बाकि आज सम्म बुद्धिजिवि , राजनितिकज्ञलोग नाहि कौनो सँग संस्था यी आदिवासिन के लाग यकर सँरक्षन हुइना क्रियकलाप करल बिल्गलहो तब मारे सबजे मिलके यकर सेहार सुसार कर्ना जरुरी बिल्गलबा कनै । ओ बात थप्टी हिरगर डट कम टबेमारे बिश्वसामु  नानलहो थारुनके सँस्कृति विश्वकै सबसे धनि सँस्कृति बा मनो बहुट हमार लोपहुइट हुसेकल ओ हुइटिबा टब मारे यहर बारेम चिन्तन कर्ना ओ करि कना अभियान स्वरुप नानलहो ।

वस्तहीँके केन्द्रीय सचिव सागर अाे काेषाध्यक्ष गंगाराम डगाैरा हिरगर साहित्यिक बगालके बारेम मन्तव्य देलेरहै ।