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हिरालाल सत्गौँवा

हिरालाल सत्गौँवा, अध्यक्ष
सबसे पहिले सेवालगु , जय गुर्बाबा , जय अखरिया ! नेपाल बहुजातीय, बहुधार्मिक, बहुसांस्कृतिक मुलुक हो । यहाँक धेरसे जात अपने मौलिक परम्परा, भाषा, कला, संस्कृति ओ साहित्य बा । नेपालके २२ जिल्लामन आदिमकालसे बसोबास कर्ति आइल थारू जात फेन एक हो । जेकर अपने रीतिरिवाज, लवाई–खवाई चाल–चलन, भाषा, संस्कृति वस्तहिँ साहित्य बाटिस । आझुक इतिहासमन यी थारु साहित्यिक पहिला वैवसाइट स्थापना हुइलेकमारे मनहे बरा खुसि लागलबा । आझुक विकशित यूगमन समयके परिवर्तन सँग आम विश्वनै छोट बनसेकल अवस्थामन हम्रेफेन अपन भाषा सँस्कार , रीति रीवाज , चालचलनसे जहाँ रलेसेफेन लग्गे रनाचाहि , माया कर्नाचाहि अपन इतिहास जन्लेरनाचाहि कना हिसाबले यकर स्थापना करलहो । मने अझुक जमानाके डौरान अनुसार ओकर विकासके सँगे कुछ चाज विस्रइना , वकर मूल्य ह्रासहुइना , ज्यादा प्रयोग नैहुइनक कारण उहिनहे विस्रइना अवस्था आगिलबा । माओवादीनके जनयूद्ध अवस्थामन ऊ यूद्धके कारण हमार आम सँस्कृति ठाह्रे असर परल विल्गलबा । रातके डफ ठठाके धमार गाके हल्लाकरे नैमिलेलागल , वस्तहि नाँटक , सखिया मघौटा झुम्रा ,लगायत रातके हुइना जम्मा वत्नाकिल कहाँ दिनके सुख चयन हेराके गैना सजना मैना , सिँगरु , जम्मु गीतबाँस , सँस्कार जम्मुमन प्रभाब परल । आजुक भौतिक विलाशिताके जिवनशैलीमन पर्ना हमार समाजफेन हुसेकल , जेकर कारण तमानजने स्वदेशमन जागिर , जिन्गी गुजाराकर्ना ठाँउ नैपाके अपन जाँगर विदेशमन बेँचेपुगल ते पाउइयनफेन फरक वातारणमन काम करेगैल तमान बात बा जेकर कारण हमार जम्मा भाषा , सँस्कार , रहनसहन , खानपान , चालचलन , सोँचाइ , जीवनभोगाइ , विचारधारा , मूल्यमान्यता , खेलकुद , हरचालीमन प्रत्यक्ष असर परलबा । हमार परम्परागत रुपमे गुर्वा , वैदवा , भल्मन्सा , चिराक,घरेक देवीदुर्गा , दर्शन जैसिन आदर्श ओ ओकर भित्तरके रहल महानता , यकर पाछे जुटल इतिहास पहिचानसब देशके कानून , पह्राइहुइना किताब एकल भाषा सँस्कृती , केन्द्रिकृत एक भाषिय पाठ्यक्रम ,मिस्रित समुदाय , धर्मसे साँकसित बनेपुगलबा । जेकर कारण हम्रे अपन देशमनसे धेर नैसेक्लेसेफेन कुछहडसम अपन परम्परा सँस्कारहे सँरक्षण सम्बद्र्धनके लाग ओ विश्वके आघे हमार जात ओ अन्य जातिनहे अध्ययन स्थाल या स्रोतके रुपमन प्रस्तुत कर्ना प्रयास जरुर करब । आझुक जर गस्काके वैठल समस्या कलेसे हमार आमूल सँस्कृतिमन ठाह्रे प्रभाव पर्लेबा । आझुक यूवा पुस्ता समयके नेगाइ अनुसार अपन भविष्यके चिन्ताकर्ति शहर बजार , बिदेशजैना क्रम ज्यादाबा जोन कारण अपन पुर्खनसे ज्यादा वैठेनैपाके जेकर कारण वहुत हमार आदिबासिनके सँस्कृती यइनके मूल्यमान्यता ठाह्रे प्रभावित बा । समयके विकास सँग सँस्कार मन ह्रासहुइना , विकास हुइनैपैना दुःखके बातहो । यहाँ तमानेक सँस्था स्वार्थी अपन पेटके कारण जिन्गी गुजरना साधन बनलहस विल्गठ । जेकर कारण हमार सक्कु चाज लोपहुइ पुगलबा , हुइतीबा ,हुसेकल ओ हुइनाक्रममन बा । तबमारे आझुक समुदाय विकास के सँग हम्रे फेन उहे प्रबिधिके सहारा लैके बहुत बातेम सेक्नासम सल्लाह सुझाव , अन्र्तक्रिया करति सेक्नासम अपन तरफसे बचैना कोसिस ओ बँचाउकना अभियान हिरगर साहित्यिक बगाल ओ हिरगर वैवसाइट खोलके संचालन करलेबति ।धन्यबाद ।

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